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नीट-जेईई:आखिर क्यों विवादों में फंस गई हैं देश की दो प्रतिष्ठित परीक्षाएं और कब चक चलेगा इस पर घमासान

भास्कर रिसर्चएक वर्ष पहले
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नीट जेईई परीक्षा के आयोजन के विरोध में दिल्ली में प्रदर्शन करते लोग। - Dainik Bhaskar
नीट जेईई परीक्षा के आयोजन के विरोध में दिल्ली में प्रदर्शन करते लोग।
  • सात राज्यों के मुख्यमंत्री परीक्षा कराने के विरोध में, 6 मंत्रियों ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई पुनर्विचार याचिका

देश भर में 1 से 6 सितंबर के बीच आयोजित की जा रही आईआईटी जेईई और 13 सितंबर को आयोजित की जाने वाली नीट परीक्षा टालने की मांग को लेकर गैर भाजपा शासित राज्यों के 6 मंत्रियों ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

परीक्षा के आयोजन में मात्र दो दिन शेष बचे हैं। बावजूद इसके इंजीनियर और डॉक्टर बनने के लिए आयोजित की जाने वाली इन परीक्षाओं को लेकर अभी भी घमासान मचा हुआ है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही परीक्षाएं टालने की मांग खारिज कर चुका है। विरोध करने वालों का तर्क है कि इस समय देश में कोरोना संक्रमण के मामले शिखर पर हैं।

भारत दुनिया में तीसरा सर्वाधिक संक्रमित राष्ट्र है। ऐसे में जेईई और नीट परीक्षा में शामिल होने वाले लगभग 25 लाख से अधिक परीक्षार्थियों के एकत्रित होने पर संक्रमण के मामलों में भारी वृद्धि हो सकती है। इसलिए इन परीक्षाओं को परिस्थितियां सामान्य होने तक टाल दिया जाए। वहीं सरकार और शिक्षाविद इसे अभी कराने की वकालत कर रहे हैं। इसके पीछे अभ्यर्थियों का एक साल बर्बाद होने और शैक्षणिक सत्र प्रभावित होने का तर्क दिया जा रहा है।

खासबात यह है कि जेईई की परीक्षा 6 शिफ्ट में और नीट की परीक्षा मात्र एक शिफ्ट में आयोजित की जा रही है जबकि नीट में शामिल हाेने वाले परीक्षार्थियों की संख्या जेईई से लगभग दोगुनी है। अगर नीट परीक्षा पर नजर डालें कई बार यह परीक्षा दो-दो शिफ्ट में आयोजित की जा चुकी है।

2016 में नीट-1 और नीट-2, 2019 में उड़ीसा में आए साइक्लोन के कारण व बेंग्लुरु में ट्रेन लेट होने के कारण दो बार परीक्षा आयोजित की गई थी। ऐसे में कई विशेषज्ञों का मानना है की इस बार भी परीक्षा को कई शिफ्ट में आयोजित किया जा सकता है या फिर नीट-2 का आयोजन कर कैंडिडेट्स को दूसरी बार में शामिल होने का विकल्प दिया जा सकता है। ऐसा करने पर जहां सक्रमण की संभावना कम होगी वहीं कैंडिडेट्स को भी परीक्षा में शामिल होने के विकल्प मिल सकेंगे। आइये इस रिपोर्ट में समझते हैं इस पूरे विवाद को।

1. क्या है नीट-जेईई परीक्षा विवाद?

आईआईटी और मेडिकल क्षेत्र की पढ़ाई करने के लिए हर साल राष्ट्रीय स्तर की दो परीक्षाओं- आईआईटी जेईई और नीट का आयोजन किया जाता है। इस साल जेईई की परीक्षा 1 से 6 सितंबर और नीट की परीक्षा 13 सितंबर को होनी है। देशभर में जेईई के लिए लगभग 10 लाख व नीट के लिए 16 लाख छात्रों ने आवेदन किया है लेकिन, ये परीक्षाएं ऐसे दौर में हो रही है जब भारत कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में दुनिया में तीसरे नंबर पर पहुंच चुका। यहां अब तक 58 हजार से ज्यादा लोगों की मौत इस वायरस की वजह से हो चुकी है। ऐसे में छात्रों की मांग है कि इस परीक्षा को परिस्थितयां सामान्य होने तक टाल दिया जाए लेकिन, सरकार का तर्क है कि ऐसा करने से युवाओं का एक साल खराब हो जाएगा।

2. इसका समर्थन और विरोध कितना है?

