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लद्दाख में भारत का नया जासूस:सेना को मिले इजराइल में बने एडवांस्ड हेरॉन ड्रोन, LAC पर चीन की हरकतों पर रखेंगे नजर

6 महीने पहले

भारतीय सेना को इजराइल में बने एडवांस्ड हेरॉन ड्रोन मिल गए हैं। इससे सेना को लद्दाख सेक्टर के दुर्गम इलाकों में नजर रखने में आसानी होगी। खास तौर से चीनी सेना की हरकतें अब छुपी नहीं रह पाएंगी। ये ड्रोन भारत को काफी पहले मिल जाने थे, लेकिन कोरोना की वजह से इनकी डिलीवरी में कुछ महीने की देरी हो गई।

सरकार से जुड़े एक टॉप सोर्स ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि हेरॉन ड्रोन देश को मिल गए हैं। इन्हें ईस्टर्न लद्दाख एरिया में निगरानी के लिए तैनात किया जा रहा हैं। ये सभी ऑपरेशनल हैं और पहले से मौजूद इसी कैटेगरी के ड्रोन से बहुत बेहतर हैं। इनकी एंटी जैमिंग कैपेबिलिटी भी इनके पिछले वर्जन से ज्यादा अच्छी है।

इमरजेंसी खरीद के तहत सेना ने लिए ड्रोन
कुछ महीने पहले मोदी सरकार ने सेनाओं को जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी खरीद के अधिकार दिए थे। इसके तहत सेना चीन से मिल रही चुनौतियों के मद्देनजर अपनी युद्ध की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए 500 करोड़ तक के इक्विपमेंट और सिस्टम खरीद सकती है। इजराइल से ये ड्रोन इसी अधिकार के तहत लिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक इनके अलावा भी कई छोटे और मध्यम आकार के ड्रोन भारतीय कंपनियों से खरीदे जा रहे हैं। पिछली बार सेना को इस तरह की छूट 2019 में पाकिस्तान में बालाकोट के आतंकी कैंपों पर की गई एयर स्ट्राइक के ठीक बाद दी गई थी।

इसी सुविधा का इस्तेमाल करते हुए भारतीय नौसेना ने दो प्रीडेटर ड्रोन लीज पर लिए हैं। ये ड्रोन अमेरिकी फर्म जनरल एटॉमिक्स से लिए गए हैं। भारतीय वायु सेना ने भी बड़ी संख्या में एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल और लंबी दूरी तक सटीक मार करने वाली मिसाइलें खरीदी हैं। इमरजेंसी खरीद के ये अधिकार 31 अगस्त तक के लिए दिए गए थे। सेनाओं के पास आखिरी फेज में कुछ और प्रोजेक्ट बचे हुए हैं। अगर और समय मिलता है तो सेनाएं इक्विपमेंट की खरीद पर आगे बढ़ेंगीं।

35 हजार फीट ऊंचाई तक उड़ान भरने की क्षमता

दुश्मनों पर नजर रखने के लिए हेरॉन ड्रोन को सबसे भरोसेमंद माना जाता है। निगरानी के मामले में इसका कोई तोड़ नहीं है।
दुश्मनों पर नजर रखने के लिए हेरॉन ड्रोन को सबसे भरोसेमंद माना जाता है। निगरानी के मामले में इसका कोई तोड़ नहीं है।

हेरॉन ड्रोन को इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के UAV डिवीजन ने तैयार किया है। ये 35 हजार फीट की ऊंचाई तक 52 घंटे तक उड़ान भरने में सक्षम हैं। इसे लगातार अपग्रेड भी किया जा रहा है। फरवरी 2014 में सिंगापुर एयर शो में सुपर हेरॉन को पेश किया गया था। इसमें 200 हॉर्सपावर का डीजल इंजन लगा है।

सेना के अधिकारियों के मुताबिक निगरानी के मामले में इस ड्रोन का कोई तोड़ नहीं है। इसे लिए जाने के बाद से ही यह निगरानी तंत्र की रीढ़ रहा है। 30,000 फीट की ऊंचाई से भी यह जमीन पर कमांडरों को फीडबैक देना जारी रख सकता है, ताकि उसके हिसाब से सैनिकों का मूवमेंट किया जा सके।

चीन की घुसपैठ ने बढ़ाई परेशानी
लद्दाख से अरुणाचल तक चीनी सेना की हरकतों ने भारत की परेशानी बढ़ा दी है। कई बार तो टकराव जैसे हालात बन चुके हैं। गलवान की हिंसक झड़प के बाद से यही स्थिति बनी हुई है। दोनों सेनाओं ने भारी हथियार, हेलिकॉप्टर, लड़ाकू विमान और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात कर रखे हैं।

भारत और चीन ने बातचीत के बाद कुछ पॉइंट से अपने टैंक वापस मंगा लिए थे। हालांकि भारी हथियार अब भी दोनों ओर तैनात हैं।
भारत और चीन ने बातचीत के बाद कुछ पॉइंट से अपने टैंक वापस मंगा लिए थे। हालांकि भारी हथियार अब भी दोनों ओर तैनात हैं।

चीन ने भारत से लगी सीमा पर हाल ही में सबसे खतरनाक बॉम्बर प्लेन तैनात किए हैं। ये एयरक्राफ्ट CJ-20 लॉन्ग रेंज मिसाइलों से लैस हैं, जिनकी जद में दिल्ली भी है। 11 नवंबर को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की एयरफोर्स की 72वीं एनिवर्सरी पर चाइना सेंट्रल टेलीविजन ने हिमालय के पास से उड़ान भर रहे इन H-6K बॉम्बर्स प्लेन की फुटेज भी जारी की थी।