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आज का इतिहास:नेपाल के राजपरिवार में हुआ हत्याकांड, क्राउन प्रिंस ने राजा-रानी समेत राजपरिवार के 9 लोगों की कर दी थी हत्या

4 महीने पहले
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1 जून 2001 को नेपाल के क्राउन प्रिंस दीपेंद्र शाह ने अपने राजपरिवार के 9 लोगों की हत्या कर दी थी। मरने वालों में उनके पिता राजा बीरेंद्र, माता रानी ऐश्वर्या और शाही परिवार के 7 और सदस्य शामिल थे। परिवार के लोगों की हत्या के बाद दीपेंद्र ने खुद को भी गोली मार ली थी।

उस रात राजमहल में एक भोज का आयोजन था, जिसमें कुछ चुनिंदा मेहमान ही मौजूद थे। इसी बीच नशे में धुत प्रिंस दीपेंद्र कमरे से बाहर आए और भोज में आए एक मेहमान के साथ लड़ाई करने लगे। परिवार वालों ने बीच-बचाव करते हुए दीपेंद्र को अपने कमरे में भेज दिया। परिवार वालों को लगा कि दीपेंद्र कमरे में जाकर शांत हो जाएंगे, लेकिन अगले ही पल दीपेंद्र अपने साथ 3 बंदूकें लेकर कमरे से बाहर आए। इससे पहले की कोई कुछ समझ पाता दीपेंद्र ने बंदूक से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी और कुछ ही मिनटों में अपने ही परिवार के 9 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। पूरे हत्याकांड के बाद दीपेंद्र ने खुद को भी गोली मार ली। 4 जून को प्रिंस दीपेंद्र की भी मौत हो गई।

प्रिंस दीपेंद्र ने इंग्लैंड के एटन कॉलेज से पढ़ाई की थी। इस दौरान उसकी मुलाकात नेपाली नेता शमशेर जंग बहादुर राणा की बेटी देवयानी से हुई। कहा जाता है कि यहीं से दोनों का प्रेम प्रसंग आगे बढ़ने लगा, लेकिन राजपरिवार इस रिश्ते के खिलाफ था। महारानी चाहती थीं कि शाह परिवार मेंं दीपेंद्र की शादी हो। जब दीपेंद्र ने अपनी पसंद से ही शादी करने के लिए कहा तो महारानी नाराज हो गईं और साफ इंकार कर दिया। एक तरफ शादी को लेकर राजपरिवार और दीपेंद्र में दूरियां बढ़ने लगीं वहीं दूसरी तरफ राजपरिवार से जुड़े फैसलों में भी दीपेंद्र की भागीदारी कम होने लगी। इससे दीपेंद्र की खीझ बढ़ने लगी जिसका नतीजा हत्याकांड के रूप में सामने आया।

थॉमस अल्वा एडिसन को मिला था पहला पेटेंट
थॉमस अल्वा एडिसन। पूरी दुनिया उन्हें इलेक्ट्रिक बल्ब के आविष्कार के लिए जानती है, लेकिन एडिसन मल्टी टैलेंटेड इंसान थे। फोनोग्राफ, कैमरा, टेलीफोन से लेकर बैटरी तक उन्हीं की देन है। 18 अक्टूबर 1931 को जब उनका निधन हुआ तब उनके नाम 1093 पेटेंट रजिस्टर्ड थे। उन्हें अपने आविष्कारों के लिए पेटेंट मिलने की शुरुआत आज ही हुई थी। 1 जून 1869 में उन्हें इलेक्ट्रिक वोट रिकॉर्डर के लिए पेटेंट मिला था। ये उनके साइंटिफिक करियर का पहला पेटेंट था।

एडिसन का बनाया इलेक्ट्रिक वोट रिकॉर्डर।
एडिसन का बनाया इलेक्ट्रिक वोट रिकॉर्डर।

इस समय एडिसन की उम्र केवल 22 साल थी। इससे कुछ समय पहले ही उन्हें टेलीग्राफ ऑपेरटर की नौकरी से निकाला गया था। एडिसन अपने लिए कुछ काम की तलाश में थे तभी उन्होंने अखबारों में पढ़ा कि न्यूयॉर्क की स्टेट लेजिस्लेटर और वॉशिंगटन की सिटी काउंसिल के चुनावों के लिए ऑटोमैटिक बैलेट मशीन की तलाश की जा रही है। बस फिर क्या था, एडिसन काम पर लग गए।

उन्होंने इलेक्ट्रो ग्राफिक वोट रिकॉर्डर बनाया। इसमें दो कॉलम थे। एक कॉलम में Yes और दूसरे में No लिखा और सभी वोटर के नाम दोनों कॉलम में लिखे गए। हर वोटर के नाम के आगे एक स्विच था, जिससे वोटर Yes या No में से किसी एक को चुन सकता था। वोटिंग पूरी होने के बाद एक केमिकल पेपर को इन दोनों कॉलम पर रोल कर लिस्ट को पेपर पर प्रिंट कर लिया जाता था।

