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असम में भाजपा को झटका:बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट ने BJP अलायंस छोड़ा, अब कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ेगी पार्टी

गुवाहाटी8 महीने पहले
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बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट यानी BPF के चीफ हग्रमा मोहिलिरे ने सोशल मीडिया पर बीजेपी गठबंधन से अलग होने का ऐलान किया है। (फाइल) - Dainik Bhaskar
बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट यानी BPF के चीफ हग्रमा मोहिलिरे ने सोशल मीडिया पर बीजेपी गठबंधन से अलग होने का ऐलान किया है। (फाइल)

असम में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को बड़ा झटका लगा है। यहां भाजपा गठबंधन में शामिल बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट यानी BPF ने अलायंस छोड़ने का फैसला कर लिया है। BPF अब कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। इसके नेता हग्रमा मोहिलिरे ने सोशल मीडिया पर बीजेपी गठबंधन से अलग होने की जानकारी दी। असम में 27 मार्च से 6 अप्रैल के बीच तीन चरणों में चुनाव होंगे। नतीजों का ऐलान बाकी चार राज्यों के साथ 2 मई को होगा।

महाजठ में शामिल होंगे
मोहिलिरे ने शनिवार शाम सोशल मीडिया पोस्ट में कहा- विकास, शांति और एकता के लिए स्थिर सरकार जरूरी है। हम करप्शन को भी खत्म करना चाहते हैं। इसलिए बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट ने महाजठ गठबंधन में शामिल होने का फैसला किया है। अब हम भाजपा से किसी तरह की दोस्ती नहीं रखना चाहते। आने वाला चुनाव हम महाजठ गठबंधन के साथ मिलकर लड़ेंगे।

BPF का गठन 2005 में हुआ था। कोकराझार जिले में इसका प्रभाव है। पिछले चुनाव में यह पार्टी भाजपा के साथ मिलकर लड़ी थी और तब इसने 126 सदस्यीय विधानसभा में 12 सीटें हासिल की थीं।

पिछले साल आई थी रिश्तों में खटास
भाजपा और BPF के रिश्तों में पिछले साल खटास आई थी। तब बोडोलैंड टेरोटैरियल काउंसिल के चुनाव में भाजपा ने एक नया पार्टनर चुन लिया था। हालांकि, सर्बानंद सोनोवाल सरकार में BPF के तीन मंत्री हैं और BTC चुनाव में उसने सबसे ज्यादा सीटें जीती थीं। 40 मेंबर्स वाली इस लोकल बॉडी में 17 BPF मेंबर्स चुनाव जीते थे। हालांकि, भाजपा नेता और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल को जीत की बधाई दी थी, जिसने 12 सीटें जीती थीं। शाह ने इस पार्टी को अपना अहम सहयोगी बताया था।

इस महीने की शुरुआत में असम के फाइनेंस मिनिस्टर हेमंत बिस्व सरमा ने साफ कर दिया था कि भाजपा किसी भी हाल में BPF के साथ चुनावी गठबंधन नहीं करेगी। तब ही यह तय हो गया था कि BPF या तो अकेले चुनाव लड़ेगी या फिर कांग्रेस से गठबंधन करेगी।

पांच साल के लिए था गठबंधन
सरमा ने साफ कर दिया था कि BPF से गठबंधन सिर्फ पांच साल के लिए था और अब भी उनके मंत्री सरकार में है। सरमा ने इसे स्वस्थ राजनीति करार दिया था। अगर वर्तमान विधानसभा की बात करें तो भाजपा के पास 60 विधायक हैं और वो सबसे बड़ी पाटी के तौर पर सरकार चला रही है।

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