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UN में भारतीय सेना की तारीफ:1100 डिग्री के दहकते लावा की धारा शहर में घुस रही थी, भारतीय जवानों ने निगरानी पोस्ट बना 6 लाख लोगों को बचाया

नई दिल्ली4 महीने पहलेलेखक: मुकेश कौशिक
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कांगो में ज्वालामुखी फटने के बाद भारतीय जवानों ने एक घंटे में 3 फैसले लेकर लाखों की जान बचाई। - Dainik Bhaskar
कांगो में ज्वालामुखी फटने के बाद भारतीय जवानों ने एक घंटे में 3 फैसले लेकर लाखों की जान बचाई।
  • कांगो में 14 हजार शांति सैनिक तैनात हैं, इनमें 20% भारतीय

संयुक्त राष्ट्र के न्यूयॉर्क मुख्यालय में शनिवार को अंतरराष्ट्रीय शांति सेना दिवस मनाया गया। इसमें सैनिकों के योगदान के साथ भारतीय सेना के उन जवानों का नाम गर्व से लिया गया, जिन्होंने पिछले हफ्ते अफ्रीकी देश कांगो में फटे निरागोंगो ज्वालामुखी के 1100 डिग्री सेल्सियस तापमान पर उबलते लावा से लाखों लोगों को बचाया। साथ ही, बाकी शांति सैनिकों की रक्षा की।

सेना के सूत्रों ने दैनिक भास्कर को बताया कि संयुक्त राष्ट्र से अलर्ट मिला था कि शांति सैनिकों को वहां से निकाल लिया जाए। लेकिन भारतीय लीडरशिप ने एक तिहाई से अधिक जवानों को वहीं रोका ताकि लोगों की मदद की जा सके। सेना ने एक घंटे के भीतर 3 बड़े फैसले किए। पहला- एयर एसेट्स को शिफ्ट कर दिया जाए। दूसरा- गोमा में तैनात 2300 भारतीय सैनिकों में 70% को हिम्बी में कम्पनी ऑपरेटिंग बेस भेज दिया जाए। तीसरा- बाकी सैनिकों को खाली शिविरों की रक्षा, एविएशन बेस और एविएशन ईंधन के रखरखाव के लिए वहीं तैनात किया गया।

निगरानी पोस्ट बनाने का निर्णय बेहद कारगर साबित हुआ। इस पोस्ट से भारतीय सेना ने बहुत जल्दी ही यह पता लगा लिया कि लावा किस ओर बह रहा है। गोमा की आबादी 6 लाख है। ज्वालामुखी फटने से दहशत फैल चुकी थी। लोग घरों को छोड़कर भाग रहे थे। ऐसे में भारतीय सेना ने उन्हें अलर्ट किया कि लावा पड़ोसी देश रवांडा की ओर बह रहा है।

सेना ने लावा के संभावित रास्ते की पहचान की और उसके रास्ते से नागरिकों को हटाने का आपरेशन लॉन्च कर दिया। यह सूझबूझ और साहस काम आया। अब कांगो के संयुक्त राष्ट्र शांति सेना मुख्यालय में सामान्य स्थिति बहाल हो रही है। कांगो में 14 हजार शांति सैनिक तैनात हैं, जिनमें से करीब 20 प्रतिशत भारतीय हैं।

विश्व शांति में भारत; 49 मिशन में 1.95 लाख सैनिकों की भूमिका

विश्व शांति मिशनों में भारत दुनिया का बिग ब्रदर है। चीन के सैनिक हमसे तीन गुना कम हैं। भारतीय सेना ने 73 साल में 49 मिशनों में 1.95 लाख से ज्यादा सैनिक भेजे हैं। यह सबसे बड़ा योगदान है। इन मिशनों में 170 भारतीय सैनिक शहीद हो चुके हैं। इस समय 10 मिशनों में भारत के 7676 जवान तैनात हैं।

4000 शांति सैनिक जान गंवा चुके हैं पिछले 73 साल में

29 मई 1948 से अब तक 72 शांति मिशनों में 10 लाख सैनिक अपनी सेवाएं दे चुके हैं। जबकि दुनिया के 89 हजार शांति सैनिक 16 मिशनों पर तैनात हैं। पिछले 73 साल में 4000 से ज्यादा संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक अंतरराष्ट्रीय मिशनों में मारे जा चुके हैं। सबसे ज्यादा 130 ने 2020 में जान गंवाई थी।