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जांच रिपोर्ट में रेलवे को क्लीन चिट, कहा- लोगों की गलती से हुई यह दुखद घटना

4 वर्ष पहले
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  • 19 अक्टूबर को दशहरा देख रहे लोगों को ट्रेन ने कुचला था, 60 की जान गई
  • रेलवे सुरक्षा आयोग ने कहा- आयोजक और प्रशासन ऐसे आयोजनों की जानकारी रेलवे को पहले से दें  

नई दिल्ली. रेलवे सुरक्षा आयोग ने अमृतसर हादसे की जांच में रेलवे को क्लीन चिट दी है। आयोग के आयुक्त एसके पाठक ने कहा कि लोगों की गलती की वजह से ये दुखद घटना हुई, क्योंकि वे रेलवे ट्रैक पर खड़े होकर दशहरा देख रहे थे। 19 अक्टूबर को फिरोजपुर रेलवे स्टेशन के करीब जौड़ा फाटक पर दशहरा देख रहे लोगों को ट्रेन ने कुचल दिया था। हादसे में 60 लोगों की जान गई थी।

1) पहले रेलवे ने जांच से किया था इनकार

न्यूज एजेंसी को मिली रिपोर्ट के मुताबिक, पाठक ने कहा- मेरे सामने अब तक जो तथ्य और हालात सामने आए हैं, उन पर विचार करने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि ये हादसा उन लोगों की गलती की वजह से हुआ, जो कथित तौर पर रेलवे ट्रैक और उसके करीब खड़े हुए थे।

पाठक ने इस घटना को "रेलवे लाइन के किनारे लोगों की कार्यशैली में गलती' के तौर पर वर्गीकृत किया है। उन्होंने कुछ सुझाव भी दिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को टाला जा सके।

यह आयोग नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन काम करता है। आयोग रेलवे सुरक्षा और कार्यप्रणाली से जुड़े मसलों पर काम करता है और इसे रेल हादसों की जांच का जिम्मा भी सौंपा जाता है। पहले रेलवे ने इस मामले में जांच से इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में आयोग को जांच सौंपी।

पाठक ने कहा- जांच के दौरान मुझे ये पता चला कि एस (S) आकार का मोड़ होने की वजह से हादसे की जगह तब तक नहीं दिख सकती थी, जब तक ट्रेन उस जगह से 20 मीटर की दूरी पर ना पहुंच जाए। और, यह हादसा उस वक्त हुआ, जब रावण का पुतला जलने की वजह से हवा में धुआं घुल गया था।

"जहां हादसा हुआ, रेलवे के उस सेक्शन में 100 किमी/घंटा की रफ्तार की इजाजत होती है। हादसे के वक्त ट्रेन 82 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही थी। चालक ने भीड़ को देखा और ब्रेक लगाए।'

"पूछताछ के दौरान सामने आया कि ब्रेक लगाने पर ट्रेन को रुकने के लिए 398 मीटर की दूरी चाहिए थी। घटनास्थल पर 50 पुलिसकर्मी मौजूद थे। उन्होंने लोगों को ट्रैक से हटाने की कोशिश की, लेकिन लोग नहीं माने।'

 

  • पाठक ने सुझाव दिया कि जिला प्रशासन और आयोजकों को इस तरह के आयोजनों के बारे में रेलवे प्रशासन को पहले से जानकारी देनी चाहिए, ताकि रेलवे सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त कदम उठा सके। 
  • जीआरपी और आरपीएफ को राज्य की पुलिस के साथ लगातार बैठक करनी चाहिए, ताकि इस तरह के आयोजनों का कैलेंडर बन सके। इससे दुर्घटनाओं को टालने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकेंगे। 
  • राज्य के विभागों को रेलवे के साथ तालमेल बैठाकर शहरी इलाकों में ट्रैक के करीब रह रहे लोगों को ट्रेनिंग देनी चाहिए और उन्हें आगाह करना चाहिए कि ट्रैक पर खड़े होने से दुर्घटनाएं हो सकती हैं और खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।