पहला डेफ स्टार्टअप / मूक बधिरों को टेक्निकल एजुकेशन देने के लिए दो बधिरों ने तैयार की एकेडमी



डीएएडी की फाउंडर रेम्या राज और सुलू नौशाद( डीएएडी की फाउंडर रेम्या राज और सुलू नौशाद(
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डीएएडी की फाउंडर रेम्या राज और सुलू नौशाद(डीएएडी की फाउंडर रेम्या राज और सुलू नौशाद(

  • केरल में इसी महीने हुई वुमन स्टार्टअप समिट में साइन लैंग्वेज में दिया कंपनी का प्रेजेंटेशन
  • दुर्भाग्य से उन्हें टेक्नोलॉजी शिक्षा देने के लिए कोई भी जरिया अब तक नहीं

Dainik Bhaskar

Aug 25, 2019, 03:27 AM IST

कोच्चि (बाबू पीटर). मूक-बधिरों को टेक्निकल एजुकेशन देने के लिए दो बधिरों ने मिलकर एक एकेडमी बनाई है। डिजिटल आर्ट्स एकेडमी फॉर डेफ (डीएएडी) नाम से रजिस्टर यह कंपनी देश का पहला बधिर लोगों का स्टार्टअप है। देश में 1.8 करोड़ बधिर हैं, जिनमें से ज्यादातर की उम्र 30 साल से कम है। दुर्भाग्य से उन्हें टेक्नोलॉजी शिक्षा देने के लिए कोई भी जरिया अब तक नहीं है।

 

डीएएडी की फाउंडर रेम्या राज और सुलू नौशाद ने इसी महीने कोच्चि में हुई वुमन स्टार्टअप समिट में भाग लिया, जहां इंटरप्रेटर की मदद से दोनों ने साइन लैंग्वेज में अपना प्रेजेंटेशन भी दिया। रेम्या के मुताबिक उनकी कंपनी आईटी से जुड़े विषयों पर वेबसाइट और एप के जरिए वीडियो क्लासेस चलाती हैं। ये सभी वीडियो क्लासेस इंडियन साइन लैंग्वेज में होती हैं। कोर्स 12वीं पास स्टूडेंट्स कर सकते हैं। ज्यादातर कोर्स जॉब ओरिएंटेड हैं। वह एनिमेशन और डिजाइनिंग के कोर्स के लिए अडोबी कंपनी से भी बात कर रही हैं।

 

रेम्या के मुताबिक देश में 1.8 करोड़ बधिरों के लिए सिर्फ 250 सर्टिफाइड इंटरप्रेटर हैं। सुलू का कहना है कि वह खुद बधिर हैं, इसलिए ऐसे लोगों की दिक्कतें समझना उनके लिए ज्यादा आसान है। वह चाहती हैं कि बधिर किसी से पीछे नहीं रहें। वह कहती हैं कि डिजिटल वर्ल्ड बधिरों के मुताबिक नहीं है और वह इसे डेफ फ्रेंडली बनाना चाहती हैं।

 

डीएएडी की दोनों ही फाउंडर पढ़ी-लिखी हैं, जबकि रेम्या ने टेक्नोलॉजी की पढ़ाई भी की है। तिरुवनंतपुरम की रहनेवाली रेम्या आईटी सेक्टर में बतौर एनालिस्ट काम कर चुकी हैं जबकि सुलू ने बीकॉम के बाद एमबीए किया है। वह एमजी यूनिवर्सिटी में इंडियन साइन लैंग्वेज की टीचर रह चुकी हैं। रेम्या बताती है कि जब वह पढ़ाई कर रहीं थी तो टीचर साइन लैंग्वेज नहीं जानते थे, जिसके चलते उन्हें कुछ समझ नहीं आता था।

 

बैंकिंग और ट्रैवल से जुड़े टेक्निकल कोर्स
तकनीक का इस्तेमाल और उसे समझना बधिरों के लिए खास दिक्कत वाला होता है। इसलिए उन्होंने ट्रेवल, बैंकिंग जैसी तकनीक से जुड़े वीडियो ट्यूटोरियल तैयार किए हैं। उनके ज्यादातर ट्यूटोरियल मुफ्त हैं जबकि कुछ कोर्स के लिए फीस ली जाती है।

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