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विवाद / मोदी को डिवाइडर इन चीफ बताने वाले आतिश तासीर से भारत की विशेष नागरिकता छिनी



आतिश तासीर (बाएं) ने टाइम मैगजीन में प्रधानमंत्री मोदी को डिवाइडर इन चीफ बताया था। आतिश तासीर (बाएं) ने टाइम मैगजीन में प्रधानमंत्री मोदी को डिवाइडर इन चीफ बताया था।
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आतिश तासीर (बाएं) ने टाइम मैगजीन में प्रधानमंत्री मोदी को डिवाइडर इन चीफ बताया था।आतिश तासीर (बाएं) ने टाइम मैगजीन में प्रधानमंत्री मोदी को डिवाइडर इन चीफ बताया था।

  • गृह मंत्रालय ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा था कि तासीर ने अपने पिता के पाकिस्तानी होने की जानकारी छिपाई
  • कांग्रेस नेता शशि थरूर ने ट्वीट कर कहा- क्या हमारी सरकार इतनी कमजोर है कि एक पत्रकार से डरने लगी

Dainik Bhaskar

Nov 08, 2019, 12:50 PM IST

नई दिल्ली. इस साल आम चुनाव से ठीक पहले टाइम मैगजीन के लेख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने वाले आतिश तासीर से भारत की विशेष नागरिकता छीन ली गई है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार रात ट्वीट कर कहा कि तासीर 1955 के नागरिकता कानून के तहत ओवरसीज सिटिजनशिप ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड रखने के लिए अयोग्य हैं। उन्होंने इसके लिए आधारभूत जरूरतें पूरी नहीं कीं और कुछ जानकारियां छिपाईं। तासीर ने यह जानकारी नहीं दी कि उनके पिता एक पाकिस्तानी नागरिक हैं। 

 

इस पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सरकार की आलोचना करते हुए ट्वीट किया। उन्होंने कहा, “सरकार के एक आधिकारिक प्रवक्ता को गलत दावा करते देखना दर्दनाक है। ऐसा दावा जिसका आसानी से खंडन किया जा सकता है। ज्यादा दुखद यह है कि एक लोकतंत्र में ऐसा हो रहा है। क्या हमारी सरकार इतनी कमजोर है कि एक पत्रकार से डरने लगी।’’ 

 

क्या है ओवरसीज सिटिजनशिप ऑफ इंडिया? 
नागरिकता कानून के तहत भारत में दोहरी नागरिकता मान्य नहीं है। हालांकि, लगातार उठती मांगों के बाद इसके विकल्प के तौर पर ओवरसीज सिटिजनशिप ऑफ इंडिया कार्ड शुरू किया गया था। इसके जरिए भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों को भारत में बिना वीजा आने और अनिश्चितकाल तक काम करने की अनुमति मिल जाती है। आतिश तासीर भी ओसीआई कार्डधारक थे। 

 

विदेश मंत्रालय के ट्वीट पर तासीर ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय ने कहा कि तासीर को जवाब देने के लिए पूरा समय दिया गया। हालांकि, तासीर ने ट्वीट कर इसे झूठा दावा बताया। उन्होंने कान्स्युल जनरल के ईमेल की फोटो पोस्ट की और जवाब में लिखा, “मुझे प्रतिक्रिया देने के लिए 21 दिन का नहीं बल्कि सिर्फ 24 घंटे का समय दिया गया। इसके बाद से ही मंत्रालय ने मेरी बातों का जवाब नहीं दिया।” 

 

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