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अक्साई चिन / जम्मू-कश्मीर का अहम हिस्सा है 'अक्साई चिन', जिसके लिए गृहमंत्री ने कहा था- जान भी दे सकते हैं



केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह।
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह।केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह।

  • भारत और चीन के बीच सालों से है सीमा विवाद
  • अक्साई चीन को अपना हिस्सा बताता रहा है चीन
  • 1950 के दशक में चीन में किया था अक्साई चिन पर कब्जा

Dainik Bhaskar

Aug 08, 2019, 02:18 PM IST

नेशनल डेस्क. जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 में बदलाव और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद अब दो नए केंद्र शासित प्रदेश (जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख) अस्तित्व में आ चुके हैं। इससे पहले लोकसभा में मंगलवार (6 अगस्त) को अनुच्छेद-370 में बदलाव और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल के प्रस्ताव पर बहस हुई थी, इसी दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि 'मैं जब-जब जम्मू-कश्मीर बोलता हूं तब-तब पीओके और अक्साई चिन इसका हिस्सा होते हैं।' उन्होंने इसके लिए जान देने की बात भी कही थी। बता दें कि गृहमंत्री ने जिस दो क्षेत्रों का नाम लिया, उनमें से पीओके पर पाकिस्तान का 1948 से कब्जा है, वहीं अक्साई चिन पर चीन ने 1962 के युद्ध में कब्जा कर लिया था।

 

अक्साई चिन

 

  • भारत और चीन के बीच जिन दो क्षेत्रों को लेकर सीमा विवाद है, उनमें से एक अरुणाचल प्रदेश है तो वहीं दूसरा अक्साई चिन ही है। अक्साई चिन, जम्मू-कश्मीर का उत्तर-पूर्वी हिस्सा है और पूरे प्रदेश के क्षेत्रफल का करीब 20 प्रतिशत भाग है। चीनी कब्जे से पहले ये प्रदेश के लद्दाख क्षेत्र में आता था, जिसकी एक सीमा तिब्बत से तो दूसरी सीमा चीन से लगती थी। इस इलाके के कुछ हिस्से पर 1950 के दशक में चीन ने कब्जा करते हुए वहां से तिब्बत तक जा रही सड़क बना ली थी। हालांकि भारत को इस बात का पता देर से चला। इसके बाद साल 1962 के युद्ध के दौरान चीन ने इस पर पूरी तरह अपना कब्जा कर लिया और इसे अपने शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र से मिला लिया था। तब से ये उसी के कब्जे में है।

 

क्षेत्रफल

 

  • अक्साई चिन का क्षेत्रफल करीब 37,244 वर्ग किलोमीटर (14,380 स्क्वेयर मील) है। बर्फीला इलाका होने की वजह से इसे सफेद पत्थरों का रेगिस्तान भी कहा जाता है। काफी ज्यादा ठंडा और पथरीला इलाका होने की वजह से यहां कुछ भी नहीं उगता है, इसलिए इसे बर्फीला रेगिस्तान भी कहते हैं। समुद्रतल से इसकी ऊंचाई करीब 5000 मीटर (7000 फीट) है। जम्मू-कश्मीर और अक्साई चिन को जो रेखा अलग करती है, उसे LAC (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) कहा जाता है।
अक्साई चिन

 

सीमा विवाद

 

  • भारत और चीन के बीच सीमा विवाद की जड़ में अक्साई चिन भी शामिल है। भारत इस हिस्से पर अपना दावा करता है, तो वहीं चीन इसे अपना इलाका बताता रहा है। 1865 में सर्वे ऑफ इंडिया के अफसर डब्ल्यूएच जॉनसन ने इलाके का जो नक्शा बनाया, उसमें अक्साई चिन को कश्मीर के साथ बताया। इस सीमा रेखा को लानाक-ला-पास (जॉनसन लाइन 1865) के नाम से जाना गया। इसके बाद जॉनसन को हटा दिया गया। भारत इसी लाइन के आधार पर अपना दावा अक्साई चिन पर करता है।
  • इसके कुछ सालों बाद साल 1889 तक ब्रिटेन और चीन के रिश्ते काफी सुधर गए। जिसके बाद ब्रिटेन ने एकबार फिर इलाके का पुनर्निधारण करने का सोचा और इसका जिम्मा मैकार्टनी-मैक्डॉनाल्ड को दिया। जिन्होंने अक्साई चिन का ज्यादातर हिस्सा चीन में डाल दिया। इस लाइन को कोंगका-ला-पास (मैकार्टनी-मैक्डॉनाल्ड 1899) के नाम से जाना गया। चीन इसी लाइन के आधार पर अक्साई चिन पर अपना हक जताता है।
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