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मोदी और जिनपिंग के स्वागत के लिए 18 तरह की सब्जियों और फलों से गेट सजाया गया

10 महीने पहले
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सब्जियों और फलों से सजाया गया गेट।
  • सब्जियों और फलों से सजा गेट महाबलीपुरम के पंच रथ के करीब बनाया गया था
  • इन्हें तमिलनाडु के विभिन्न इलाकों से मंगाया गया था, ज्यादातर सब्जियां आर्गनिक थीं

महाबलीपुरम. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच आज तमिलनाडु के महाबलीपुरम में अनौपचारिक मुलाकात हुुुई। इससे पहले दोनों नेताओं के स्वागत के लिए यहां के पंच रथ के पास एक बहुत बड़ा गेट बनाया गया था। इसकी सजावट में 18 प्रकार की सब्जियां और फलों का प्रयोग किया गया। इन फलों और सब्जियों को तमिलनाडु के विभिन्न इलाकों से मंगाया गया था।
 
डिपार्टमेंट ऑफ हॉल्टिकल्चर के एडिशनल डायरेक्टर तमिलवेधन ने बताया कि इनमें से अधिकांश सब्जियां ऑर्गनिक हैं और इन्हें सीधे खेतों से यहां लाया गया था। शोर मंदिर के पास बने गेट पर पारंपारिक केले के पेड़ लगाए हैं। सफेद और लाल रंग के गुलाब भी डेकोरेशन में इस्तेमाल किए गए। दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी अनौपचारिक मुलाकात है। पहली अनौपचारिक बैठक वुहान में हुई थी।
 

चीन से 2000 साल पुराने हैं महाबलीपुरम के संबंध
तमिलनाडु में बंगाल की खाड़ी किनारे स्थित महाबलीपुरम शहर चेन्नई से करीब 60 किमी दूर है। इसकी स्थापना धार्मिक उद्देश्यों से 7वीं सदी में पल्लव वंश के राजा नरसिंह वर्मन ने कराई थी। नरसिंह ने मामल्ल की उपाधि धारण की थी, इसलिए इसे मामल्लपुरम के नाम से भी जाना जाता है। यहां शोध के दौरान चीन, फारस और रोम के प्राचीन सिक्के बड़ी संख्या में मिले हैं। प्राचीन बंदरगाह वाले महाबलीपुरम का करीब 2000 साल पहले चीन के साथ खास संबंध था। पुरातत्वविद राजावेलू बताते हैं कि कि यहां बरामद हुए पहली और दूसरी सदी के मिट्टी के बर्तन हमें चीन के समुद्री व्यापार की जानकारी देते हैं। पल्लव शासन के दौरान चीनी यात्री ह्वेन सांग कांचीपुरम आए थे। पल्लव शासकों ने चीन में अपने दूत भेजे थे।
 


 

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