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अगस्ता वेस्टलैंड घूसकांड / फंस चुके 2 विदेशी कंपनियों के मालिक, 3 विदेशी दलाल और वायु सेना प्रमुख त्यागी



Augusta Westland bribe case
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Augusta Westland bribe case

  • यूपीए सरकार ने ब्रिटेन की कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड से हेलिकॉप्टर खरीदी का सौदा पक्का किया
  • इटली की जांच एजेंसियों ने सौदे में घूसखोरी के आरोप लगाए और सौदा विवादों में घिर गया

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 06:34 AM IST

दिल्ली. भारत की गिरफ्त में आए अगस्ता के दलाल क्रिश्चियन मिशेल से जांच एजेंसियों को नए खुलासों की उम्मीद है। मगर बवाल तो उसेे भारत लाते ही शुरू हो चुका है। जानिए इसकी वजह और वो सब जो आप जानना चाहते हैं। 

 

अभी इसलिए चर्चा में है :
यूएई से भारत लाए गए दलाल क्रिश्चियन मिशेल से पूछताछ पर देशभर की निगाहें इसलिए भी टिकी हैं कि घूसकांड से तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का नाम भी जोड़ा जाता रहा है। बीते मंगलवार राजस्थान में हुई एक चुनावी रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मामले से जोड़कर सोनिया के नाम का जिक्र किया है। तभी से मुद्दे पर राजनीति भी गरमा गई है।

 

इस बार कांग्रेस को घेरने का एक और मौका भाजपा के हाथ तब लगा जब यूथ कांग्रेस के लीगल सेल से जुड़े अल्जो के. जोसेफ स्पेशल सीबीआई कोर्ट में मिशेल के वकील बनकर पेश हुए। जब इस पर विवाद बढ़ा तो कांग्रेस ने जोसेफ को पार्टी से निकाल दिया।
 

8 साल पुराना सौदा है इस फसाद की जड़ :
फरवरी 2010 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने ब्रिटेन की कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड से हेलिकॉप्टर खरीदी का सौदा पक्का किया था। इसके तहत भारतीय वायु सेना के लिए 12 एडब्ल्यू101 हेलिकॉप्टर खरीदे जाना तय हुआ। ये हेलिकॉप्टर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा वीवीआईपी रुतबा रखने वाले लोगों को यात्रा करवाने के लिए थे। सौदा 556 मिलियन यूरो यानी करीब 3546 करोड़ रुपए का था।

 

फरवरी 2012 में इन हेलिकॉप्टरों की डिलीवरी शुरू हो गई, 3 हेलिकॉप्टर भारत को मिल भी गए। मगर इसी बीच इटली की जांच एजेंसियों ने सौदे में घूसखोरी के आरोप लगाए और सौदा विवादों में घिर गया। इटली की जांच एजेंसियां इसलिए सतर्क हुईं कि अगस्ता वेस्टलैंड जिसका हेडक्वॉर्टर ब्रिटेन में है, उसकी पैरेंट कंपनी फिनमैकेनिका इटली की ही है। कुछ ही महीने बाद यहां की जांच एजेंसियों ने गुइदो हाश्के नामक एक शख्स को गिरफ्तार किया। उस पर आरोप थे कि उसने भारत से सौदा पक्का करवाने के एवज में 5.1 करोड़ यूरो यानी करीब 357 करोड़ रुपए लिए थे। 

 

फरवरी 2013 में इटली पुलिस ने फिनमैकेनिका के पूर्व चेयरमैन ग्यूसेप ओरसी और अगस्ता वेस्टलैंड के सीईओ ब्रूनो स्पैग्नोलिन को भी गिरफ्तार किया, उन पर हाश्के सहित कुछ और दलालों को घूस देने के आरोप लगे। (हालांकि, जनवरी 2018 में इटली की कोर्ट दोनों को आरोपों से बरी कर चुकी है।) इनकी गिरफ्तारी के हफ्तेभर में ही भारत में सौदे में भ्रष्टाचार का मुद्दा तूल पकड़ने लगा और तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी ने मामले की सीबीआई जांच के आदेश दे दिए। सौदा भी रद्द कर दिया। रक्षा मंत्री के आदेश के दो ही सप्ताह के भीतर सीबीआई ने 11 लोगों की गतिविधियों की जांच शुरू कर दी। इन लोगों में पूर्व एयर चीफ मार्शल शशीन्द्र पाल त्यागी भी शामिल था।

