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किस राज्य में किसकी सत्ता:बंगाल में तीसरी बार दीदी आईं, असम में BJP की ऐतिहासिक दूसरी बार वापसी; तमिलनाडु में NDA की विदाई तो पुडुचेरी में पहली बार सरकार

नई दिल्ली11 दिन पहले

5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम लगभग अंतिम चरण में हैं। देर रात 1 बजे तक इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी, असम में सर्बानंद सोनोवाल और केरल में पिनाराई विजयन फिर से सरकार बनाने जा रहे हैं। वहीं पुडुचेरी में पहली बार NDA की सरकार बनने जा रही है। तमिलनाडु में इस बार AIDKM और BJP गठबंधन को बड़ा झटका लगा है। इस बार चुनाव में यहां DMK सरकार बना रही है। आइए एक-एक करके पांचों राज्यों का एनालिसिस करते हैं और बताते हैं कि परिणाम जारी होने के बाद अब इन राज्यों में क्या होगा...?

1. पश्चिम बंगाल : ममता चुनाव हार गईं लेकिन पार्टी की एकतरफा जीत

पश्चिम बंगाल का चुनाव इस बार काफी रोचक रहा। पहली बार TMC की सीधे BJP से टक्कर हुई। हालांकि ममता बनर्जी की पार्टी तो एकतरफा जीत गई, लेकिन खुद मुख्यमंत्री नंदीग्राम सीट से भाजपा प्रत्याशी शुभेंदु अधिकारी से करीब 1957 वोटों से चुनाव हार गईं। जहां तक पार्टी की बात है तो रात एक बजे तक यहां तृणमूल कांग्रेस बहुमत से ज्यादा सीटें जीत चुकी थी। पार्टी के प्रत्याशी यहां 201 सीटों पर विजयी हो चुके हैं, वहीं 12 सीटों पर अपनी बढ़त बनाए हुए हैं। यानी TMC की सरकार बन रही है।

वहीं राज्य में भाजपा को उम्मीद के मुताबिक जीत तो नहीं मिली, लेकिन पिछले चुनाव में 3 सीटों का आंकड़ा 77 के करीब पहुंचता दिख रहा है। BJP के 72 प्रत्याशी विजयी हुए हैं, वहीं 5 सीटों पर उसके उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं। इसी तरह CPI (M) और कांग्रेस समेत 5 अन्य दलों का गठबंधन इस बार साफ हो गया है। इन्हें एक भी सीट मिलती हुई नहीं दिख रही है। एक सीट पर इंडिपेंडेंट कैंडिडेट ने जीत हासिल की है, वहीं एक अन्य सीट पर राष्ट्रीय सेक्यूलर मजलिस पार्टी आगे चल रही है।

सबकुछ ठीक रहा तो 66 साल की ममता बनर्जी लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकती हैं। हालांकि, उन्हें फिर किसी सीट से चुनाव लड़ना पड़ सकता है। इससे पहले ममता ने 20 मई 2011 को पहली और 27 मई 2016 को दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। संभवत: ममता एक हफ्ते के अंदर ही बंगाल में नई सरकार का गठन भी कर लेंगी।

ममता ने यहां GJM, जबकि BJP ने ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन के साथ मिलकर चुनाव लड़ा है। इसी तरह CPI (M) ने कांग्रेस समेत 5 अन्य दलों के साथ गठबंधन किया था।

2. तमिलनाडु : AIADMK-BJP की सरकार आउट, DMK-INC इन हुई

जयललिता और करुणानिधि के निधन के बाद पहली बार हुए विधानसभा चुनाव में यहां बड़ा उलटफेर हुआ है। जयललिता की विरासत संभाल रहे ई पलानीसामी की कुर्सी खिसक चुकी है। पलानीसामी की पार्टी AIADMK 68 सीटों जीतती दिख रही है। पार्टी यहां 28 सीटें जीत चुकी है, वहीं 40 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, भाजपा को चार सीटें मिलने की संभावना है।

तमिलनाडु की सत्ता में DMK की 10 साल बाद वापसी हो रही है। पार्टी के नेता एमके स्टालिन पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बनेंगे। DMK ने अब तक 71 सीटें जीत ली हैं, वहीं 62 सीटों पर बढ़त कायम कर चुकी है। DMK की सहयोगी कांग्रेस को भी यहां 5 सीटों पर जीत मिली है। पार्टी 12 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। यानी 17 सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशी पकड़ बनाए हुए हैं।

जानकारों के मुताबिक, AIADMK की हार के बाद इसका निगेटिव असर पार्टी के भविष्य पर भी पड़ सकता है। पार्टी में फिर से टूट के आसार बढ़ गए हैं। जयललिता के बाद से ही AIADMK में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इस बार AIADMK और BJP मिलकर चुनावी मैदान में थे।

जयललिता की बेहद करीबी रहीं शशिकला को पार्टी के कई दिग्गज नेताओं ने मुख्यमंत्री बनने से रोका तो उनके भतीजे टीटीवी दिनाकरन ने अपनी अलग पार्टी AMMK बना ली थी। इसी तरह सरकार में डिप्टी CM रहे पनीरसेल्वम भी मुख्यमंत्री बनना चाहते थे। अब इस बार के चुनाव की हार के बाद फिर से पार्टी में टूट हो सकती है।

3. असम : सोनोवाल पर फिर भरोसा, दूसरी बार बनेंगे मुख्यमंत्री

असम में भाजपा ने ऐतिहासिक दूसरी बार वापसी की है। पार्टी को यहां 52 सीटें जीत चुकी है, वहीं 7 सीटों पर आगे है। वहीं भाजपा की सहयोगी पार्टी असम गण परिषद (AGP) 9 और यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिब्रल (UPPL) 6 सीटें जीत चुकी हैं। इस तरह असम में भाजपा गठबंधन ने एक बार फिर से सत्ता में वापसी की है।

