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बयान / सूट-बूट वाली सरकार के ताने से कॉर्पोरेट टैक्स कटौती के फैसले में मुश्किल हुई: अरविंद सुब्रमण्यन



पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन। पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन।
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पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन।पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन।

  • पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार ने अमेरिका में एक लेक्चर के दौरान ये बात कही
  • कहा- मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में भी कॉर्पोरेट टैक्स घटाने पर विचार हुआ था
  • राहुल गांधी ने अक्टूबर 2014 में मोदी सरकार को सूट-बूट वाली सरकार कहा था

Dainik Bhaskar

Oct 12, 2019, 06:29 PM IST

प्रोविडेंस (यूएस). पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने शुक्रवार को कहा कि सरकार 4-5 साल पहले ही कॉर्पोरेट टैक्स घटाने का विचार कर रही थी, लेकिन बाद में खारिज कर दिया। सूट-बूट की सरकार वाले ताने ने भी कॉर्पोरेट टैक्स घटाने के फैसले को मुश्किल बनाया। सुब्रमण्यन ने अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी में लेक्चर के दौरान ये बात कही। बता दें कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अक्टूबर 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार को सूट-बूट वाली सरकार कहा था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले महीने कॉर्पोरेट टैक्स घटाने का ऐलान किया था।

नोटबंदी को भी बिना दूरदर्शिता वाला फैसला नहीं कह सकते: सुब्रमण्यन

  1. सुब्रमण्यन ने यूपीए-2 के कार्यकाल को पैरालाइसिस और मोदी-1 के कार्यकाल को दूरदर्शिता के साथ अतिसक्रिय बताया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की दूरदर्शिता ने लोगों को बैंक खाते, टॉयलेट, कुकिंग गैस जैसी जरूरी वस्तुएं और सेवाएं दीं। यह बात माननी चाहिए।भले ही दूसरे सुधारों को लागू करने में चुनौतियां रहीं, लेकिन दूरदर्शिता की कमी नहीं थी। यहां तक कि नोटबंदी को भी बिना दूरदर्शिता वाला फैसला नहीं कह सकते।

  2. रघुराम राजन ने सुब्रमण्यन के बयान को अजीब बताया

    आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने सुब्रमण्यन के दावे से असहमति जताई। राजन ने कहा कि नोटबंदी को दूरदर्शिता कहना अजीब बात है। हर फैसले के पीछे दूरदर्शिता होती है, लेकिन सवाल ये है कि- क्या वह दूरदर्शिता अनुकूल है? क्या वह आगे ले जाने वाली है?

  3. राजन ने इस बात पर भी चिंता जताई कि भारत में दूसरे देशों की तुलना में निवेश घट रहा है। जबकि, इस वक्त ग्रोथ बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने जीडीपी ग्रोथ पर अरविंद सुब्रमणियन के उस अध्ययन का भी जिक्र किया जिसमें ग्रोथ के आकलन पर सवाल उठाए गए थे। राजन ने ये भी कहा कि 2011 से पहले भारत में निवेश, क्रेडिट ग्रोथ और एक्सपोर्ट-इंपोर्ट पर्याप्त था। उसके बाद जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों को छोड़ सब कुछ घटता चला गया।

     

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