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आज का इतिहास:सोवियत संघ की वेलेंटीना तेरेश्कोवा ने भरी थी अंतरिक्ष की उड़ान, अंतरिक्ष में जाने वाली वे पहली महिला

3 महीने पहले
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1963 में आज ही के दिन सोवियत संघ ने वेलेंटीना तेरेश्कोवा को वोस्टोक-6 स्पेसक्राफ्ट से अंतरिक्ष में भेजा था। लगभग 3 दिन बाद वेलेंटीना सफलतापूर्वक धरती पर लौट आईं थीं। उन्होंने दो रिकॉर्ड अपने नाम किए थे। वेलेंटीना अंतरिक्ष में जाने वाली पहली महिला थीं। वो करीब 71 घंटे अंतरिक्ष में रही थीं, ये उस समय अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा देर तक रहने का रिकॉर्ड था।

1961 में सोवियत संघ ने यूरी गागरिन को स्पेस में भेज था और इसके 1 महीने बाद ही अमेरिका ने भी एलन शेपर्ड को स्पेस में भेज दिया था। सोवियत संघ अब किसी महिला को स्पेस में भेजने की तैयारी कर रहा था ताकि स्पेस में भेजी जाने वाली पहली महिला का नाम भी इतिहास में सोवियत संघ के नाम पर दर्ज हो।

अपने इस मिशन के लिए सोवियत संघ को एक काबिल महिला की तलाश थी। अब तक वेलेंटीना 126 बार पैराशूट से जंप कर चुकी थीं और इसी वजह से फेमस हो गई थीं। जब वेलेंटीना को इस मिशन के बारे में पता चला तो उन्होंने भी अप्लाई कर दिया।

400 से भी ज्यादा महिलाओं में से 4 महिलाओं को इस मिशन के लिए चुना गया जिनमें वेलेंटीना भी शामिल थीं। अगले 18 महीनों तक वेलेंटीना को कठोर ट्रेनिंग से गुजरना पड़ा। इसके बाद आज ही के दिन साल 1963 में वोस्टोक-6 स्पेसक्राफ्ट में वेलेंटीना को स्पेस में भेजा गया।

वेलेंटीना ने 3 नवंबर 1963 के दिन एंड्रियान निकोलायेव से शादी कर ली। निकोलायेव भी साल 1962 में अंतरिक्ष में जा चुके थे। अगले साल दोनों को एक बेटी हुई जिसका नाम एलेना रखा गया। एलेना दुनिया की पहली ऐसी बच्ची थी, जिसके माता और पिता दोनों ने अंतरिक्ष की यात्रा की थी।
वेलेंटीना ने 3 नवंबर 1963 के दिन एंड्रियान निकोलायेव से शादी कर ली। निकोलायेव भी साल 1962 में अंतरिक्ष में जा चुके थे। अगले साल दोनों को एक बेटी हुई जिसका नाम एलेना रखा गया। एलेना दुनिया की पहली ऐसी बच्ची थी, जिसके माता और पिता दोनों ने अंतरिक्ष की यात्रा की थी।

इसके दो दिन पहले यानी 14 जून को सोवियत संघ ने वोस्टोक-5 लॉन्च किया था, जिसमें वलेरी ब्यकोवस्की को अंतरिक्ष में भेजा गया था। हालांकि इन दोनों स्पेसक्राफ्ट की ऑर्बिट अलग-अलग थी, लेकिन अंतरिक्ष में एक समय ये दोनों स्पेसक्राफ्ट एक-दूसरे के करीब आ गए थे।

वेलेंटीना ने धरती की ऑर्बिट के 48 चक्कर लगाए और करीब 71 घंटे बाद 19 जून को वे धरती पर लौट आईं। यहां उनका पैराशूट से जंप करने का अनुभव काम आया क्योंकि धरती की सतह से करीब 20 हजार फीट की ऊंचाई से वेलेंटीना को जंप करना पड़ा। वेलेंटिना के धरती पर लौटने के कुछ घंटों बाद ही वलेरी भी वापस आ गए।

वेलेंटीना ने मात्र 26 साल की उम्र में सफलतापूर्वक अंतरिक्ष से लौटकर इतिहास रच दिया था। उन्हें ऑर्डर ऑफ लेनिन और हीरो ऑफ सोवियत यूनियन अवॉर्ड से नवाजा गया।

1911: IBM की शुरुआत हुई

20वीं सदी की शुरुआत में तीन अलग-अलग कंपनियां ऑफिस में इस्तेमाल की जाने वाली जरूरत की मशीनें बनाने और बेचने का काम कर रही थीं। इनमें टैबुलेटिंग मशीन कंपनी, इंटरनेशनल टाइम रिकॉर्डिंग कंपनी और कम्प्यूटिंग स्केल कंपनी शामिल थीं। इन तीनों कंपनियों का काम कहीं न कहीं एक-दूसरे से जुड़ा हुआ था। आज ही के दिन साल 1911 में इन तीनों कंपनियों ने साथ मिलकर एक नई कंपनी बनाई और नाम दिया - कम्प्यूटिंग टैबुलेटिंग रिकॉर्डिंग कंपनी। यही कंपनी आगे चलकर IBM के नाम से जानी गई, जो आज भी पूरी दुनिया में फेमस है।

साल 1924 में थॉमस वाटसन ने कंपनी का नाम बदलकर इंटरनेशनल बिजनेस मशीन (IBM) कर दिया। धीरे-धीरे कंपनी दूसरे देशों में भी व्यापार शुरू करने लगी। कंपनी ने पंच कार्ड मशीन बनाई, जिसका इस्तेमाल अमेरिका में सोशल सिक्योरिटी कार्ड जारी करने के लिए किया गया।

1933 में IBM ने इलेक्ट्रोमेटिक टाइपराइटर कंपनी को खरीद लिया और दो साल बाद ही इलेक्ट्रिक टाइपराइटर बाजार में उतारा। IBM का ये प्रोडक्ट बेहद फेमस हुआ। अगले 10 साल में कंपनी का रेवेन्यू 100 अमेरिकी डॉलर हो गया। साल 1951 में कंपनी ने भारत में भी कामकाज शुरू किया।

1951 में IBM ने भारत में अपना पहला ऑफिस खोला था।
1951 में IBM ने भारत में अपना पहला ऑफिस खोला था।

अभी तक कंपनी कम्प्यूटर मार्केट में नहीं आई थी। साल 1952 में थॉमस वाटसन के बेटे ने कंपनी संभाली और उन्होंने कम्प्यूटर प्रोडक्ट बनाने का फैसला लिया। इसके बाद अगले 3 दशकों तक कंपनी ने दुनियाभर में इस्तेमाल किए जाने वाले करीब 70% कम्प्यूटर प्रोडक्ट को बनाया।

लेकिन 80 के दशक में कम्प्यूटर मार्केट में दूसरी कंपनियां आने लगीं, जिनके प्रोडक्ट IBM के मुकाबले सस्ते थे। 1993 में पहली बार कंपनी ने घाटा होने की घोषणा की। उसके बाद IBM कम्प्यूटर मार्केट में लगातार पिछड़ती गई। 2020 में क्लाउड सर्विसेज को छोड़कर कंपनी को हर फील्ड में खासा नुकसान हुआ।

2010: भूटान ने तंबाकू पर लगाया था बैन

भूटान की संसद ने साल 2010 में आज ही के दिन एक कानून पास किया था। जिसके मुताबिक पूरे भूटान में तंबाकू की खेती करने, निश्चित सीमा से ज्यादा तंबाकू इस्तेमाल करने और खरीदने-बेचने पर बैन है। कानून के मुताबिक ये गैर-जमानती अपराध है और अगर आप ऐसा करते पाए गए तो आपको जेल जाना पड़ सकता है। तंबाकू प्रोडक्ट पर बैन लगाने वाला भूटान दुनिया का पहला देश है।

80 के दशक में ही भूटान ने WHO के साथ मिलकर तंबाकू से होने वाले नुकसान के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए देशभर में कैंपेन चलाया था। 1991 में सभी सार्वजनिक जगहों पर तंबाकू प्रोडक्ट के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई।

अगले कुछ सालों में तंबाकू प्रोडक्ट से जुड़े विज्ञापनों पर भी रोक लगा दी गई। देशभर में भूटान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने नेशनल टोबैको कंट्रोल प्रोग्राम लॉन्च किया, जिसका नतीजा ये हुआ कि साल 2003 तक भूटान के 20 में से 18 जिलों में तंबाकू प्रोडक्ट की बिक्री पर रोक लगा दी गई। साल 2004 में भूटान ने पूरे देश में तंबाकू प्रोडक्ट पर रोक लगा दी। ऐसा करने वाला वो दुनिया का पहला देश था।

2004 में भूटान की संसद में तंबाकू पर रोक लगाने संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा हुई।
2004 में भूटान की संसद में तंबाकू पर रोक लगाने संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा हुई।

तंबाकू प्रोडक्ट के इस्तेमाल और खरीदने-बेचने को लेकर अब कानून बनाने की तैयारी की जाने लगी। 2007 से 2009 तक तंबाकू प्रोडक्ट पर बैन लगाने के लिए कानून बनाया गया। साल 2010 में आज ही के दिन इस कानून को भूटान की संसद ने पास किया था।

16 जून के दिन को इतिहास में इन महत्वपूर्ण घटनाओं की वजह से भी याद किया जाता है…

2012: चीन ने शेंझो-9 स्पेसक्राफ्ट से लियू यांग को अंतरिक्ष में भेजा। अंतरिक्ष में जाने वाली वे पहली चीनी महिला हैं।

2009: मुंबई आतंकी हमले के बाद पहली बार भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति से मुलाकात की।

1903: हेनरी फोर्ड ने 12 लोगों के साथ मिलकर फोर्ड मोटर कंपनी की स्थापना की। कंपनी ने इसी साल 15 जुलाई को अपनी पहली कार बेची। फोर्ड आज दुनिया की दिग्गज कार निर्माता कंपनी है।

1884: अमेरिका के ब्रुकलिन में पहला रोलर कोस्टर खोला गया।