पार्टी ने चुनाव से पहले अपने मुख्यमंत्री 59 साल के सर्बानंद सोनोवाल को सीएम फेस के तौर पर नहीं रखा था। हालांकि सबकुछ ठीक रहा तो सोनोवाल लगातार दूसरी बार यहां मुख्यमंत्री बनेंगे। अगर ऐसा होता है तो असम में पहली बार होगा जब एक ही चेहरा दूसरी बार मुख्यमंत्री पद पर काबिज होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाजपा के दूसरे नंबर के नेता हेमंत बिस्वा सरमा भी मुख्यमंत्री की रेस में हैं। 1946 से शुरू हुई असम की सियासत में अब तक कोई भी ऐसा नहीं रहा है जो दो बार मुख्यमंत्री बना हो। सोनोवाल पहली बार यहां 24 मई 2016 को मुख्यमंत्री बने थे।

वहीं, कांग्रेस की बात करें तो यहां पार्टी को गठबंधन का कुछ खास फायदा नहीं हुआ। कांग्रेस को यहां 29 सीटों पर जीत मिल सकती है। पार्टी यहां 23 सीटें जीत चुकी है, वहीं 6 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। वहीं उसके सहयोगी दल AIUDF को 16, BPF को 4, CPI(M) को एक सीट मिली है। CPI, CPI(ML), AGM और RJD के एक भी प्रत्याशी जीत नहीं सके।

BJP ने यहां असम गण परिषद (AGP) और यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिब्रल (UPPL) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। दूसरी ओर कांग्रेस ने AIUDF, BPF, CPI(M), CPI, CPI(ML), AGM और RJD के साथ मिलकर अपने कैंडिडेट्स मैदान में उतारे थे।

4. केरल : लेफ्ट पार्टियों का इकलौता राज्य सुरक्षित, विजयन दूसरी बार होंगे CM

बंगाल में सफाए के बाद लेफ्ट पार्टी एकमात्र केरल राज्य में सिमटकर रह गई है। यहां मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) ने एकतरफा जीत हासिल की है। यहां कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के साथ 12 अन्य दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा था। LDF को यहां बहुमत से कहीं ज्यादा 92 सीटों पर जीत मिली है। वहीं कांग्रेस गठबंधन को 39 सीटें मिली हैं। एनडीए का राज्य में इस बार खाता भी नहीं खुला है। अन्य के खाते में 9 सीटें गई हैं। 140 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 71 है, जिसे एलडीएफ ने आसानी से पार कर लिया है। ऐसे में प्रदेश में विजयन के नेतृत्व में एक बार फिर एलडीएफ की सरकार बननी तय है।

अगर ऐसा होता है तो 77 साल के पिनाराई विजयन लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि लेफ्ट पार्टियां किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाने पर भी विचार कर रही हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि विजयन की उम्र ज्यादा हो रही है।

दूसरी ओर कांग्रेस की अगुवाई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट का सरकार बनाने का सपना इस बार भी यहां पूरा नहीं हो पाएगा। ये लगातार दूसरी बार है जब कांग्रेस अपनी सरकार यहां नहीं बना पाएगी। इस बार BJP ने भी 5 छोटी पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी थी। हालांकि, BJP गठबंधन शुन्य पर सिमट गई। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन अपने दोनों विधानसभा क्षेत्रों मांजेश्वरम और कोन्नी से चुनाव हार गए। केरल के सीएम पिनराई विजयन धर्मादम से 50 हजार वोटों के अंतर से चुनाव जीत गए।

पलक्कड़ निर्वाचन क्षेत्र से निमोन विधानसभा सीट से एनडीए के ई श्रीधरन चुनाव हार गए हैं। उन्हें कांग्रेस के शफी परम्बिल ने 3,840 मतों से हरा दिया। केरल विधानसभा चुनाव में बीजेपी खाली हाथ रही, क्योंकि सीपीआई-एम के वी शिवंकुट्टी ने निमोम निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के मौजूदा विधायक कुम्मनम राजशेखरन को 5000 मतों के अंतर से हरा दिया।

5. पुडुचेरी : पहली बार BJP के साथ AINRC की गठबंधन सरकार बनेगी

केंद्र शासित छोटे से प्रदेश पुडुचेरी में पहली बार एनडीए की सरकार बनने जा रही है। यहां ऑल इंडिया NR कांग्रेस यानी AINRC की अगुवाई में BJP और AIDMK ने 16 सीटों पर जीत हासिल कर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। इस तरह मुख्यमंत्री का पद AINRC के अध्यक्ष एन रंगास्वामी संभालेंगे। रंगास्वामी दूसरी बार पुडुचेरी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

यहां AINRC को 10, भाजपा को पहली बार 6 सीटों पर जीत हासिल हुई है। वहीं कांग्रेस को दो और डीएमके को 6 सीटें मिली हैं। निर्दलीय प्रत्याशियों ने 6 सीटों पर विजय हासिल की। यहां इसी साल फरवरी में कांग्रेस की सरकार अल्पमत में आने से गिर गई थी। तब से यहां राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है। 2016 में यहां बहुमत हासिल कर सरकार बनाने वाली कांग्रेस इस बार काफी पिछड़ गई। पिछली बार कांग्रेस को 15 सीटें मिली थीं जो इस बार आंकड़ा 2 पर जा पहुंचा। हालांकि विपक्ष में कांग्रेस-डीएमके गठबंधन ही रहेगी। दोनों की 8 सीटे हैं, जबकि निर्दलीय 6 जीतकर आए हैं।

चुनाव नतीजे देखने के लिए यहां क्लिक करें- https://dainik-b.in/hNugEaBaAfb

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