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सियासत / 20 साल में तीसरी बार अन्नाद्रमुक और भाजपा मिलकर लड़ सकते हैं चुनाव

Dainik Bhaskar

Jan 11, 2019, 04:29 AM IST


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानीस्वामी। पलानीस्वामी अन्नाद्रमुक से विधायक दल के नेता हैं। (फाइल) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानीस्वामी। पलानीस्वामी अन्नाद्रमुक से विधायक दल के नेता हैं। (फाइल)
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानीस्वामी। पलानीस्वामी अन्नाद्रमुक से विधायक दल के नेता हैं। (फाइल)प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानीस्वामी। पलानीस्वामी अन्नाद्रमुक से विधायक दल के नेता हैं। (फाइल)

  • तमिलनाडु के पार्टी कार्यकर्ताओं से प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- भाजपा पुराने दोस्तों की हमेशा से कद्र करती रही
  • अन्नाद्रमुक अटल सरकार में शामिल थी, हालांकि बाद में उसने सरकार गिरा दी थी

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तमिलनाडु के भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इसमें उन्होंने दक्षिण में नए समीकरणों के संकेत दिए। मोदी ने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी का नाम लेते हुए दक्षिण भारत के सबसे बड़े चुनावी राज्य में एनडीए के पूर्व सहयोगियों की ओर फिर से दोस्ती के हाथ बढ़ाए। इससे उन कायसों को बल मिल रहे हैं, जिसमें कुछ समय से कहा जा रहा था कि तमिलनाडु में भाजपा और एआईएडीएमके (अन्नाद्रमुक) जल्द ही लोकसभा चुनाव एक साथ मिलकर लड़ने का ऐलान कर सकती हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह 20 साल में तीसरा मौका होगा, जब एआईएडीएके एनडीए में शामिल होगी।

दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा 39 लोकसभा सीटें तमिलनाडु में

  1. इससे पहले अन्नाद्रमुक 1998 से 1999 तक अटल सरकार में सहयोगी रही थी। बाद में जयललिता ने समर्थन वापस ले लिया, जिससे सरकार गिर गई थी। इसके बाद 2004 के आम चुनाव में भी एआईएडीएमके राज्य में एनडीए में शामिल हुई। हालांकि दोनों ही बार यह गठबंधन 2 साल के अंदर ही टूट गया। राज्य में सत्तारूढ़ एआईएडीएमके के अलावा डीएमके दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। डीएमके भी पहले केंद्र में भाजपा की सहयोगी रह चुकी है।

  2. एनडीए को 2014 में 2 सीटें मिली थीं

    तमिलनाडु में भाजपा ने 2014 का लोकसभा चुनाव 6 क्षेत्रीय पार्टियों के साथ मिलकर लड़ा था। तब राज्य में एनडीए को दो सीट मिली थीं। इनमें भाजपा और पट्टाली मक्कल कांची (पीएमके) की एक-एक सीट शामिल है। दक्षिण भारत में सबसे अधिक 39 लोकसभा सीटें तमिलनाडु में हैं, इनमें से 37 सीटें अकेले एआईएडीएमके को मिली थीं। डीएमके और कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला था। राज्य में एनडीए का वोट शेयर 18.5% और एआईएडीएमके का 44.3% शेयर था।

  3. भाजपा 19 सीटों पर चुनाव लड़ना चाह रही

    2014 में एनडीए के घटक रहे मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके) और देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम (डीएमडीके) जैसे दल अब अलग हो चुके हैं। ये दल अब एआईएडीएमके में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। भाजपा राज्य की 39 में से 19 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, साथ ही पड़ोसी पुडुचेरी की एक सीट भी चाहती है, अन्य सीटें एआईएडीएमके और उसके सहयोगी दलों के लिए छोड़ना चाहती है। जबकि एआईएडीएमके भाजपा को सिर्फ 5 सीट ही देना चाहती है।

  4. जयललिता के बाद अन्नाद्रमुक कमजोर

    तमिलनाडु से रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हाल में चेन्नई में सीएम पलानिसामी के साथ बैठक की थी। राम माधव भी गठबंधन के संकेत दे चुके हैं। 2014 में जयललिता ने ‘मोदी या लेडी’ के नारे के साथ लड़ा था। एआईएडीएमके दुविधा में है कि भाजपा से गठबंधन किया जाए या नहीं, क्या इससे फायदा होगा? वो भी तब जब, भाजपा को हाल में राज्यों में हार मिली है। हालांकि गठबंधन उसकी मजबूरी भी है, क्योंकि जयललिता के निधन के बाद फूट पड़ने से पार्टी कमजोर हुई है।

  5. एनडीए की मजबूती आपसी विश्वास

    मोदी ने कार्यकर्ताओं से बातचीत में कहा कि राजनीतिक पार्टियों के दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं। उनकी पार्टी पुराने दोस्तों की कद्र करती है। तमिलनाडु में सत्ताधारी एआईएडीएमके, अभिनेता रजनीकांत की पार्टी या डीएमके में से किसी के साथ गठबंधन के सवाल पर बोले- 20 साल पहले, अटल जी सफल गठबंधन की राजनीति की नई संस्कृति लेकर आए। भाजपा ने हमेशा अटल जी के दिखाए रास्तों का अनुसरण किया है। एनडीए की मजबूती आपसी विश्वास को बताता है, इसमें कोई मजबूरी नहीं छिपी है। भाजपा पूर्ण बहुमत से जीतकर आई, तब भी सहयोगियों के साथ सरकार चलाने को तरजीह दी। दशकों से वे (कांग्रेस) रक्षा क्षेत्र को दलालों और बिचौलियों का अड्डा बनाते रहे। हाल ही में एक बिचौलिये (मिशेल) को भारत लाया गया है।

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