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  • Army Chief: The country's armies are secular. they even protect the human rights of the enemy.

बयान / सेना प्रमुख ने कहा- देश की सेनाएं धर्मनिरपेक्ष, अपने लोगों के साथ दुश्मन के मानवाधिकारों का संरक्षण भी करती हैं

सेना प्रमुख जनरल रावत ने कहा- सेना मानवाधिकारों की संरक्षक है। -फाइल सेना प्रमुख जनरल रावत ने कहा- सेना मानवाधिकारों की संरक्षक है। -फाइल
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सेना प्रमुख जनरल रावत ने कहा- सेना मानवाधिकारों की संरक्षक है। -फाइलसेना प्रमुख जनरल रावत ने कहा- सेना मानवाधिकारों की संरक्षक है। -फाइल

  • जनरल रावत ने कहा- स्पेशल ऑपरेशन में सामने आने वाली परिस्थितियों को देखते हुए सेना में महिलाओं की भर्ती की जा रही
  • 'आतंकवाद के खिलाफ हर ऑपरेशन के बाद 'कोर्ट आफ इन्क्वायरी' की जाती है, जिसमें सभी घटनाओं का ब्योरा रहता है'

दैनिक भास्कर

Dec 28, 2019, 09:36 AM IST

नई दिल्ली. सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने दिल्ली में हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के कार्यक्रम में कहा कि देश की सशस्त्र सेनाएं धर्मनिरपेक्ष हैं और मानवाधिकार कानूनों का पूरा सम्मान करती हैं। उन्होंने कहा- सेना अपने लोगों के साथ-साथ दुश्मन के मानवाधिकारों का भी संरक्षण करती है। युद्धबंदियों के साथ जिनेवा संधि के मुताबिक ही बर्ताव किया जाता है।

दिल्ली में एनएचआरसी के 'युद्ध के दौरान मानवाधिकारों का संरक्षण और युद्धबंदी' कार्यक्रम में जनरल रावत ने कहा, “बदलती तकनीक के साथ लड़ाई के तरीके भी बदले हैं। आतंकी हमलों के मामले में पारंपरिक लड़ाई की तरह के अंतरराष्ट्रीय कानून भी मौजूद नहीं हैं। ऐसी स्थिति में हालात पर काबू पाने के साथ-साथ लोगों का दिल जीतना भी जरूरी है। सेना खास ध्यान रखती है कि आतंकियों से मुकाबले के समय आम लोगों इसकी चपेट में न आएं।”

सेना मुख्यालय में मानवाधिकार शाखा बनाई गई
जनरल रावत ने बताया- स्पेशल ऑपरेशन में सामने आने वाली परिस्थितियों के मद्देनजर अब सेना में महिलाओं की भर्ती शुरू की जा रही है। आतंकवाद के खिलाफ हर ऑपरेशन के बाद 'कोर्ट आफ इन्क्वायरी' की जाती है, जिसमें सभी घटनाओं का ब्योरा मौजूद रहता है। सेना मुख्यालय में मानवाधिकार शाखा बनाई गई है। यहां सैन्यकर्मियों के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायत की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करती है सेना
सशस्त्र सेना विशेषाधिकार अधिनियम का जिक्र करते हुए सेना प्रमुख ने कहा- इसमें सेना को तलाशी और पूछताछ के मामले में पुलिस की तरह ही अधिकार मिले हैं। आतंकवाद रोधी अभियानों से पहले जवानों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता है। सेना इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करती है।

सेना प्रमुख के बयान पर बवाल हुआ था
सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने गुरुवार को दिल्ली के कार्यक्रम में कहा था-  ‘लीडर वह नहीं है, जो लोगों को भटकाने का काम करता है। हमने देखा है कि बड़ी संख्या में यूनिवर्सिटी और कॉलेज के छात्र आगजनी और हिंसक प्रदर्शन के लिए भीड़ का हिस्सा बन रहे हैं। इस भीड़ का एक लीडर है, लेकिन असल मायने में यह लीडरशिप नहीं है।’ सेना प्रमुख का यह बयान नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में था। सेना के राजनीतिक मसलों में शामिल होने पर बहस छिड़ गई थी। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने तो यहां तक ट्वीट कर दिया कि ‘कहीं हम पाकिस्तान के रास्ते तो नहीं चल रहे?’

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