आलोक वर्मा को CBI प्रमुख पद से हटाए जाने के बाद बोला, झूठे आरोप लगाकर किया गया ट्रांसफर / आलोक वर्मा को CBI प्रमुख पद से हटाए जाने के बाद बोला, झूठे आरोप लगाकर किया गया ट्रांसफर

उच्चाधिकार चयन समिति में मोदी के अलावा कांग्रेस मल्लिकार्जुन खड़गे और सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सीकरी थे।

DainikBhaskar.com

Jan 11, 2019, 11:06 AM IST
Alok Verma reaction on Transferred, basis of false

नेशनल डेस्क, नई दिल्ली. सीबीआई के पूर्व चीफ आलोक वर्मा ने पद से हटाने जाने के एक दिन पद अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा कि झूठे, अप्रमाणिक और बेहद कमजोर आरोपों को आधार बनाकर मेरा ट्रांसफर किया गया। ये आरोप एक ऐसे शख्स ने लगाए हैं, जो मुझसे द्वेष रखता है। 1979 बैच के आईपीएस अफसर वर्मा को गुरुवार देर रात सीबीआई निदेशक पद से हटा दिया गया था। अब उन्हें सिविल डिफेंस, फायर सर्विसेस और होमगार्ड विभाग का महानिदेशक बनाया गया है।

आलोक वर्मा का रिएक्शन : आलोक वर्मा ने न्यूज एजेंसी को बताया कि उच्च सार्वजनिक स्थानों पर भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सीबीआई एक प्रमुख जांच एजेंसी है। यह ऐसी संस्था है जिसकी स्वतंत्रता को सुरक्षित किया जाना चाहिए। सीबीआई को बाहरी शक्तियों के प्रभाव में आए बिना कार्य करना चाहिए। मैंने संस्था की अखंडता को बनाए रखने की कोशिश की, जबकि इसे बर्बाद करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

चयन समिति के सदस्य : इस उच्चाधिकार चयन समिति में मोदी के अलावा लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके सीकरी सदस्य हैं। नियमानुसार, सीबीआई निदेशक का चयन प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति करती है। चीफ जस्टिस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (या सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता) इसके सदस्य होते हैं। अगर इनमें से कोई सदस्य बैठक में शामिल नहीं होता है तो फैसला अगली बैठक तक टाल दिया जाता है।

CVC ने इन 10 आरोपों में से 4 सही माने :
1. घूस लेकर जांच प्रभावित करना।

निष्कर्ष: सबूत नहीं है। परिस्थितिजन्य सबूतों की पड़ताल के लिए आगे जांच की जरूरत।

2(a) आईआरसीटीसी केस में संदिग्ध का नाम नहीं जुड़ने दिया।

निष्कर्ष: आरोप साबित होता है। गंभीर कदाचार है। अनुशासनात्मक कार्रवाई जरूरी।
2 (b) पटना में वर्मा ने तलाशी रुकवाने की कोशिश की।

निष्कर्ष: आरोप साबित नहीं।
3. बैंक फ्रॉड में आरोपी के खिलाफ जांच रिपोर्ट फाइनल करने में असामान्य देरी। साफ दिखता है कि आरोपी को बचाया जा रहा है।

निष्कर्ष: आरोप सही साबित।
4. सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर से जुड़े मामले में अनियमितता बरती।

निष्कर्ष: आरोप की पुष्टि नहीं।
5. गंभीर मामले में खुफिया इनपुट्स पर कार्रवाई नहीं की।

निष्कर्ष: आरोप की पुष्टि नहीं।
6. गुड़गांव में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ चल रही प्राथमिक जांच में 36 करोड़ की घूसखोरी।
निष्कर्ष: आरोपों की पुष्टि नहीं हुई। आगे जांच की जरूरत है।
7. इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर सोने की तस्करी पर कार्रवाई में नाकामी।

निष्कर्ष: आरोपों की आंशिक तौर पर पुष्टि हुई है। इसलिए इस मामले में सीबीआई की दूसरी टीम से दोबारा जांच की जरूरत है।
8. पशु तस्करों और एक बीएसएफ कमांडेंट को बचाने में मदद की।

निष्कर्ष: आरोप साबित नहीं।
9. दागी अधिकारियों को सीबीआई में लाने का प्रयास किया।

निष्कर्ष: आरोप सही साबित।
10. ईडी अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप किया।

निष्कर्ष: आरोप या तो साबित नहीं हुए या फिर इनमें आगे जांच की जरूरत है।

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