एडिसन को इस मशीन के लिए आज ही पेटेंट दिया गया। एडिसन के ही साथ काम करने वाले एक टेलीग्राफर डेविट रोबर्ट्स ने 100 डॉलर में एडिसन से मशीन खरीदी और कांग्रेस कमेटी के सामने प्रदर्शित किया। कांग्रेस कमेटी ने एडिसन की इस मशीन को सिरे से नकार दिया और कहा कि “अगर पृथ्वी पर कोई आविष्कार है जिसे हम यहां नहीं चाहते हैं, तो वो ये मशीन है।" इस तरह एडिसन को मिलने वाला पहला पेटेंट किसी काम का नहीं रहा, लेकिन उसके बाद एडिसन का हर आविष्कार दुनिया में छा गया।

नरगिस का जन्म
एक्ट्रेस नरगिस का जन्म आज ही के दिन 1929 में हुआ था। उनकी मां जद्दनबाई एक तवायफ थीं इसी वजह से उनके घर लोगों का आना-जाना लगा रहता था। नरगिस को एक्टिंग का शौक नहीं था, लेकिन मां की इच्छा थी कि नरगिस अभिनेत्री बने। महज 6 साल की उम्र में बतौर बाल कलाकर उन्होंने फिल्मों में एंट्री ली।

नरगिस और सुनील दत्त
नरगिस और सुनील दत्त

40 और 60 के दशक के दौरान नरगिस ने राज कपूर के साथ कई फिल्मों में काम किया। 1957 में आई फिल्म ‘मदर इंडिया’ नरगिस के फिल्मी करियर में मील का पत्थर साबित हुई। इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड दिया गया। इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान सुनील दत्त ने नरगिस को आग से बचाया था। कहा जाता है कि इस घटना के बाद नरगिस ने सुनील दत्त को अपना जीवन साथी चुन लिया।

शादी के बाद नरगिस ने फिल्मों में काम करना कम कर दिया। 1967 में आई फिल्म 'रात और दिन' के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पहला मौका था जब किसी अभिनेत्री को राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया। वे राज्यसभा सदस्य भी रहीं और भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा। कैंसर से जूझ रहीं नरगिस ने 3 मई 1981 के दिन दुनिया को अलविदा कह दिया।

मर्लिन मुनरो का जन्म
हॉलीवुड एक्ट्रेस मर्लिन मुनरो का जन्म आज ही के दिन 1926 में हुआ था। अनाथ आश्रम में पली-बढ़ी मर्लिन कभी बेहद शर्मीली थीं लेकिन आज उन्हें एक बिंदास गर्ल के तौर पर जाना जाता है। मर्लिन ने अपने पड़ोसी जेम्स डोगर्टी से शादी कर ली लेकिन दोनों का रिश्ता ज्यादा दिन चला नहीं और दोनों अलग हो गए।

इसके बाद मर्लिन कैलिफोर्निया में एक कारखाने में नौकरी करने लगीं। उस वक्त फोटोग्राफर, डेविड कोनोवर कारखानों में काम करने वाली महिलाओं का काम दिखाने के लिए कुछ शूट कर रहे थे। वे मर्लिन की सुंदरता से बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने अपनी कई तस्वीरों में उनका चेहरा इस्तेमाल किया। यहीं मर्लिन को अपना पहला बड़ा ब्रेक मिला। इसके बाद मर्लिन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा लेकिन मर्लिन का वैवाहिक जीवन खासा सफल नहीं हो पाया। उन्होंने 3 शादियां कीं लेकिन तीनों असफल रहीं।

फोटो में जिनकी पीठ दिख रही है वे अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन. एफ. कैनेडी हैं। मर्लिन मुनरो और कैनेडी के बीच संबंधों की चर्चा आज भी की जाती है।
फोटो में जिनकी पीठ दिख रही है वे अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन. एफ. कैनेडी हैं। मर्लिन मुनरो और कैनेडी के बीच संबंधों की चर्चा आज भी की जाती है।

सिर्फ 36 साल की उम्र में मुनरो अपने बेडरूम में मृत अवस्था में पाई गई थीं। उनकी मौत की वजह को लेकर अलग-अलग थ्योरी दी जाती हैं। ड्रग्स के ओवरडोज से लेकर हत्या और आत्महत्या तक को उनकी मौत की वजह बताया जाता है।

1 जून के दिन को इतिहास में और किन-किन महत्वपूर्ण घटनाओं की वजह से याद किया जाता है…

2017: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को पेरिस क्लाइमेट एग्रीमेंट से बाहर किया।

2009: एयर फ्रांस का एक विमान अटलांटिक महासागर में क्रैश हो गया। विमान में सवार सभी 228 यात्रियों की मौत हो गई।

2008: आईपीएल के पहले संस्करण के फाइनल में राजस्थान रॉयल्स ने चेन्नई सुपर किंग्स को हराया।

1996: एच डी देवगौड़ा भारत के प्रधानमंत्री बने।

1880: अमेरिका के कनेक्टिकट में पहली पेफोन सर्विस शुरू की गई।

1980: CNN ने आज ही के दिन से 24 घंटे समाचारों का प्रसारण शुरू किया।

1930: भारत की पहली डीलक्स रेलगाड़ी डक्कन क्वीन को बॉम्बे वी टी और पुणे के बीच शुरू किया गया।

1955: अस्पृश्यता निरोधक कानून अस्तित्व में आया।

1897: स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की।

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