विरोध : बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी, दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसौदिया, ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक, डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ और झारखंड सरकार नीट और जेईई परीक्षा अभी कराने का विरोध कर रही हैं। पर्यावरणविद ग्रेटा थनबर्ग ने भी इन परीक्षाओं को अभी टालने का समर्थन किया है।

समर्थन : शिक्षा जगत से जुड़े अलग-अलग हिस्सों से 100 शिक्षाविदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखकर जेईई-नीट की परीक्षा सितंबर में कराने की मांग की है। आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर प्रोफेसर वी-रामुगोपाल राव, आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर प्रोफेसर अभय कर्नाडिकर परीक्षाओं को सितंबर माह में ही कराने की बात कह रहे हैं।

3. कब-कब साल में दो बार हुई नीट परीक्षा ?

2019: उड़ीसा में आए चक्रवात फानी के कारण यहां 5 मई 2019 को आयोजित की जाने वाली नीट परीक्षा को निरस्त कर दिया गया था। 20 मई को दाेबारा परीक्षा हुई।

2019 : बेंग्लुरु जाने वाली ट्रेन हम्पी एक्सप्रेस के 8 घंटे से अधिक लेट हो जाने के कारण लगभग 500 से अधिक कैंडिडेट्स 5 मई को आयोजित नीट परीक्षा में शामिल नहीं हो जाए। 20 मई को दोबारा परीक्षा आयोजित हुई।

2016: 2016-17 से ही एआईपीएमटी परीक्षा को नीट के रूप में आयोजित किया गया। सीबीएसई ने 1 मई को नीट फेज-1 और 24 जुलाई को नीट फेज-2 आयोजित किया। फेज टू के छूटे हुए कैंडिडेट्स को मौका दिया गया।

4. परीक्षा केंद्रों पर बचाव के क्या होंगे उपाय?

एम्स दिल्ली के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. पुनीत मिश्रा के अनुसार यदि पूरी सावधानी बरती जाए तो बिना समस्या के परीक्षाएं आयोजित की जा सकती है। क्योंकि अब देश में हवाई यातायात से लेकर सब कुछ धीरे-धीरे खुल ही रहा है। स्टूडेंट्स के भविष्य को देखते हुए परीक्षा का आयोजन किया जा सकता है।

सावधानी के रूप में एंट्री के वक्त भीड़ इकट्‌ठी न करने, कैंडिडेट्स के लिए मास्क कम्पल्सरी करने, पर्याप्त वेंटिलेशन और हैंड हाइजीन का ध्यान रखा जाना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यदि किसी में कोई भी लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे परीक्षा हाल से दूर रख अलग व्यवस्था करनी चाहिए।

5. क्या परीक्षाओं के लिए कोई दूसरा विकल्प है?

आईआईटी और नीट परीक्षा कराने वाली संस्था एनटीए का तर्क है कि परीक्षा कराने के लिए तैयारी में वक्त लगता है। एनटीए पर यूजीसी नेट, सीमैट, जीपैट सहित कई दूसरी परीक्षाओं का भी जिम्मा है। एनटीए पर हर महीने कोई ना कोई परीक्षा कराने की जिम्मेदारी होती है।

जेईई और नीट की ही बात करें, तो पेपर सेट करने से लेकर, परीक्षा सेंटर तय करने, एडमिट कार्ड प्रिटिंग से लेकर पेपर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों से तालमेल बैठाने में वक्त लगता है। अगर इस बार दोबारा से इन परीक्षाओं की तारीख आगे बढ़ाई गई, तो पिछले 90 दिन की मेहनत बर्बाद हो जाएगी और दूसरी परीक्षा करवाने पर भी इसका असर होगा।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

कोरोना महामारी के चलते कई राज्यों में लॉक डाउन की परिस्थितियां हैं। कई राज्य बाढ़ से भी पीड़ित हैं। ऐसे में यातायात के साधन की व्यवस्था भी एक समस्या है। निश्चित तौर पर परीक्षाएं कराई जाएं, लेकिन इन्हें शिफ्टों में बांटा जाना चाहिए ताकि स्टूडेंट्स अपनी सहूलियत के हिसाब से इनमें शामिल हो सकें।

खासकर नीट की परीक्षा शिफ्ट में कराना जरूरी है क्योेंकि इसमें लगभग 16 लाख कैंडिडेट शामिल हो रहे हैं। परीक्षा शिफ्ट में कराए जाने से सेंटर्स पर भीड़ कम होगी। सैनेटाइजेशन किया जा सकेगा। संक्रमण का खतरा कम होगा। नीट की परीक्षा पूर्व में शिफ्टों में कराई जा चुकी है।

अमित गुप्ता, नीट एक्टिविस्ट एवं एजुकेशन रिफाॅर्मर

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