• Hindi News
  • National
  • At the time of independence, there were 500 princely states in the country, five refused to merge

भारत / आजादी के समय देश में 500 रियासतें थी, पांच ने विलय से किया था इनकार



सरदार पटेल के साथ हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली। सरदार पटेल के साथ हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली।
X
सरदार पटेल के साथ हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली।सरदार पटेल के साथ हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली।

  • भोपाल, जूनागढ़, त्रावणकोर, जोधपुर और हैदराबाद के विलय की कहानी

Dainik Bhaskar

Aug 15, 2019, 05:24 AM IST

नई दिल्ली. आजादी के समय देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती 500 से ज्यादा रियासतों के विलय  की थी। गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल और संवैधानिक सलाहकार वीपी मेनन ने सभी रियासतों से विलय पर बातचीत शुरू की। बाकी सभी विलय के लिए तैयार हो गए पर पांच रियासतों ने विलय से इनकार किया। ये थीं- त्रावणकोर, भोपाल, हैदराबाद, जोधपुर और जूनागढ़।

 

इनकार करने वाली रियासतों में त्रावणकोर सबसे पहली रियासत थी। रियासत के दीवान और वकील सर सीपी रामास्वामी अय्यर ने विलय नहीं चाहते थे। बाद में उनके  खिलाफ लोगों ने प्रदर्शन किया।  यहां तक कि उन पर जानलेवा हमला भी हुआ। इसके बपाद वे विलय पर राजी हो गए। 

 

दूसरी तरफ भोपाल के नवाब हमीदुल्लाह खान ने मुस्लिम लीग से नजदीकी के कारण इनकार कर दिया था। वे पाकिस्तान का हिस्सा बनना चाहते थे, लेकिन भौगोलिक स्थिति और जनता के रुख के कारण यह संभव नहीं था। लंबी खींचतान के बाद विलय हुआ।  
इसी तरह जूनागढ़ के नवाब मोहम्मद महाबत खानजी तृतीय दो-राष्ट्रों के सिद्धांत के खिलाफ थे। मुस्लिम लीग के नेता सर शाह नवाज भुट्टो नवाब के मंत्रिमंडल में शामिल हो गए थे और उन पर पाकिस्तान में शामिल होने के लिए दबाव बना रहे थे। जब भारतीय नेताओं ने कड़े कदम उठाए तो  नवाब पाकिस्तान भाग गए। वल्लभभाई ने पाकिस्तान से जूनागढ़ में जनमत संग्रह कराने की मांग की। 20 फरवरी 1948 को जनमत संग्रह हुआ और 91 प्रतिशत लोगों ने भारत में शामिल होने की इच्छा जाहिर की। 


जोधपुर के महाराजा हनवंत सिंह को मोहम्मद अली जिन्ना ने कराची के बंदरगाह पर पूर्ण नियंत्रण देने का लालच दिया था। जब यह बात वल्लभभाई पटेल को पता लगी तो उन्होंने इसका तोड़ निकाला। उन्होंने जिन्ना से बड़े प्रस्ताव और भारत में रहने के फायदे बताए। यह समझाइश कामयाब रही और जोधपुर आज भारत का हिस्सा है।

 

हैदराबाद का विलय सबसे मुश्किल रहा  
हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली चाहते थे कि हैदराबाद को ब्रिटिश कॉमनवेल्थ के तहत स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किया जाए। माउंटबेटन ने कह दिया था कि यह संभव नहीं है। उधर, जिन्ना निजाम का खुलकर समर्थन कर रहे थे। 13 सितंबर 1948 को भारतीय सेना ‘ऑपरेशन पोलो’ के तहत हैदराबाद पहुंची। चार दिन के संघर्ष के बाद निजाम ने हथियार डाल दिए। हैदराबाद का भारत में विलय हो गया।

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना