• Hindi News
  • National
  • Article 370 ineffective entire process of partition of Jammu Kashmir and Ladakh will take a year

अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी / जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विभाजन की पूरी प्रक्रिया में अभी एक साल लगेगा

लोकसभा में मंगलवार को सांसदों ने खड़े होकर और मेज थपथपाकर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया। लोकसभा में मंगलवार को सांसदों ने खड़े होकर और मेज थपथपाकर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया।
X
लोकसभा में मंगलवार को सांसदों ने खड़े होकर और मेज थपथपाकर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया।लोकसभा में मंगलवार को सांसदों ने खड़े होकर और मेज थपथपाकर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया।

  • दोनों केंद्र शासित प्रदेशों की संपत्ति और संसाधन बांटने के लिए कमेटी बनाई जाएगी
  • इस कमेटी की रिपोर्ट पर उप राज्यपाल (एलजी) फैसला लेंगे

दैनिक भास्कर

Aug 07, 2019, 12:22 PM IST

नई दिल्ली (मुकेश कौशिक). जम्मू-कश्मीर को 2 केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) बनाने का बिल लोकसभा में भी पास चुका है। अब इस बिल पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और सरकारी गजट नोटिफिकेशन के बाद केंद्र शासित प्रदेशों के बंटवारे की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर विधान परिषद को भंग और समाप्त कर दिया जाएगा। यहां के सारे पेंडिंग बिल लैप्स हो जाएंगे। दैनिक भास्कर ने इस बिल के सभी 58 पन्नों को पढ़कर और गृह मंत्रालय में जम्मू-कश्मीर डेस्क से बात करके जाना लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के बीच अब बंटवारा कैसे होगा...

फंड का बंटवारा- आबादी और अन्य मानकों के आधार पर होगा

बंटवारे के बाद लद्दाख की राजधानी लेह होगी। हालांकि, जम्मू-कश्मीर में राजधानी को लेकर अभी अंतिम फैसला बाकी है। मौजूदा समय में जम्मू-कश्मीर में 6-6 महीने के लिए जम्मू और श्रीनगर को राजधानी माना जाता है।

राष्ट्रपति की ओर से अगली व्यवस्था होने तक वह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों ही केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल सत्यपाल मलिक ही होंगे। वह मौजूदा जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल हैं। इसकी घोषणा अभी राष्ट्रपति द्वारा की जानी है।

दोनों ही केंद्र शासित प्रदेशों के जिलों की जो सीमाएं अभी तक हैं, उनमें कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। वहीं, अब जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश को 5 लोकसभा सीटें दी गई हैं, जबकि लद्दाख के पास एक लोकसभा सीट है।

दोनों केंद्र शासित राज्यों में अलग से हाईकोर्ट नहीं बनेगा। बल्कि मौजूदा जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ही दोनों का साझा हाईकोर्ट होगा। यहीं साझा जज दोनों राज्यों से जुड़े मामले सुनेंगे। खर्चा और स्टाफ की सैलरी को दोनों जनसंख्या के आधार पर वहन करेंगे।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच संपत्ति का विभाजन केंद्र द्वारा बनाई जाने वाली कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर होगा। सरकारी नोटिफिकेशन जारी होने के एक साल के अंदर विभाजन का काम पूरा कर लिया जाएगा।

दोनों यूटी के बीच रेवेन्यू का बंटवारा उनकी जनसंख्या, वहां मौजूद रिसोर्स और अन्य जरूरी पैरामीटर्स के आधार पर होगा। इसमें रेफरेंस के तौर पर 14वें वित्त आयोग की मदद ली जाएगी। इस आधार पर 15वां वित्त आयोग दोनों राज्यों की व्यवस्था को बनाएगा।

दोनों यूटी में अधिकारियों और कर्मचारियों की तरह ही यथास्थिति के आधार पर पुलिस फोर्स इसी तरह बंटेगी। करगिल और लेह जिले की पुलिस लद्दाख में चली जाएगी। बाकी जिलों की पुलिस जम्मू-कश्मीर का हिस्सा होगी।

अभी तक जम्मू-कश्मीर को 14वें वित्त आयोग की सिफारिश पर जो फंड मिले हैं, उनका बंटवारा दोनों यूटी में आबादी और अन्य मानकों के आधार पर होगा। केंद्र सरकार बाद में लद्दाख के लिए अलग से ग्रांट और स्पेशल डेवलपमेंट पैकेज का ऐलान कर सकती है।

नोटिफिकेशन जारी होने के 90 दिन में एक या इससे ज्यादा एडवाइजरी कमेटी बनाई जाएगी। ये कमेटी दोनों राज्यों के बीच बिजली, पानी की सप्लाई से जुड़े विभाजन पर फैसला लेगी। कमेटी निगमों की संपत्ति और मौजूदा कंपनियों में से लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में क्या-क्या जाएगा, इसे भी सुनिश्चित करेगी।

देश में अब 9 केंद्र शासित प्रदेश हो जाएंगे। 7 प्रदेशों में से 5 में विधानसभा की व्यवस्था नहीं है। अब लद्दाख का यूटी मॉडल चंडीगढ़ जैसा होगा, जहां विधानसभा नहीं है। केंद्र द्वारा नियुक्त प्रशासक के अधीन यहां का संचालन किया जाएगा। लद्दाख के प्रशासक अपने क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नगर निकायों का गठन करेंगे। 

जम्मू-कश्मीर में काम कर रहे सभी प्रशासनिक अधिकारी और स्टेट कैडर से जुड़े आईएएस, आईपीएस और आईएफएस यथा स्थिति के आधार अगले आदेश तक मौजूदा जगह पर ही काम करते रहेंगे। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा का गठन होने के बाद वहां की सरकार अपने प्रशासन का गठन करेगी। 

 

DBApp

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना