पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • After Decades 1000 1200 Tourists Are Coming Every Day, There Is No Echo Of Terror In This Valley, It Used To Be The Path Of Infiltration Of Terrorists.

गुरेज बना टूरिस्ट प्लेस:दशकों बाद रोज आ रहे हैं 1000-1200 सैलानी, इस वैली में अब आतंक की गूंज नहीं; कभी हुआ करता था आतंकवादियों की घुसपैठ का मार्ग

2 महीने पहलेलेखक: मुदस्सिर कुल्लू
  • कॉपी लिंक
गुरेज वैली से किशनगंगा नदी बहती है, जो आगे चलकर पाकिस्तान के कब्जे वाले मुजफ्फराबाद में झेलम नदी में मिलती है। (फोटो - रेशम मार्ग पर गुरेज घाटी)। - Dainik Bhaskar
गुरेज वैली से किशनगंगा नदी बहती है, जो आगे चलकर पाकिस्तान के कब्जे वाले मुजफ्फराबाद में झेलम नदी में मिलती है। (फोटो - रेशम मार्ग पर गुरेज घाटी)।

कभी सीमा पार से कश्मीर में घुसपैठ का प्रमुख मार्ग रहे बांदीपोरा की गुरेज वैली में फिजा बदल चुकी है। प्राचीन सिल्क मार्ग में पड़ने वाली इस वैली में अब आतंक की गूंज नहीं, बल्कि सैलानियों की चहलकदमी सुनाई दे रही है। इन दिनों सैकड़ों पर्यटक यहां की वादियों की ओर खिंचे चले आ रहे हैं। स्थानीय होटल कोरबारियों के मुताबिक, रोज 1000-1200 सैलानी यहां पहुंच रहे हैं। यह पहला मौका है जब 2007 में पर्यटन खुलने के बाद इतनी संख्या में लोग आ रहे हैं।

हालांकि, पर्यटन विकास प्राधिकरण न होने से अधिकारियों के पास पर्यटकों के सटीक आंकड़े नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस साल बड़ी संख्या में पर्यटक गुरेज पहुंच रहे हैं। पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए टूर और होटल संचालकों को यहां जगह तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा हैंं। हाल में, यहां पर्यटन उत्सव भी हुआ। ऊंचे पहाड़, नदियां, हरे-भरे घास के मैदान और वन्य जीवन गुरेज घाटी में पर्यटकों को खुश करने के लिए पर्याप्त हैं।

गुरेज वैली से किशनगंगा नदी बहती है, जो आगे चलकर पाकिस्तान के कब्जे वाले मुजफ्फराबाद में झेलम नदी में मिलती है। गुरेज के मोहम्मद सुभान बताते हैं कि यहां के ज्यादातर युवा सेना या पुलिस में हैं, बाकी लोग खेती करते हैं। अब पर्यटन से रोजगार के बड़े अवसर पैदा हो रहे हैं। वे बताते हैं कि स्थानीय लोगों ने गुरेज में गेस्ट हाउस, स्टे हाउस और छोटे होटल भी बनाए हैं।

किशनगंगा नदी के किनारे पर्यटकों के लिए टेंट लगाने वाले फिरदौस पर्यटकों की आमद से काफी खुश हैं, कहते हैं कि उनके पास छह टेंट हैं। इन दिनों एक भी खाली नहीं है। एक रात का किराया 800 रुपए है। दिल्ली से आए पर्यटक मनीष गुप्ता तीन दोस्तों के साथ बीते हफ्ते तीन दिन गुरेज में रुके। वे इस यात्रा पर कहते हैं कि हम तीन दिन तंबू में रहे। हम इस सुखद अहसास को ताउम्र याद रखेंगे।

ऐसी सुंदरता हमने कहीं नहीं देखी। विषम परिस्थितियों वाले इस इलाके में यह सब सेना की वजह से संभव हो पाया है। राजपूत रेजीमेंट के जवान गुरेज में सीमाओं की रक्षा करते हैं। रेजीमेंट के एक सैन्यकर्मी ने बताया कि यहां अब घुसपैठ नहीं होती। इलाके में बाड़ेबंदी की गई है और स्थानीय लोग भी मदद करते हैं। गुरेज के 15 से अधिक गांव में में करीब 40 हजार लोग रहते हैं।

माइनस 30 डिग्री हो जाता है पारा

गुरेज में बर्फीले तूफान आते रहते हैं। 2017 में बर्फीले तूफान में 15 जवानों की जान गई थी। यहां तैनात एक अन्य सैनिक बताते हैं, ‘इस जगह पर करीब 12 फीट बर्फ गिरती है। यहां मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं है और हम कई बार परिजन से हफ्तों बात नहीं कर पाते हैं। गुरेज से कारगिल तक की सीमाओं पर भारतीय सेना का पहरा है और हमें सर्दियों के दौरान माइनस 30 डिग्री तापमान का सामना करना पड़ता है।’ कठोर मौसम में भी सैनिक चौकी नहीं छोड़ते।

1925 में अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट के बेटे भी आए थे

गुरेज कभी रेशम मार्ग पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। यह कश्मीर को चीन के शिनजियांग प्रांत के काशगर से जोड़ता था। 1925 में अमेरिका के 26वें राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट के बेटे टेड और कर्मिट यहां आए थे। आतंकियों के कारण 2007 तक यह पर्यटकों के लिए बंद था।