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गृह मंत्री का असम दौरा:हिमंत सरकार का एक साल पूरा; शाह बोले- वह दिन दूर नहीं, जब पूरा राज्य AFSPA मुक्त होगा

गुवाहाटी4 महीने पहले

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दो दिन के असम दौरे पर हैं। आज उन्होंने हिमंत सरकार के एक साल पूरा होने पर गुवाहाटी में एक रैली को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था में सुधार और उग्रवादी संगठनों के साथ शांति समझौते के कारण असम के कई हिस्सों से AFSPA को हटा लिया गया है और उन्हें विश्वास है कि जल्द ही इसे पूरे राज्य से हटा लिया जाएगा।

शाह ने कहा, 'केंद्र और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के प्रयासों से अधिकांश आतंकवादी संगठनों ने शांति समझौते किए हैं और वह दिन दूर नहीं है, जब पूरा राज्य उग्रवाद और हिंसा से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। असम में AFSPA के तहत आने वाले क्षेत्रों को कम कर दिया गया है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि राज्य के सभी क्षेत्रों से AFSPA को हटा दिया जाए।'

शाह बोले- PM मोदी के 8 साल के शासनकाल में हम असम को AFSPA मुक्त राज्य बनाने में जुटे हैं।
शाह बोले- PM मोदी के 8 साल के शासनकाल में हम असम को AFSPA मुक्त राज्य बनाने में जुटे हैं।

इस दौरान शाह ने असम पुलिस को प्रेसिडेंट कलर अवार्ड से भी सम्मानित किया। असम पुलिस को यह सम्मान राज्य में अपराध को कम करने, कानून व्यवस्था बनाए रखने और अच्छे प्रदर्शन के लिए दिया गया। शाह ने असम पुलिस की तारीफ करते हुए कहा कि आजादी के समय असम पुलिस बल की संख्या 8 हजार थी और आज असम पुलिस की संख्या 70 हजार से भी ऊपर है।

गुवाहाटी में असम पुलिस को प्रेसिडेंट कलर अवार्ड देते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह।
गुवाहाटी में असम पुलिस को प्रेसिडेंट कलर अवार्ड देते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह।

प्रेसिडेंट कलर अवार्ड हासिल करने वाला असम 10वां राज्य
प्रेसिडेंट कलर अवार्ड हासिल करने वाला असम 10वां राज्य बन गया है। इससे पहले नौ राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश को यह अवॉर्ड मिल चुका है। इसमें उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, जम्मू और कश्मीर, तमिलनाडु, त्रिपुरा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा शामिल हैं।

गुवाहाटी में स्टेज पर ढोल बजाते अमित शाह।
गुवाहाटी में स्टेज पर ढोल बजाते अमित शाह।

असम सरकार भारत सरकार का समर्थन कर रही
शाह ने कहा कि असम सरकार भारत सरकार का समर्थन कर रही है। इसके कारण असम की सीमाओं से घुसपैठ को रोकने के लिए हमें बहुत सफलता मिली है। हम बंगाल में भी घुसपैठ रोकने का प्रयास कर रहे हैं और असम में भी कर रहे हैं, लेकिन बंगाल में हमें कोई समर्थन नहीं मिलता, बहुत सफलता नहीं मिलती। असम सरकार घुसपैठ के खिलाफ चट्टान की तरह खड़ी है।

असम के 23 जिलों से पूरी तरह हटा AFSPA
AFSPA असम के 23 जिलों से पूरी तरह और एक जिले से आंशिक रूप से निरस्त कर दिया गया है। वर्तमान में असम के 9 जिलों में यह कानून लागू है। इसमें तिनसुकिया, डिब्रूगढ़, चराईदेव, शिवसागर, जोरहाट, गोलाघाट, कारबी आंगलोंग, वेस्ट कारबी आंगलोंग, दिमा हसाओ और कछार जिले का लखीमपुर सब डिवीजन शामिल है।

क्या है AFSPA
AFSPA को केवल अशांत क्षेत्रों में लागू किया जाता है। इन जगहों पर सुरक्षाबल बिना वारंट के किसी को भी गिरफ्तार कर सकते हैं। कई मामलों में बल प्रयोग भी हो सकता है। पूर्वोत्तर में सुरक्षाबलों की सहूलियत के लिए 11 सितंबर 1958 को यह कानून पास किया गया था। 1989 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद बढ़ने पर यहां भी 1990 में AFSPA लागू कर दिया गया। अशांत क्षेत्र कौन-कौन से होंगे, ये भी केंद्र सरकार ही तय करती है।

अभी तक इन जगहों पर लागू है AFSPA
AFSPA कानून असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब, चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर समेत कई हिस्सों में लागू किया गया था। हालांकि, बाद में कई इलाकों से इसे हटा भी दिया गया। अमित शाह की घोषणा से पहले ये कानून जम्मू-कश्मीर, नगालैंड, मणिपुर (राजधानी इम्फाल के 7 क्षेत्रों को छोड़कर), असम और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में लागू है। त्रिपुरा, मिजोरम और मेघालय से इसे पहले ही हटा दिया गया है।

नगालैंड से उठी थी AFSPA हटाने की मांग
पिछले साल दिसंबर में नगालैंड में सेना के हाथों 13 आम लोगों के मारे जाने और एक अन्य घटना में एक व्यक्ति के मारे जाने के बाद असम में AFSPA (सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम) हटाने की मांग ने जोर पकड़ लिया था। यह एक्ट मणिपुर में (इंफाल नगर परिषद क्षेत्र को छोड़ कर), अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग, लोंगदिंग और तिरप जिलों में, असम से लगने वाले उसके सीमावर्ती जिलों के आठ पुलिस थाना क्षेत्रों के अलावा नगालैंड और असम में लागू है। केंद्र सरकार ने जनवरी की शुरुआत में नगालैंड में इसे छह महीने के लिए बढ़ा दिया था।
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