शीतकालीन सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक:महंगाई, कोरोना समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई, MSP की गारंटी का कानून बनाने की मांग उठी

नई दिल्ली2 महीने पहले

संसद के शीतकालीन सत्र से एक दिन पहले रविवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक समाप्त हो गई है। बैठक में नए कृषि कानूनों की वापसी समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में कम से कम 15-20 विषयों पर चर्चा हुई। सभी पार्टियों ने केंद्र सरकार से कहा कि MSP और इलेक्ट्रिक बिल पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही MSP पर कानून बनाना चाहिए।

खड़गे ने कहा, "बैठक में महंगाई, ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी, किसानों के मुद्दों और कोरोना सहित कई मुद्दों को उठाया गया। सभी दलों ने मांग की कि MSP की गारंटी वाला कानून बनाया जाए। हमने सरकार से मांग की कि कोरोना से जान गंवाने वालों के परिवारों को 4 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए। साथ ही कृषि कानूनों के विरोध के दौरान जिनकी मौत हुई है, उन किसानों को भी मुआवजा दिया जाए।"

PM मोदी बैठक में शामिल नहीं हुए
कांग्रेस नेता ने कहा, "हमें उम्मीद थी कि पीएम आज बैठक में शामिल होंगे। लेकिन किसी कारण से वह इसमें शामिल नहीं हुए। सरकार ने कृषि कानूनों को वापस ले लिया है लेकिन मोदी ने कहा था कि वह किसानों को समझा नहीं सके। इसका मतलब है कि भविष्य में इन कानूनों को किसी और रूप में वापस लाया जा सकता है।"

सर्वदलीय बैठक में 31 दलों ने भाग लिया
मीटिंग के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि आज सर्वदलीय बैठक में 31 दलों ने भाग लिया। विभिन्न दलों के 42 नेता बातचीत का हिस्सा बने। उन्होंने कहा कि सरकार हर उस मसले पर चर्चा के लिए तैयार है, जिस पर स्पीकर ने मंजूरी दी है।

तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने का बिल
केंद्र सरकार की ओर से तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने का बिल सदन में पेश हो सकता है। केंद्रीय कैबिनेट ने इन्हें वापस लेने की मंजूरी दे दी है। इन कानूनों को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर बीते एक साल से किसानों का प्रदर्शन चल रहा है। MSP की गारंटी देने को लेकर किसानों का प्रदर्शन अभी भी जारी है।

सदन में पेगासस जासूसी का मुद्दा भी उठेगा
लोकसभा के शीतकालीन सत्र के हंगामेदार रहने की उम्मीद है। सत्र के दौरान विपक्ष कृषि कानूनों के साथ ही पेगासस स्पाईवेयर से फोन टैपिंग के मुद्दे को भी उठा सकता है। विपक्ष की कोशिश है कि सरकार को बैकफुट पर रखा जाए। वहीं, सरकार की ओर से विपक्षी चक्रव्यूह को तोड़ने की रणनीति बनाई जा रही है।