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हवा में धोखा / टिकट कंफर्म, फिर भी प्लेन में सीट नहीं; कंपनियों ने 6 माह में 21 हजार से ज्यादा को फ्लाइट में चढ़ने से रोका



Airline companies not provide seats more than 21 thousand passengers in 6 months
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Airline companies not provide seats more than 21 thousand passengers in 6 months

  • विमान कंपनियां खुलेआम तोड़ रही हैं यात्रियों का भरोसा, हजारों होते हैं परेशानी का शिकार
  • गो एयर को छोड़ सभी कंपनियाें ने यात्रियों के साथ धोखा किया, एअर इंडिया सबसे आगे

Dainik Bhaskar

Sep 18, 2019, 11:11 AM IST

नई दिल्ली (शेखर घोष). जनकपुरी की आर्किटेक्ट सुधा चौधरी जब 17 जुलाई को एअर इंडिया की फ्लाइट एआई803 के कंफर्म टिकट के साथ सुबह 6:10 की फ्लाइट पकड़ने एयरपोर्ट पहुंचीं तो उन्हें प्लेन पर चढ़ने से रोक दिया गया। कारण बताया गया कि फ्लाइट में पैसेंजर फुल हो चुके हैं और उन्हें अगली फ्लाइट से भेजा जाएगा। सुधा को मीटिंग स्थगित करनी पड़ी, जिससे उन्हें काफी नुकसान हुआ।

 

पिछले 6 महीने में आखिरी वक्त पर 21,693 यात्रियों को कंफर्म टिकट होने के बावजूद प्लेन में नहीं चढ़ने दिया गया। इस धोखे का कारण है विमान कंपनियों की कमाई का लालच। विमान कंपनियां विमानों में सीटों की क्षमता से ज्यादा की बुकिंग करती हैं और फ्लाइट फुल होने पर अतिरिक्त यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ती है। एअर इंडिया के प्रवक्ता धनंजय कुमार का कहना है कि एअर इंडिया कंफर्म टिकट पर फ्लाइट में जगह न दिए जाने कि स्थिति में दूसरी फ्लाइट में 3 घंटे से ज्यादा समय होने पर पैसेंजर की मांग पर होटल, भोजन, टैक्सी जैसी सुविधा प्रदान की जाती हैं।

 

सभी एयरलाइंस में रोज 120 यात्री ओवरबुकिंग के शिकार होते हैं, शिकायत नहीं होती 
 

वजह है: ओवर बुकिंग करना

अलग-अलग विमान कंपनियों के अधिकारी ने इसके पीछे आेवर बुकिंग को मुख्य कारण बताया। हर एयरलाइंस के पास रूटीन पैसेंजरों का आंकड़ा है। उससे वह अनुमान लगाती है कि किस रूट पर औसतन कितने यात्री सफर करते हैं। इन्हीं आधार पर ओवर बुकिंग होती है। 100 सीट उपलब्ध होने पर कंपनियां 125 या उससे ज्यादा की बुकिंग कर लेती है। जो 100 यात्री शुरुआत में यात्रा करने पहुंच जाते हैं उन्हें तो वह विमान पर चढ़ने देती है।

 

नियम: यात्रियों के लिए विकल्प

  • यात्रियों के पास पहला विकल्प एयरलाइंस द्वारा उपलब्ध कराई जा रही दूसरी फ्लाइट में टिकट बुक करवाने का होता है। 
  • दूसरे विकल्प के तौर पर यात्री चाहे तो टिकट कैंसल करवाकर पूरी राशि एयरलाइंस से वापस लेने की मांग कर सकता है।

 

हर्जाना देने में एअर इंडिया आगे

हर्जाना देने में एअर इंडिया सबसे आगे रही है। एअर इंडिया ने जनवरी-जून 2019 के बीच 5.87 करोड़, जेट एयरवेज ने 2.64 करोड़, स्पाइसजेट ने 99.36 लाख,  इंडिगो ने 20.13 लाख, विस्तारा ने 6.85 लाख, एयरएशिया ने 4.31 लाख रुपए का हर्जाना अदा किया है।

 

ऐसे दर्ज कराएं शिकायत

दोनों ही स्थिति में यात्रियों को हर्जाना देना होगा। यात्री को काउंटर पर मौजूद फार्म भरना होगा या कंपनी के कस्टमर केयर या ईमेल पर शिकायत दे सकते हैं।

 

जानिए अपने अधिकार

वैकल्पिक फ्लाइट का इंतजाम 1 घंटे के भीतर कर दिया जाता है, तो यात्री किसी भी तरह के हर्जाने का हकदार नहीं होता है। इससे ज्यादा देर की फ्लाइट दिए जाने पर यात्री को हर्जाना पाने का हक होगा। वैकल्पिक फ्लाइट 24 घंटे के भीतर उपलब्ध कराई गई है, तो एक तरफ के बेसिक किराए का 200% और एयरलाइन फ्यूल चार्ज जोड़ कर देना होगा। यह अधिकतम 10 हजार रुपए होगा। अगर 24 घंटे बाद की फ्लाइट उपलब्ध कराई जाती है, तो एक तरफ के बेसिक किराए के साथ 400% और एयरलाइन फ्यूल चार्ज जोड़ कर देना होगा। अगर यात्री वैकल्पिक फ्लाइट नहीं लेना चाहता तो टिकट की रकम के रिफंड के साथ एक तरफा किराए का 400% हर्जाना देना होगा।

 

क्षमता से अधिक सीट बुक कर लेना नियमों के विरूद्ध है। ऐसी शिकायतें आने पर विमान कंपनी पर डीजीसीए के नियमों के तहत कार्रवाई के प्रावधान है। इस मामले में अक्सर डीजीसीए तक नहीं पंहुचती है। -अरूण कुमार, डीजी, डीजीसीए

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