 

6 सवालों से जानिए क्या है पूरा विवाद : वायु सेना प्रमुख ने कैसे पहुंचाया अगस्ता को फायदा और आरोपों में क्यों घिरी हुई है कांग्रेस?

 

1. किन हेलिकॉप्टर्स की थी जरूरत?

1999 में एमआई-8 हेलिकॉप्टर के पुराने हो जाने पर भारतीय वायु सेना को वीवीआईपी शख्सियतों के लिए नए हेलिकॉप्टर की जरूरत महसूस होने लगी थी। वह कारगिल युद्ध के बाद का दौर था और बेहद सक्रिय रहने वाले रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीज हर दो माह में सियाचिन का दौरा कर रहे थे। एेसे में प्रस्ताव रखा गया कि नए हेलिकॉप्टर 6 हजार मीटर तक ऊंचा उड़ने में सक्षम हों। मगर तब सिर्फ एक कंपनी के आगे आने पर तत्कालीन एयर चीफ मार्शल एस कृष्णास्वामी ने डील को आगे नहीं बढ़ाया। नए सिरे से प्रयास शुरू हुए तो प्रधानमंत्री को सुरक्षा देने वाली एसपीजी ने प्रस्ताव रखा कि हेलिकॉप्टर की सीलिंग इतनी ऊंची हो कि अंदर कोई व्यक्ति खड़ा भी हो सके। तब ऊंचाई और सीलिंग की शर्तों को देखते हुए तीन कंपनियां बोली लगाने आईं। इनमें अगस्ता वेस्टलैंड भी थी।

 

2. अगस्ता के लिए कैसे आसान हुआ सौदा?

  •  त्यागी ने नई शर्त जोड़ीः यह वो समय था जब त्यागी एयर चीफ मार्शल बनने वाले थे। तभी उन्होंने सौदे में कम से कम दो इंजिन वाले हेलिकॉप्टर की शर्त और जोड़ दी। यह शर्त अगस्ता वेस्टलैंड के पक्ष में गई। 
  •  उड़ने की क्षमता घटाईः 2004 में वाजपेयी सरकार गई और यूपीए सत्ता में आ गई। कुछ समय बाद त्यागी भी एयर चीफ मार्शल हो गए। मार्च 2005 में वायु सेना ने विमान के ऊंचा उड़ने की शर्त को 6 हजार मीटर से घटाकर 4500 मीटर कर दिया। 
  •  भारत में नहीं किया परीक्षणः सौदे की दौड़ में शामिल आधा दर्जन कंपनियां में से दो को शाॅर्टलिस्ट किया गया। एक अगस्ता, दूसरी अमेरिकी कंपनी साइकोरस्की। इनके हेलिकॉप्टर्स का ट्रायल अमेरिका और ब्रिटेन में हुआ। नियम के खिलाफ भारत में इनका परीक्षण नहीं हुआ। 
  •  आठ हेलिकॉप्टर्स से बढ़ाकर 12 की मांगः भारतीय वायु सेना ने आठ वीवीआईपी हेलिकॉप्टर्स का प्रस्ताव वाजपेयी सरकार को दिया था। मगर बाद में त्यागी ने 12 हेलिकॉप्टर की जरूरत बताई। 
  •  जो खरा उतरा, उसे नकाराः साइकोरस्की सभी परीक्षणों पर खरा उतरा था। मगर  2007 में त्यागी के रिटायर होने तक अगस्ता से सौदा लगभग पक्का हो चुका था। तीन साल के मोलभाव के बाद 2010 में अगस्ता से सौदा कर लिया गया। 

3. त्यागी पर क्या हैं आरोप?

