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जम्मू-कश्मीर / पुलवामा में शहीद जवान की पत्नी का आरोप- पति के भाई ने बेटे को अगवा किया, खाते बंद करवाए; पेंशन तक नहीं निकाल पाती

शाजिया कौसर की मांग- सरकार मुझे मेरे नाबालिग बेटे की कस्टडी दिलवाए। शाजिया कौसर की मांग- सरकार मुझे मेरे नाबालिग बेटे की कस्टडी दिलवाए।
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शाजिया कौसर की मांग- सरकार मुझे मेरे नाबालिग बेटे की कस्टडी दिलवाए।शाजिया कौसर की मांग- सरकार मुझे मेरे नाबालिग बेटे की कस्टडी दिलवाए।

  • सीआरपीएफ जवान नसीर अहमद 14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा हमले में शहीद हुए थे
  • नसीर की पत्नी ने कहा- पति की शहादत की बरसी मनाने के लिए पैसों की व्यवस्था नहीं कर पा रही

मोहित कंधारी

मोहित कंधारी

Feb 10, 2020, 12:37 PM IST

जम्मू. पुलवामा हमले की बरसी से 5 दिन पहले शहीद की पत्नी ने रविवार को पति के भाई पर ही गंभीर आरोप लगाए। शहीद नसीर अहमद की पत्नी शाजिया कौसर ने कहा कि पति के बड़े भाई ने उसके 12 साल के बेटे का अपहरण कर लिया है। शाजिया ने कहा कि जब भी वह बेटे से मिलने की कोशिश करती है, तो उसे अंजाम भुगतने की धमकी दी जाती है।

नसीर अहमद 14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा हमले में शहीद हुए 40 जवानों में से एक थे। यह हमला जैश-ए-मोहम्मद ने किया था। हेड कॉन्स्टेबल नसीर अहमद सीआरपीएफ के काफिले के कमांडर थे।

ओहदे का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं पति के बड़े भाई- शाजिया

शाजिया ने कहा- मैं इंसाफ के लिए एक के बाद दूसरे पुलिस स्टेशन जाती रही, लेकिन कोई सहारा नहीं मिला। मेरे पति के बड़े भाई सिराजुद्दीन ने 4 महीने पहले मेरे बेटे को अगवा कर लिया। सिराजुद्दीन अभी जम्मू-कश्मीर पुलिस में अफसर हैं। वह मुझे बेटे से मिलने भी नहीं देते हैं। जब भी मैं स्कूल या उनके घर बेटे से मिलने जाती हूं तो मुझे धमकाया जाता है।

शाजिया ने कहा, "सिराजुद्दीन अपने ओहदे का गलत इस्तेमाल कर रहा है। उसने बैंक अधिकारियों को अपने प्रभाव में लेकर मेरे खाते बंद करवा दिए हैं। मैं अभी जम्मू में अपने परिजनों के साथ रहती हूं। मैं पेंशन का पैसा भी नहीं निकाल पा रही हूं। मैंने पिछले साल पुलवामा हमले में अपने पति को खो दिया। मैं अपने पति की शहादत को नमन करने के लिए एक कार्यक्रम करना चाहती हूं, लेकिन ऐसा नहीं कर पा रही हूं।'

शहीद की पत्नी की अपील- भारत सरकार इंसाफ दिलवाए

शाजिया ने कहा कि भारत सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार मुझे इंसाफ दिलाए। वह मुझे मेरे नाबालिग बेटे की कस्टडी दिलवाए। मैं अपने बेटे की उसी तरह परवरिश करना चाहती हूं, जैसा मेरे पति ने सोचा था। वह बेहद सादा विचार वाले अच्छे इंसान थे। उन्होंने हमेशा अपने बच्चों का खयाल रखा। उनके भाई सिराजुद्दीन लालची हैं। वह मेरे बेटे के नाम पर जमा होने वाले मुआवजे का पैसा हड़पने के लिए हर हथकंडा अपना रहे हैं।

शहीद के बड़े भाई ने कहा- छोटे भाई के बच्चों का भविष्य सुनिश्चित किया

अपनी सफाई में सिराजुद्दीन ने दैनिक भास्कर से कहा- मेरे छोटे भाई ने देश की सेवा करते हुए शहादत दी। मैंने वह सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं, जिनसे सरकार, एनजीओ और सेलेब्रिटीज द्वारा मिले मुआवजे का इस्तेमाल मेरे छोटे भाई के बच्चों का बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने में हो सके। मुआवजा मिलने के बाद मेरे भाई की पत्नी ने मुझसे किसी भी तरह का रिश्ता रखने से मना कर दिया था। वह चाहती थी कि मैं उससे या अपने भाई के बच्चों से न मिलूं। मैंने उसे सलाह दी थी कि वह अपने और बच्चों के नाम पर अलग-अलग फिक्स डिपॉजिट में पैसे इन्वेस्ट करे। मेरे भाई का 12 साल का बेटा मुझसे बेहद लगाव रखता है। मेरे भतीजे ने जब मेरे साथ रहना शुरू किया तो मेरे भाई की पत्नी ने मेरे खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवा दी।

उन्होंने कहा- मैंने अपने भतीजे की सुरक्षा के लिए कदम उठाए। मैंने अपने बेटे की तरह अपने भाई की परवरिश की थी, उसे खोने के बाद मैं उसके बेटे से भावनात्मक रूप से जुड़ गया। मैंने कोर्ट में भी स्पष्ट कहा है कि मेरा मकसद भाई के बच्चों का बेहतर भविष्य सुनिश्चित करना है। अब यह फैसला कोर्ट करेगा कि मुआवजे की रकम किस तरह से बांटी जाएगी।

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