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अनुच्छेद 370 हटने के 2 साल:इंडस्ट्री पर नीति आते ही निवेश ने पकड़ी रफ्तार, 1548 करोड़ के 15 प्रोजेक्ट को मिली जमीन

2 महीने पहलेलेखक: मोहित कंधारी
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जम्मू-कश्मीर में उद्योग और वाणिज्य विभाग में प्रमुख सचिव रंजन प्रकाश ठाकुर के नेतृत्व में हुई उच्चस्तरीय बैठक में पिछले महीने जम्मू डिवीजन में 1548 करोड़ रुपए के 15 प्रोजेक्ट के लिए जमीन आवंटित कर दी गई। - Dainik Bhaskar
जम्मू-कश्मीर में उद्योग और वाणिज्य विभाग में प्रमुख सचिव रंजन प्रकाश ठाकुर के नेतृत्व में हुई उच्चस्तरीय बैठक में पिछले महीने जम्मू डिवीजन में 1548 करोड़ रुपए के 15 प्रोजेक्ट के लिए जमीन आवंटित कर दी गई।
  • जम्मू-कश्मीर में 20 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट मंजूरी की प्रक्रिया में, 50 हजार करोड़ के निवेश की तैयारी

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के 5 अगस्त को 2 साल पूरे हो रहे हैं। इन दो वर्षों में यहां आतंक, पत्थरबाजी और हड़तालों में आई कमी ने देशभर के निवेशकों का ध्यान खींचा है। स्थानीय प्रशासन इस मौके का फायदा उठाकर ब्रांड जम्मू-कश्मीर को भुनाने की पूरी कोशिश कर रहा है। प्रशासन ने इस साल अप्रैल में लचीली और सिंगल विंडो सिस्टम वाली नई औद्योगिक और भूमि आवंटन नीति जारी की है।

अधिकारियों की मानें तो इसका असर भी दिखने लगा है। जम्मू-कश्मीर में उद्योग और वाणिज्य विभाग में प्रमुख सचिव रंजन प्रकाश ठाकुर के नेतृत्व में हुई उच्चस्तरीय बैठक में पिछले महीने जम्मू डिवीजन में 1548 करोड़ रुपए के 15 प्रोजेक्ट के लिए जमीन आवंटित कर दी गई। इससे 5 हजार रोजगार पैदा होंगे। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में 20 हजार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट मंजूरी की प्रक्रिया में है। इससे 84 हजार रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।

ठाकुर इस उपलब्धि को कश्मीर के औद्योगिक विकास के लिए ऐतिहासिक पल मानते हैं। साथ ही, राज्य में विकास कार्यों को तेज करने के लिए जम्मू-कश्मीर में नए और पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में 3375 एकड़ से अधिक लैंड बैंक तैयार हो चुका है। उल्लेखनीय है कि नई इंडस्ट्रियल नीति 2021-30 के लिए है। इस नीति के तहत सभी तरह औद्योगिक इकाइयां 31 मार्च 2026 तक इंसेंटिव के लिए योग्य होंगी। इन इकाइयों को जीवन देने के लिए 100% एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति का इंसेंटिव मिलेगा।

प्रशासन को बड़ी संख्या में निवेशकों के आवेदन प्राप्त हो रहे हैं। इसलिए निवेश लक्ष्य 30,000 करोड़ से बढ़ाकर 50,000 करोड़ कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मीडिया को बताया कि शुरुआत में हमारा आकलन था कि राज्य को करीब 25 हजार करोड़ का निवेश मिल सकता है, लेकिन देशभर के उद्योगपतियों से मिले रेस्पांस को देखते हुए हमने लक्ष्य 40 से 50 हजार करोड़ कर दिया है।

इससे अगले कुछ वर्षों में 7-8 लाख रोजगार पैदा होंगे। उनके मुताबिक अब तक 20 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। समिति ने ऐसे प्रस्तावों को मंजूरी देना शुरू कर दिया है और कुछ को कारखाने लगाने के लिए जमीन भी दी जा चुकी है।

दो एम्स, 7 मेडिकल कॉलेज और आईटी पार्क पर काम शुरू

  • अब तक 7,111.78 करोड़ रुपए के कुल 2,357 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इनमें 1,555.16 करोड़ रुपए के 1100 प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं।
  • नवंबर 2015 में पीएम के विकास पैकेज के तहत स्वीकृत 56,261 करोड़ के 54 प्रोजेक्ट में से जून 2018 तक 7 प्रोजेक्ट पूरे हुए थे। अब 21 पूरे हो चुके हैं। 12 और इस साल पूरे हो सकते हैं।
  • 2 नए एम्स, 7 नए मेडिकल कॉलेज, 5 नए नर्सिंग कॉलेज, दो कैंसर संस्थान, जम्मू और श्रीनगर में मेट्रो, आईटी पार्क सहित 7,500 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका है।
  • राज्य में 5 प्रोजेक्ट 20 वर्ष, 15 प्रोजेक्ट 15 वर्ष व 165 प्रोजेक्ट 10 वर्ष से लंबित है। 2021-22 में 8,000 किमी सड़क बनाने का लक्ष्य था, 2,200 किमी बन चुकी है।

लद्दाख में पूर्ण राज्य व खाली पदों को भरने के लिए आंदोलन

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में भी पूर्ण राज्य की मांग तेज हो रही है। यहां लेह अपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस ने चार मांगों के लिए संयुक्त संघर्ष पर सहमति बनाई है। इसमें लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देना, एक माह में केंद्र शासित राज्य बनने पर पैदा हुए 10-12 हजार खाली पदों की भर्ती, संविधान की छठी अनुसूची या अनुच्छेद 371 के तहत संपत्ति व नौकरी पर विशेषाधिकार और कारगिल व लेह के लिए लोकसभा और राज्यसभा की दो-दो सीटें देने की मांग की गई।

इन दलों के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि लेफ्टिनेंट गवर्नर एक माह में भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं करते हैं तो आंदोलन के लिए तैयार रहें। साथ ही, लद्दाख को जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर डोमिसाइल का प्रावधान कतई मंजूर नहीं है।