सीबीआई के मुताबिक त्यागी ने दलाल के जरिए कंपनी से घूस लेकर कॉन्ट्रैक्ट में बदलाव किया। 2014 में प्रवर्तन निदेशालय ने चंडीगढ़ में फर्जी टेक-कंपनी चलाने वाले वकील गौतम खेतान को गिरफ्तार किया। उस पर अगस्ता मामले में घूस की राशि कंपनी के खातों में डलवाने के आरोप लगे। खेतान के तार त्यागी परिवार से जुड़े पाए गए। आरोप हैं कि दलाल हाश्के ने त्यागी को उसके चचेरे भाई-बहन जूली, संदीप, डोस्का त्यागी तथा वकील के माध्यम से घूस दी है। सितंबर 2017 में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की। दिसंबर में त्यागी गिरफ्तार हुआ, लेकिन जमानत मिल गई।

 

4. सौदे की दलाली में और कौन-कौन शामिल?

 

  • गुइदो राल्फ हाश्के: इटली की पुलिस और सीबीआई ने इसी का नाम त्यागी से बार-बार जोड़ा है। वह अमेरिका में जन्मा इटली का नागरिक है, स्विट्जरलैंड में रह रहा था। अगस्ता ने भारत से सौदे के लिए हाश्के की सेवाएं ली थीं। 2012 में इटली पुलिस ने उसे स्विट्जरलैंड से गिरफ्तार किया। भारत में वह उस पत्र से चर्चा में आया था, जो कथित तौर पर उसने हाल ही में भारत लाए गए मिशेल को लिखा था। पत्र में संकेतों में कई भारतीय राजनेताओं के भी नाम थे।
  • कार्लो गेरोसा: 70 वर्षीय गेरोसा भी बिचौलिया है। अक्टूबर 2017 में भारत के इंटरपोल नोटिस के बाद इटली पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था, लेकिन जल्द ही छोड़ दिया। जून में इटली उसे भारत को सौंपने से इनकार भी कर चुका है। आरोप है कि गेरोसा ने त्यागी के चचेरे भाई से मिलकर सौदे की शर्तों में हेरफेर करवाया था।
  • क्रिश्चियन जेम्स मिशेलः भारत की गिरफ्त में आया 57 वर्षीय मिशेल ब्रिटिश नागरिक है। अगस्ता वेस्टलैंड चाहती थी कि मिशेल यूपीए सरकार को तथा भारतीय वायु सेना के अधिकारियों को प्रभावित करे। इसके बदले मिशेल ने दो करार किए। पहला 240 करोड़ रुपए का अपने लिए। दूसरा 225 करोड़ रुपए का घूस बांटने के लिए। बताते हैं कि मिशेल 2002 से इस सौदे के प्रयास कर रहा था। डील के दौरान वह 25 बार भारत आया। इंटरपोल नेटिस के बाद फरवरी 2017 में उसे यूएई में हिरासत में ले लिया। पूछताछ में पता चला कि उसने अपनी दुबई स्थित फर्म की मदद से घूस का पैसा भारत भेजा है। सितंबर 2018 में दुबई की कोर्ट ने उसे भारत प्रत्यर्पित करने की इजाजत दी।

5. सोनिया का नाम क्यों लिया जा रहा?

दलाल मिशेल द्वारा कथित तौर पर लिखा एक पत्र इसकी वजह है। बताते हैं कि मार्च 2008 में यह पत्र उसने अगस्ता के भारतीय प्रमुख को लिख था। कहा था कि- सोनिया गांधी इस सौदे की ड्राइविंग फोर्स हैं। आगे से वे एम18 में उड़ान नहीं भरेंगी। पत्र में और भी कई राजनेताओं को लेकर ब्रिटिश उच्चायोग से कहा गया कि इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा मिलान की अपीली कोर्ट ने अपने फैसले में बिचौलियों की जिस बातचीत का जिक्र किया है, उसमें ‘एपी’ व ‘फैमिली’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल है। आरोप हैं कि एपी का अर्थ अहमद पटेल तथा फैमिली का अर्थ सोनिया गांधी और उनका परिवार है। हालांकि मिशेल लगातार कह रहा है कि सीबीआई ने उस पर पूछताछ के दौरान सोनिया का नाम लेने का दबाव बनाया था। पूर्व एयर चीफ मार्शल त्यागी भी सीबीआई द्वारा निर्दोषों के नाम लेने के दबाव की बात मीडिया के सामने कह चुका है।

 

6. तब यूपीए सरकार ने क्या किया था?

