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तमिलनाडु में चुनाव रणनीतिकार भी असमंजस में:‘चुनावी गिफ्ट' के आइडिया की चोरी से सभी दल परेशान, सियासी दंगल में अन्नाद्रमुक और द्रमुक आमने-सामने

एक महीने पहलेलेखक: सुनील सिंह बघेल कांचीपुरम से
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तमिलनाडु में सभी पार्टियों का चुनाव प्रचार जमकर चल रहा है। - Dainik Bhaskar
तमिलनाडु में सभी पार्टियों का चुनाव प्रचार जमकर चल रहा है।

त्रिचनापल्ली के मैदान में एमके स्टालिन की पहली चुनावी रैली में वादों की बरसात जारी है। इसी बीच चेन्नई मे अन्नाद्रमुक के वार रूम में अचानक ‘चोरी हो गई’ का शोर मच जाता है। आरोप डीएमके पर लगाया जा रहा है। कुछ ऐसे ही हालात चुनाव घोषणा से ठीक पहले द्रमुक के वार-रूम में भी नजर आ रहे थे। इस बार चोरी का आरोप एआईएडीएमके पर था।

आरोप-प्रत्यारोप के इस शोर-शराबे में एक आवाज कमल हसन के खेमे से भी आ रही है। इनका आरोप द्रमुक और अन्नाद्रमुक दोनों पर है। दरअसल यह मामला किसी कीमती सामान के चोरी का नहीं, बल्कि ‘चुनावी गिफ्ट’ आइडिया के चोरी हो जाने का है। जल्द ही इन दलों के रणनीतिकार (सुनील कानुगोलू और प्रशांत किशोर इस चोट पर, किसी दूसरे चुनावी गिफ्ट की घोषणा का मरहम लगाने बैठ जाते हैं।

देखने में तो तमिलनाडु में सियासी दंगल मुख्यत दो पार्टियों अन्नाद्रमुक और द्रमुक के बीच नजर आ रहा है। लेकिन पर्दे के पीछे एक दंगल इन दोनों दलों के रणनीतिकारों, सुनील कानुगोलू और डीएमके के प्रशांत किशोर के बीच भी खेला जा रहा है। सुनील और प्रशांत किशोर की जोड़ी ने ही 2014 में अच्छे दिन वाली ‘अबकी बार मोदी सरकार’ का रोड मैप तैयार किया था। हालांकि वाहवाही प्रशांत किशोर को ज्यादा मिली। सुनील उनसे अलग होकर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल, गुजरात, कर्नाटक में भाजपा के प्रमुख रणनीतिकार बन गए। अब यह दोनों रणनीतिकार तमिलनाडु में एक दूसरे के आमने-सामने हैं।

दक्षिण में साठ के दशक से जारी है गिफ्ट कल्चर
​​​​​​​दरअसल तमिलनाडु की राजनीति मे गिफ्ट कल्चर 60 के दशक से ही रहा है। कांग्रेसी मुख्यमंत्री कामराज ने 1960 में मुफ्त शिक्षा और मिड डे मील दिया तो अन्नादुरई ने 1967 में 1 रुपए में 4.5 किलो चावल दिए। एमजी रामचंद्रन ने 70 के दशक में मद्रास जल संकट के दौरान फ्री प्लास्टिक कैन गिफ्ट किए। 1996 के बाद अब यह चरम पर है। 2019 के लगभग दो लाख करोड़ के बजट में ही मुफ्त सहायता, सब्सिडी का खर्च 75 हजार करोड़ है।

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