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असम / एनआरसी की अंतिम सूची आज जारी होगी, पुलिस की अपील- समाज में भ्रम पैदा करने वालों के बहकावे में न आएं

प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोगों से शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की
  • सीआरपीएफ की 55 कंपनियों को असम से कश्मीर भेजा गया था, सरकार के अनुरोध पर 51 कंपनियां फिर तैनात कीं

दैनिक भास्कर

Aug 31, 2019, 06:55 AM IST

गुवाहाटी. नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजनशिप (एनआरसी) की अंतिम सूची का प्रकाशन शनिवार को किया जाएगा। इसके बाद ही असम में 41 लाख लोगों के भाग्य का फैसला होगा कि वे देश के नागरिक हैं या नहीं। असम पुलिस और सरकार ने राज्य में लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। पुलिस प्रशासन ने लोगों से कहा है कि कुछ असामाजिक लोग एनआरसी को लेकर भ्रम फैला रहे हैं, उन पर ध्यान न दें।

 

केंद्र और राज्य सरकार ने राज्य में सुरक्षा कड़ी कर दी है। असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोगों से शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की है। कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने से पहले असम से केंद्रीय सुरक्षा बलों की 55 कंपनियों को हटाया गया था। हालांकि अब सरकार के अनुरोध पर 51 कंपनियों को तैनात किया गया है।

 

31 जुलाई को प्रकाशित होनी थी सूची
यह फाइनल एनआरसी लिस्ट 31 जुलाई को प्रकाशित होनी थी, लेकिन राज्य में बाढ़ के कारण एनआरसी अथॉरिटी ने इसे 31 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया था। इससे पहले 2018 में 30 जुलाई को एनआरसी का फाइनल ड्राफ्ट आया था। लिस्ट में शामिल नहीं लोगों को दोबारा वेरीफेकशन के लिए एक साल का समय दिया था।

 

48 साल पहले से रह रहे लोग ही सूची में शामिल होंगे
असम में 1951 के बाद पहली बार नागरिकता की पहचान की जा रही है। इसकी वजह, यहां बड़ी संख्या में अवैध तरीके से रह रहे लोग हैं। एनआरसी का फाइनल अपडेशन सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रहा है। दरअसल, 2018 में आई एनआरसी लिस्ट में 3.29 करोड़ लोगों में से 40.37 लाख लोगों का नाम नहीं शामिल था। अब फाइनल एनआरसी में उन लोगों के नाम शामिल किए जाएंगे, जो 24 मार्च 1971 से पहले असम के नागरिक हैं या उनके पूर्वज राज्य में रहते आए हैं। इसका वेरिफिकेशन सरकारी डॉक्यूमेंट्स के जरिए किया गया है।

 

फाइनल लिस्ट में नाम नहीं आने पर भी मौके मिल सकेंगे
एनआरसी अथॉरिटी के शीर्ष अधिकारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि फाइनल लिस्ट में नाम नहीं होने के बावजूद लोगों को खुद को भारतीय नागरिक साबित करने के और मौके दिए जाएंगे। ऐसे विदेशी नागरिक पहले ट्रिब्यूनल में जाएंगे, उसके बाद हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकेंगे। लोगों को राज्य सरकार भी कानूनी मदद देगी। लोगों को इस संबंध में अपील करने के लिए 120 दिन की मोहलत मिलेगी।

 

अभी, 6 डिटेंशन सेंटर में 1 हजार अवैध नागरिक रह रहे
राज्य में फिलहाल 6 डिटेंशन सेंटर चल रहे हैं। इनमें करीब एक हजार अवैध नागरिक रह रहे हैं। इनमें ज्यादातर बांग्लादेश और म्यांमार के हैं, जो देश की सीमा में बिना किसी कागजात के घुस आए या वीसा अवधि खत्म होने के बाद भी राज्य में बने रहे। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि नागरिकता खोने के बावजूद भी लोगों को डिटेंशन सेंटर नहीं भेजा जाएगा।

 

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