तब रक्षा मंत्री रहे एके एंटनी के अनुसार मामला सामने आने के बाद ही यूपीए सरकार ने सीबीआई जांच शुरू करवा दी थी। 12 फरवरी 2013 को सीबीआई जांच शुरू हुई और 1 जनवरी 2014 को अगस्ता से सौदा रद्द कर दिया गया। तीन हेलिकॉप्टर जो मिल चुके थे, वे जब्त कर लिए। अगस्ता को किए गए 1620 करोड़ रुपए के भुगतान के बदले बैंक गारंटी के तौर पर रखे 2062 करोड़ रुपए सरकार ने हासिल कर लिए। अगस्ता पर शर्तों के उल्लंघन के लिए 3 हजार करोड़ रुपए का दावा भी कर रखा है।     

 

 

आगे यह होगा- 

मनी लॉण्डरिंग की जांच में घिर सकते हैं कई नेता, अफसर और उद्योगपति : 

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट विराग गुप्ता कहते हैं कि मिशेल मनी लॉण्डरिंग से जुड़े अपराध में घिर सकता है। क्योंकि उसकी दुबई स्थित कंपनी से लेन-देन की बात सामने आई है। यदि मिशेल के बयान के आधार पर लेन-देन वाले खातों की जांच की जाए और सबूत मिलें तो कई नेता, अफसर और उद्योगपति घेरे में आ सकते हैं। हालांकि मिशेल पर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का अपराध साबित करना मुश्किल होगा। इसलिए कि 3,600 करोड़ रुपए के इस सौदे में से लगभग 1,600 करोड़ रुपए का पेमेंट ही अगस्ता को दिया गया था। जबकि लगभग 2 हजार करोड़ की रिकवरी सरकार ने कर ली है। यानी सरकारी खजाने को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंची है। फिर अगर दलाली का पैसा विदेशी कंपनी का था, तो मिशेल पर भारत में अपराध कैसे बनता है? 

 

आगे चलकर मिशेल को जमानत मिलती है तो भी दिक्कतें हो सकती हैं। जमानत के बाद क्या उसे विदेश जाने की अनुमति मिलेगी। अगर मिलती है तो उसके लौटने की गारंटी क्या होगी? 
 

इधर, ब्रिटेन के उच्चायोग ने भारत सरकार को चिट्ठी लिख अनुरोध किया है कि ब्रिटिश नागरिक मिशेल को उनके राजनयिक से मिलने दिया जाए। मिशेल को कानूनी मदद देने उसकी वकील रोजमैरी पातरेजी ने भारतीय वीजा के लिए आवेदन किया है। मिशेल की जमानत के लिए उनकी तरफ से कोर्ट में अर्जी लगाई जाएगी।

 

असरः कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ेंगी-

  • राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पिछले कुछ महीनों से मोदी सरकार को रफाल डील पर घेर रही है। मगर अब मिशेल के प्रत्यर्पण में सफलता मिलने के बाद भाजपा इस मुद्दे को सामने रखकर रफाल पर विवाद को बेअसर करने का प्रयास करेगी। कोशिश करेगी कि 2019 के लोकसभा चुनावों तक इस मुद्दे को ठंडा न होने दिया जाए।
  • एक्सपर्ट कहते हैं कि यह भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता है। इसी को आगे बढ़ाते हुए अगर मामले की गहराई से जांच की जाए तो हथियारों के सौदे में दलाली के नेटवर्क को तोड़ा जा सकता है।
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