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आज का इतिहास:सूअर के बाल को हड्डी पर चिपकाकर बना था पहला टूथब्रश, 523 साल पहले चीन के राजा ने कराया था इसे पेटेंट

4 महीने पहले
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सुबह उठते से ही सबसे पहला काम ब्रश करना होता है। क्या आप जानते हैं कि आज के दिन से ब्रश का इतिहास भी जुड़ा है। आज ही के दिन 1498 में चीनी शासक होंगझी ने टूथब्रश का पेटेंट कराया था।

वैसे तो दांत साफ करने का इतिहास काफी पुराना है। कहा जाता है कि 3000 BC में लोग दांतों को चमकदार बनाने के लिए पेड़ की पतली डाली का इस्तेमाल करते थे। 1600 BC के आसपास चीनी लोग खुशबूदार पेड़ों की डालियों का इस्तेमाल करने लगे। इससे दांत तो साफ होने लगे साथ ही सांसों की बदबू की समस्या से भी निजात मिली।

इसी समय लोगों ने जानवरों के बालों को एक लकड़ी के हत्थे पर लगाकर उससे ब्रश करना शुरू किया। अभी तक टूथपेस्ट नहीं बना था। लोग टूथपेस्ट की जगह मिट्टी, राख, अंडे के छिलकों का पेस्ट और कई तरह की चीजों का इस्तेमाल करते थे।

राजा होंगझी।
राजा होंगझी।

साल 1498 में चीन के मिंग वंश के राजा होंगझी ने सूअर के बालों से पहला टूथब्रश बनाया था। इन बालों को एक हड्डी या लकड़ी पर लगाया गया था। इसका फायदा ये था कि ये दांतों की ज्यादा बेहतर तरीके से सफाई कर सकता था।

इसके बाद टूथब्रश का इस्तेमाल बढ़ने लगा और दुनियाभर में होंगझी का बनाया ये टूथब्रश इस्तेमाल होने लगा। 1690 में पहली बार इसके लिए टूथब्रश शब्द का इस्तेमाल किया गया था। एंथनी वुड नाम के एक शख्स ने अपनी आत्मकथा में लिखा था कि उसने एक दूसरे आदमी से टूथब्रश खरीदा। कहा जाता है कि टूथब्रश शब्द का ये पहली बार इस्तेमाल था।

साल 1780 में विलियम एडिस ने पहली बार बड़े पैमाने पर टूथब्रश को बनाने का काम शुरू किया। उन्होंने इस ब्रश में घोड़े के बालों का इस्तेमाल किया था। कहा जाता है कि विलियम को टूथब्रश बनाने का आइडिया जेल में रहने के दौरान आया था।

दरअसल, उस समय जेल में रह रहे कैदी दांत साफ करने के लिए मिट्टी और राख का ही इस्तेमाल किया करते थे। विलियम ने एक हड्डी में ग्लू की मदद से बालों को चिपका दिया और इस तरह ब्रश तैयार हो गया। विलियम जब जेल से बाहर निकले तो उन्होंने टूथब्रश बनाने का काम शुरू कर दिया। आज उनकी विस्डम टूथब्रश नाम से कंपनी है।

1844 में पहली बार तीन लाइन वाला टूथब्रश बनाया गया। अभी तक टूथब्रश की डिजाइन और मटेरियल में ज्यादा बड़े बदलाव नहीं हुए थे। साल 1935 में वालेस कैरोथर्स ने एक सुपर पॉलिमर बनाया जिसे नायलोन नाम दिया गया।

इसके बाद से टूथब्रश में जानवरों के दांतों की जगह नायलोन का इस्तेमाल किया जाने लगा और इसी के साथ इनका इस्तेमाल भी बढ़ गया। 1960 के दशक में बाजार में इलेक्ट्रिक टूथब्रश भी आ गए। आज हर साइज, शेप, मटेरियल के हिसाब से बाजार में टूथब्रश उपलब्ध हैं।

