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70 साल बाद अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी / अमित शाह ने कहा- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश होंगे, उचित समय आएगा तो फिर राज्य बनाएंगे



Amit Shah Parliament News Live Updates; Jammu Kashmir Today News Live Updates On Jammu Kashmir Article 35A Article 370
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Amit Shah Parliament News Live Updates; Jammu Kashmir Today News Live Updates On Jammu Kashmir Article 35A Article 370

  • केंद्र ने अनुच्छेद 370 को इसलिए निष्प्रभावी किया क्योंकि इससे राज्य का पुनर्गठन नहीं किया जा सकता था
  • अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा मिला हुआ था, संसद से पारित कई कानून इस राज्य में लागू नहीं हो पाते थे
  • केंद्र सरकार रक्षा, विदेश और संचार जैसे अहम विषयों को छोड़कर राज्य के बाकी मामलों में दखल नहीं दे सकती थी
  • जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक राज्यसभा से पास, विधेयक के पक्ष में 125 और विरोध में 61 वोट पड़े
  • जम्मू-कश्मीर दिल्ली की तरह विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनेगा, लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी

Dainik Bhaskar

Aug 20, 2019, 06:49 PM IST

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर दिया। इसके साथ ही राज्य के पुनर्गठन का रास्ता साफ हो गया। शाह ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक भी पेश कर दिया, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा। विधेयक राज्यसभा से पास हो गया। इसके पक्ष में 125 और विरोध में 61 वोट पड़े।

 

राज्यसभा में हंगामे के बीच हुई चर्चा का जवाब देते हुए शाह ने कहा कि हमारा इरादा केंद्र शासित राज्य की व्यवस्था को लंबे समय तक बनाए रखने का नहीं है। उचित समय आने पर हम फिर राज्य बना देंगे।

 

इससे पूर्व राष्ट्रपति ने संविधान आदेश (जम्मू-कश्मीर के लिए) 2019 पर दस्तखत किए। संसद सत्र चालू होने की वजह से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में इससे जुड़ा संकल्प भी पेश किया। थोड़ी ही देर बाद सरकार ने इस बारे में अधिसूचना भी जारी कर दी।

 

नेहरू ने कहा था कि 370 घिस जाएगी, 70 साल में ऐसा नहीं हुआ- शाह
अमित शाह बोले- नेहरूजी ने भी कहा था कि 370 घिसते-घिसते घिस जाएगी, लेकिन उन्होेंने इसे इतने जतन से रखा कि ये 70 साल में घिसी नहीं। टेम्परेरी शब्द 70 साल तक कैसे चला, इस प्रावधान को कैसे चलाना है?

 

70 साल पहले संविधान में जोड़ा गया था अनुच्छेद
26 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर के राजा हरि सिंह ने विलय संधि पर दस्तखत किए थे। उसी समय अनुच्छेद 370 की नींव पड़ गई थी, जब समझौते के तहत केंद्र को सिर्फ विदेश, रक्षा और संचार मामलों में दखल का अधिकार मिला था। 17 अक्टूबर 1949 को अनुच्छेद 370 को पहली बार भारतीय संविधान में जोड़ा गया। 

 

राज्य पुनर्गठन विधेयक पेश

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने के लिए सरकार ने सोमवार को राज्य पुनर्गठन विधेयक भी पेश किया, जो राज्यसभा में पास हो गया। शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर दिल्ली और पुड्डुचेरी की तरह केंद्र शासित प्रदेश रहेगा यानी यहां विधानसभा रहेगी। वहीं लद्दाख की स्थिति चंडीगढ़ की तरह होगी, जहां विधानसभा नहीं होगी।

 

राज्य में जंग जैसे हालात- गुलाम नबी

जब राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो सभापति एम वेंकैया नायडू ने शाह से जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक पेश करने को कहा। इस पर विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कश्मीर में कर्फ्यू है। तीन पूर्व मुख्यमंत्री नजरबंद कर दिए गए हैं। राज्य में हालात वैसे ही हैं, जैसे जंग के वक्त होते हैं। विधेयक तो पारित हो जाएगा। हम विधेयक के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमें पहले कश्मीर के हालात पर चर्चा करनी चाहिए। हमने इसी को लेकर नोटिस भी दिया है। एक घंटे उस पर चर्चा होनी चाहिए। आजाद के बयान पर शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर हर जवाब देने को तैयार हूं और यह विधेयक भी कश्मीर के संबंध में ही है। 

 

370

 

पीडीपी सांसद ने सदन में कपड़े फाड़े

चर्चा के दौरान पीडीपी के सांसद मीर फैयाज और नजीर अहमद लावे संविधान का उल्लंघन कर रहे थे, जिसके चलते नायडू ने दोनों को सदन से बाहर जाने को कहा। इन सांसदों ने संविधान की प्रति भी फाड़ी। गुलाम नबी ने कहा कि पीडीपी के सांसदों द्वारा किए गए काम की निंदा करता हूं। हम भारत के संविधान के साथ हैं। हम संविधान की रक्षा के लिए जान की बाजी लगा देंगे। लेकिन भाजपा ने आज संविधान की हत्या कर दी।

 

JK

 

शाह ने कहा- अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को 3 परिवार लूट रहे थे। आजाद ने कहा कि अनुच्छेद 370 भारत को जम्मू-कश्मीर से जोड़ता है, यह सही नहीं है। महाराजा हरि सिंह ने जम्मू-कश्मीर इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर 27 अक्टूबर 1947 पर दस्तखत किए थे। अनुच्छेद 370 1954 में अस्तित्व में आया।

 

संसद पहुंचने पर मुस्कुराए थे शाह

संसद भवन पहुंचने पर पत्रकारों ने शाह से कश्मीर पर बड़े फैसले को लेकर सवाल पूछा, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और मुस्कुरा कर अंदर चले गए। कांग्रेस ने दोनों सदनों में स्थगन नोटिस दिया और कार्यवाही से पहले गुलाम नबी आजाद के चेंबर में बैठक की।

 

जम्मू-कश्मीर आरक्षण विधेयक भी पेश होगा

गृह मंत्री राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर में आर्थिक पिछड़े वर्गों काे 10% आरक्षण संबंधी बिल भी पेश करेंगे। यह बिल 28 जून में लोकसभा से पास हो चुका है। मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन बिल 2019 में कश्मीर में सीमा से सटे इलाकों के नागरिकों को विशेष आरक्षण देने का प्रावधान किया है। ताकि उन्हें भी आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक तौर पर बराबरी का मौका मिल सके। शाह ने लोकसभा में कहा था कि नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले लोगों को शेल्टर होम में रहना पढ़ता है। कई दिनों तक बच्चों को यहां रहना पड़ता है। स्कूल बंद रहते हैं। उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। इसलिए उन्हें आरक्षण दिया जा रहा है। इससे साढ़े तीन लाख लोगों को फायदा होगा। 

 

जम्मू-कश्मीर के हर वर्ग को आरक्षण का लाभ मिलेगा
गृह मंत्रालय द्वारा पेश किए गए बिल के तहत जम्मू-कश्मीर आरक्षण अधिनियम 2004 में संशोधन किया गया है। राज्यसभा में बिल पास होने से अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास रहने वाले लोगों को भी आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। आरक्षण नियम में संशोधन कहता है कि कोई भी व्यक्ति जो पिछड़े क्षेत्रों, नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतराष्ट्रीय सीमा (आईबी) से सुरक्षा कारणों से चला गया हो उसे भी आरक्षण का फायदा मिल सकेगा।

 

 

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