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दिल्ली AIIMS के सर्वर हैकिंग मामले में FIR:अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज, 36 घंटे बाद भी सर्वर रिकवर नहीं

नई दिल्ली13 दिन पहले
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दिल्ली AIIMS का सर्वर हैक होने के मामले में पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। IFSO ने यह कार्रवाई AIIMS की असिस्टेंट सिक्योरिटी ऑफिसर की शिकायत पर की है। दिल्ली AIIMS का सर्वर बुधवार सुबह 7 बजे से डाउन है, जिसे 36 घंटे बाद भी रिकवर नहीं किया जा सका है। इसके चलते अस्पताल में मरीजों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में दिक्कतें आ रही हैं।

साइबर अटैक की आशंका
एजेंसियों ने मामले में साइबर अटैक की आशंका जताई है। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के मुताबिक यह रैंसमवेयर वायरस अटैक हो सकता है। इसकी वजह से हॉस्पिटल में इंटरनेट बंद है। इसकी वजह से हॉस्पिटल में इंटरनेट बंद है और सभी काम मैनुअली किए जा रहे हैं। NIC की टीम इसे ठीक करने में अब तक जुटी है। उधर, सर्वर डाउन का मामला गृह मंत्रालय तक पहुंच गया है।

​​​​AIIMS के सर्वर पर VVIP का हेल्थ डेटा
AIIMS के सर्वर पर बेहद संवेदनशील जानकारी रहती है। यहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रियों और अन्य प्रमुख व्यक्तियों का हेल्थ डेटा रहता है। मामले में साइबर क्राइम एजेंसियों को भी लगाया गया है।

क्या होता है रैनसमवेयर?
रैनसमवेयर एक तरह का मालवेयर होता है, जो आपके कंप्यूटर में घुसकर एक्सेस हासिल कर लेता है। यह आपकी सभी फाइल को एन्क्रिप्ट कर देता है। डेटा और एक्सेस वापस देने के एवज में फिरौती की मांग करता है। आसान भाषा में इसे किडनैपिंग समझ सकते हैं। कोई लुटेरा आपके सिस्टम और डेटा को कैद कर लेता है और उसके बदले फिरौती मांगता है। फिरौती देने के बाद वो चाहे तो आपका डेटा वापस कर दे या उसे खत्म कर सकता है।

2021 में ज्यादा मामले मिले
2020 में कम से कम 130 अलग-अलग रैनसमवेयर एक्टिव थे और 2021 की पहली छमाही में मालवेयर के 30,000 ग्रुप मिले थे। जो समान रूप से दिखते और संचालित होते थे। इनमें से 100 रैनसमवेयर ऐसे हैं जिनकी एक्टिविटी कभी नहीं रुकती है। हमलावर अपने रैनसमवेयर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए जाने-माने बॉटनेट मालवेयर और अन्य रिमोट एक्सेस ट्रोजन (RAT) सहित कई तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

ज्यादातर मामलों में ये नए रैनसमवेयर सैंपल का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि गूगल का कहना है कि उसके गूगल क्रोम ओएस क्लाउड-फर्स्ट प्लेटफॉर्म पर किसी भी प्रोफेशन, एजुकेशन या कस्टमर की क्रोम ओएस डिवाइस पर रैनसमवेयर हमले नहीं हुए हैं।

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