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इतिहास में आज:50 साल पहले शेख मुजीब-उर-रहमान का भाषण बना बांग्लादेश की आजादी की चिंगारी; भारत-पाकिस्तान का युद्ध इसके बाद ही हुआ

9 महीने पहले
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ढाका के रेसकोर्स मैदान में शेख मुजीब-उर-रहमान ने 7 मार्च 1971 को ऐतिहासिक भाषण दिया था। पाकिस्तान से आजादी का आह्वान किया था। करीब दस लाख लोग उन्हें सुनने पहुंचे थे। सबके हाथ में बांस के डंडे थे। जो पाक सेना से बचाव के लिए नहीं बल्कि प्रतिरोध का प्रतीक थे।

भीड़ का जायजा लेने के लिए पाकिस्तान सेना के हेलिकॉप्टर ऊपर चक्कर लगा रहे थे। रेडियो पाकिस्तान का ढाका स्टेशन भी सरकारी आदेश के खिलाफ जाकर भाषण का पूरे प्रांत में प्रसारण की तैयारी में था। शेख मुजीब के भाषण का एक-एक शब्द पाकिस्तान के खिलाफ ललकार थी। बाद में इस भाषण को भारतीय उपमहाद्वीप में दिए गए सभी राजनीतिक भाषणों में सबसे ऊंची पायदान पर रखा गया। 2017 में यूनेस्को ने शेख मुजीब के उस भाषण को विश्व के दस्तावेजी विरासत के रूप में मान्यता प्रदान की।

दरअसल, इस भाषण के बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति याहया खां ढाका पहुंचे थे। 23 मार्च को जब शेख उनसे मिलने पहुंचे तो उनकी कार में बांग्लादेश का झंडा लगा था। इसके दो दिन बाद 25 मार्च को ऐसा लगा कि पूरे शहर पर पाक सेना ने हमला बोल दिया हो, यह ऑपरेशन सर्चलाइट था। सेना ने शेख मुजीब को गिरफ्तार किया और पाकिस्तान ले गए। इस पर शेख मुजीब की लगाई चिंगारी आग का रूप ले चुकी थी। बांग्लादेश में मुक्तिवाहिनी ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। दिसंबर तक ऐसा ही चलता रहा।

भारत कुछ महीने तो स्थिति पर नजर रखे रहा, बाद में उसने मुक्तिवाहिनी की मदद करने का फैसला किया। 3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने भारत पर हमला बोला और 13 दिन में भारत ने उसे घुटनों के बल ला दिया। 16 दिसंबर को पाकिस्तान सेना ने आत्मसमर्पण किया और बांग्लादेश को आजादी मिली। आज भी भारत में 16 दिसंबर को विजय दिवस के तौर पर मनाया जाता है। शेख मुजीब पाकिस्तान से लंदन के रास्ते दिल्ली आए। उन्होंने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मुलाकात की। इस दौरान इंदिरा गांधी के साथ ही राष्ट्रपति वीवी गिरि, केंद्रीय मंत्री, सेना के तीनों अंगों के प्रमुख और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सिद्धार्थशंकर राय दिल्ली के हवाई अड्डे पर मौजूद थे। मुजीब ने सेना के कैंटोनमेंट मैदान पर जनसभा में बांग्लादेश के स्वाधीनता संग्राम में मदद करने के लिए भारत की जनता को धन्यवाद दिया। दिल्ली में दो घंटे रुकने के बाद जब शेख ढाका पहुंचे तो दस लाख लोग उनके स्वागत में ढाका हवाई अड्डे पर मौजूद थे।

सबसे ताकतवर दूरबीन केप्लर लॉन्च

7 मार्च का दिन अंतरिक्ष के इतिहास में बेहद अहम है। 2009 में इसी दिन दुनिया की सबसे ताकतवर दूरबीन केप्लर को अंतरिक्ष में लॉन्च किया गया था। केप्लर दूरबीन सूरज की परिक्रमा करती है। पृथ्वी जैसे करीब एक लाख सितारों की टोह लेती है। केप्लर दूरबीन उस समय मानव जाति के इतिहास की सबसे ताकतवर दूरबीन मानी गई थी। इसकी मदद से हजारों नए एक्सोप्लैनेट की खोज की गई। एक्सोप्लेनेट उस ग्रह को कहते हैं जो हमारे सौरमंडल में न होकर किसी और तारामंडल में हैं। ऐसे भी ग्रहों का पता चला जहां हमारी धरती के मुकाबले कई गुना ज्यादा पानी है।

7 मार्च को देश व दुनिया में हुईं अन्य अहम घटनाएं इस प्रकार हैं...

2010: अमेरिका की फिल्म निर्देशक कैथरीन बिगलॉ सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का एकेडमी पुरस्कार जीतने वाली पहली महिला बनीं। उन्हें यह पुरस्कार 2008 में आई उनकी फिल्म ‘द हर्ट लॉकर’ के लिए दिया गया।।

2008: अंतरिक्ष यात्रियों ने मंगल ग्रह पर झील की खोज की।

2003: कश्मीर में भारत और पाकिस्तान के बीच की नियंत्रण रेखा पर एवलांच की वजह से 17 मौतें। ज्यादातर सैनिक थे। हजारों विस्थापित हुए।

1987: अमेरिका के मुक्केबाज माइक टायसन ने 20 साल की उम्र में विश्व बॉक्सिंग संघ चैंपियनशिप बेल्ट हासिल किया। उन्होंने जेम्स स्मिथ को 12 राउंड में हराकर सबसे कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल की।

1977: पाकिस्तान में 1970 के बाद पहले आम चुनाव और 1947 में पाकिस्तान के अस्तित्व में आने के बाद पहली बार असैन्य शासन के तहत चुनाव कराए गए थे।

1969: इजरायल ने 70 साल की गोल्डा मेयर को प्रधानमंत्री चुना था। हालांकि कई लोग गोल्डा मेयर को एक वक्त प्रधानमंत्री के रूप में देखते थे लेकिन गोल्डा ना केवल अपने पद पर बनी रहीं बल्कि अक्टूबर 1969 में देश में हुए आम चुनावों में उन्होंने जीत भी हासिल की।

1875: अलेक्‍जेंडर ग्राहम बेल ने आज ही के दिन टेलीग्राफ का आविष्‍कार किया था

1854: चार्ल्‍स मिलर ने सिलाई मशीन के लिए पेटेंट हासिल किया था।