आंकड़े / पिछले दो साल में एटीएम 3% कम हुए लेकिन एटीएम से लेनदेन 21% बढ़े

Dainik Bhaskar

May 16, 2019, 08:40 AM IST


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  • आरबीआई के आंकड़ों से यह पचा चला, ऑपरेटर्स को कम फीस मिलना बड़ी वजह 
  • आरबीआई ने सिक्योरिटी के नियम सख्त किए, इससे ऑपरेटर्स के लिए अपग्रेड करने का खर्च बढ़ा

नई दिल्ली. नवंबर 2016 की नोटबंदी के बाद सरकार डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा दे रही है। लेकिन लोगों के बीच नकदी पर निर्भरता अभी कम नहीं हुई है। बल्कि एटीएम से लेनदेन तेजी से बढ़े हैं। वहीं, दूसरी तरफ पिछले दो साल में एटीएम की संख्या घटी है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 2017 में देश में 208,354 एटीएम थे। मार्च 2019 में ये 3% घटकर 202,196 रह गए। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक इसकी मुख्य वजह एटीएम के लिए सख्त नियमों का लागू होना है। इससे एटीएम ऑपरेटरों के लिए संचालन महंगा हो गया है।

देशभर में दो साल में 6,158 एटीएम बंद कर दिए गए

  1. आईएमएफ के मुताबिक ब्रिक्स देशों में प्रति एक लाख लोगों पर भारत में पहले से ही सबसे कम एटीएम हैं। रिजर्व बैंक ने एटीएम की सुरक्षा के लिए सख्त नियम बनाए हैं उससे ऑपरेटरों के लिए मशीन व सॉफ्टवेयर अपग्रेड का खर्च उठाना भारी पड़ रहा है। कनफेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री ने पिछले साल कहा था कि 2019 की शुरुआत में 1.13 लाख एटीएम बंद हो सकते हैं।

  2. वर्ष एटीएम की संख्या
    मार्च 2016 199,099
    मार्च 2017 208,354
    मार्च 2018 207,052
    मार्च 2019 202,196

    (स्रोत: आरबीआई)

  3. मोबाइल बैंकिंग में 65 गुना बढ़ोतरी हुई

    एसबीआई के एमडी दिनेश कुमार खारा ने कहा, डिजिटलीकरण से बैंकिंग में आने वाले बदलाव के मद्देनजर शाखाओं पर निर्भरता कम करेंगे। एटीएम घटने से मोबाइल बैंकिंग को बढ़ावा मिलेगा। भारत में युवा आबादी के बीच डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ रहा है। मोबाइल बैंकिंग लेनदेन की संख्या में पिछले 5 साल में 65 गुना इजाफा हुआ है।

  4. एटीएम उपलब्धता में भारत ब्रिक्स देशों में सबसे पीछे

    रूस 164
    ब्राजील 107
    चीन 81
    दक्षिण अफ्रीका 68
    भारत 22

    (स्रोत: आईएमएफ)

  5. एटीएम ऑपरेटर्स को हर निकासी पर मिलते हैं 15 रुपए

    एटीएम सिक्यूरिटी का खर्च बढ़ने से एटीएम ऑपरेटरों के लिए कारोबार में बने रहना मुश्किल हो गया है। उन्हें आमदनी फीस के रूप में होती है जो बहुत कम है। ऑपरेटर को एटीएम से डेबिट/क्रेडिट कार्ड से होने वाली हर निकासी पर संबंधित बैंक से इंटरचेंज फीस 15 रुपए मिलते हैं। रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर आर गांधी कहते हैं कि एटीएम की संख्या घटने की मुख्य वजह इंटरचेंज फीस ही है। बैंक यह फीस देना पसंद करते हैं क्योंकि यह खुद एटीएम ऑपरेट करने से ज्यादा सस्ता पड़ता है।

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