1995: मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा मिला

साल 1972 में पहली बार देश में बाघों की गिनती की गई थी, उसमें पता चला कि पूरे भारत में 1827 बाघ ही बचे हैं। इसके बाद साल 1973 में 9 टाइगर रिजर्व में प्रोजेक्ट टाइगर लॉन्च किया गया। इसके तहत पूरे देश में नए-नए टाइगर रिजर्व खोले गए और बाघ की आबादी को बढ़ाने के लिए अलग-अलग प्रयास किए गए।

ये प्रोजेक्ट बेहद सफल रहा और 90 के दशक तक बाघों की आबादी 3500 से भी ज्यादा हो गई। साल 1995 में आज ही के दिन मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा मिला। उस समय पूरे देश में सबसे ज्यादा बाघ मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्व में पाए गए थे।

मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में घूमता एक बाघ।
मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में घूमता एक बाघ।

मध्यप्रदेश के पास लगातार 16 साल तक टाइगर स्टेट का दर्जा रहा लेकिन साल 2011 में कर्नाटक ने मध्यप्रदेश से ये उपलब्धि छीन ली। उसके बाद साल 2019 में जारी हुई टाइगर सेंसस में मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा दोबारा मिल गया।

रिपोर्ट के मुताबिक 2014 से 2018 के दौरान पूरे भारत में बाघों की आबादी 2226 से बढ़कर 2977 हो गई है। इनमें से सबसे ज्यादा 526 बाघ केवल मध्यप्रदेश में हैं। इसके बाद कर्नाटक में 524 और उत्तराखंड में 442 बाघ है। भारत में हर 4 साल में बाघों की गिनती की जाती है।

1945: संयुक्त राष्ट्र के चार्टर पर 50 देशों ने साइन किया

1910 और 1950 के बीच ही दुनिया ने दो विश्वयुद्ध की भीषण त्रासदी को देखा था। हजारों लोगों की मौत हुई और देशों को भारी आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। 1945 में जब द्वितीय विश्वयुद्ध खत्म हुआ तब दुनियाभर के देशों ने अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ाने के उद्देश्य से एक संगठन बनाने की तैयारी की।

यूएन चार्टर पर साइन करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन।
यूएन चार्टर पर साइन करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन।

साल 1945 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में इंटरनेशनल आर्गनाइजेशन की एक कांफ्रेंस का आयोजन किया गया था। ये कांफ्रेंस 25 अप्रैल से 26 जून तक चली और 50 देशों के प्रतिनिधियों ने इसमें हिस्सा लिया। इस कांफ्रेंस का उद्देश्य देशों के बीच शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना था। इस कांफ्रेंस के आखिरी दिन एक चार्टर पर दस्तखत किए गए और 24 अक्टूबर 1945 से ये चार्टर लागू हो गया। यही संगठन आगे चलकर यूनाइटेड नेशंस नाम से जाना गया। आज दुनियाभर के 193 देश यूनाइटेड नेशंस के सदस्य है। 24 अक्टूबर 1945 के दिन यूनाइटेड नेशंस का चार्टर लागू हुआ था इसलिए 24 अक्टूबर को यूनाइटेड नेशन का स्थापना दिवस मनाया जाता है।

26 जून के दिन को इतिहास में और किन-किन महत्वपूर्ण घटनाओं की वजह से याद किया जाता है…

2012: तत्कालीन वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने अपने पद से इस्तीफा दिया। इसी साल 25 जुलाई को वे भारत के 13वें राष्ट्रपति बने।

2000: ICC यानी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल ने बांग्लादेश को टेस्ट टीम का दर्जा दिया।

1998: माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज-98 रिलीज किया। इसमें पहली बार एक्सटर्नल डिवाइस को कनेक्ट करने का ऑप्शन दिया गया।

1997: हैरी पॉटर सीरीज की पहली किताब ‘हैरी पॉटर एंड द फिलोसॉफर्स स्टोन’ पब्लिश हुई।

1974: अमेरिका के ओहियो में सुपर मार्केट में खरीदारी के लिए बार कोड का पहली बार इस्तेमाल हुआ।

1977: एल्विस प्रेस्ली ने अमेरिका के इंडियाना में अपना आखिरी कॉन्सर्ट किया।

1906: फ्रांस में पहली ग्रां प्रिक्स मोटर रेस का आयोजन हुआ।

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