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सीरो सर्वे-4:देश के 67% लोगों में एंटीबॉडी; प्राइमरी स्कूल खोल सकते हैं, बच्चों को खतरा कम

नई दिल्ली2 महीने पहले
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21 राज्यों के 70 जिलों में 28,975 लोगों की हुई जांच। - Dainik Bhaskar
21 राज्यों के 70 जिलों में 28,975 लोगों की हुई जांच।
  • आईसीएमआर का सर्वे बताता है-40 करोड़ लोग अब भी संक्रमण के खतरे में

कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के चौथे सीरो सर्वे के नतीजों ने उम्मीद की किरण दिखाई है। इसके मुताबिक देश के 67.6 फीसदी लोगों (करीब 86 करोड़) में कोरोना एंटीबॉडी बन चुकी है। यानी ये या तो संक्रमित होकर ठीक हो गए, या इनमें वैक्सीन से एंटीबॉडी बनी है।

इस तरह से इनमें कोरोना से प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो चुकी है। हालांकि करीब 40 करोड़ लोग अब भी ऐसे हैं, जिन्हें संक्रमण का खतरा है। इसके साथ ही आईसीएमआर ने कहा है कि बच्चों को संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत कम है ऐसे में स्कूल खोले जा सकते हैं।

मंगलवार को सर्वे के आंकड़े जारी करते हुए आईसीएमआर ने बताया, चौथे देशव्यापी सीरो सर्वे में 6 साल से ऊपर के 28,975 लोगों को शामिल किया गया था। इस साल जून और जुलाई में 21 राज्यों के 70 जिलों से नमूने लिए गए। हर जिले के 10 गांव या वार्ड से 40-40 लोगों का नमूना लिया गया। इसमें छह से नौ वर्ष के 2,892, 10-17 वर्ष के 5,799 और 18 वर्ष से ज्यादा के 20,284 लोग शामिल थे। इनमें से दो-तिहाई में एंटीबॉडी (सीरो प्रिवलेंस) मिली है।

टीके की एक डोज लगवा चुके 81%, दोनों लगवा चुके 89% लोगों में मिली एंटीबॉडी

आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा, ‘जिन क्षेत्रों की कम आबादी में एंटीबॉडी बनी है, वहां तीसरी लहर का खतरा ज्यादा है। दो-तिहाई लोगों में एंटीबॉडी मिलना उम्मीद तो जगाता है, लेकिन इस लड़ाई से समझौता नहीं कर सकते। ऐसे में सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक भीड़ से बचना चाहिए।’

  • टीके की एक डोज लगवा चुके 81% और दोनों डोज ले चुके 89.9% में एंटीबॉडी मिली। टीका न लगवाने वाले 62.3% लोगों में ही एंटीबॉडी मिली।

इस सीरो सर्वे में शामिल देश के 7,252 स्वास्थ्यकर्मियों में 85.2% में एंटीबॉडी मिली। जबकि 10 फीसदी स्वास्थ्यकर्मियों ने वैक्सीन ही नहीं लगवाई है। वहीं, 76.1% लाेगों को टीके की पहली डोज और 13.4% को दोनों डोज दी जा चुकी है।

आईसीएमआर की सलाह

बच्चों में बड़ों जैसी एंटीबॉडी, स्कूल खोलने से पहले शिक्षक-स्टाफ को वैक्सीन लगे

डॉ. भार्गव ने कहा, ‘छोटे बच्चे वायरस को आसानी से हैंडल कर लेते हैं। उनके लंग्स में वह रिसेप्टर कम होते हैं जहां कोविड-19 वायरस हमला करता है। सीरो सर्वे में भी 6 से 9 साल तक के बच्चों में लगभग उतनी ही एंटीबॉडी मिली हैं, जितनी वयस्कों में है। यूरोप के कई देशों ने भी प्राइमरी स्कूल बंद नहीं किए थे। ऐसे में स्कूल खोलने पर विचार किया जा सकता है। स्कूल खोलने की शुरुआत प्राइमरी कक्षाओं से होनी चाहिए। इसके बाद ऊपर की कक्षाएं खुलनी चाहिए।’

  • भार्गव ने कहा, स्कूल खोलने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षकों के साथ ही बस चालक, कंडक्टर सहित सभी सहयोगी कर्मचारी वैक्सीनेटेड हों।
  • हालांकि स्कूल खोलने का फैसला राज्य और जिला स्तर पर होना है। यह टेस्ट पॉजिटिविटी रेट और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर निर्भर करेगा।

संसद में सरकारी ‘सच’

केंद्र ने कहा- राज्यों ने यह नहीं बताया कि ऑक्सीजन की कमी से कितनी मौतें

केंद्र सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में बताया, कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत होने की जानकारी उसके पास नहीं है। कांग्रेस सांसद केसी के.सी. वेणुगोपाल के सवाल के लिखित जवाब में स्वास्थ्य राज्यमंत्री भारती पवार ने बताया, ‘स्वास्थ्य राज्य का मामला है। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश कोरोना से मौतों की नियमित जानकारी देते रहे हैं। किसी भी राज्य-केंद्रशासित प्रदेश ने ऑक्सीजन की कमी से मौत की अलग रिपोर्ट नहीं दी है।’

  • हालांकि मंत्री ने माना कि दूसरी लहर में आॅक्सीजन की मांग बहुत बढ़ गई थी। इसके बाद राज्यों के बीच समान वितरण के लिए केंद्र को आगे आना पड़ा।
  • पहली लहर में एक दिन में सर्वाधिक 3,095 टन आॅक्सीजन की जरूरत पड़ी थी, वहीं दूसरी लहर में यह 9,000 टन प्रतिदिन के रिकाॅर्ड स्तर तक पहुंच गई।
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