• Hindi News
  • National
  • Ayodhya Ram Mandir; Supreme Court 3rd Day, 8 August Hearing Ram Janmabhoomi Babri Masjid Land Dispute Case News Updates

अयोध्या / रामलला विराजमान की दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- जन्मस्थल को पक्षकार कैसे बनाया जा सकता है

Ayodhya Ram Mandir; Supreme Court 3rd Day, 8 August Hearing Ram Janmabhoomi Babri Masjid Land Dispute Case News Updates
X
Ayodhya Ram Mandir; Supreme Court 3rd Day, 8 August Hearing Ram Janmabhoomi Babri Masjid Land Dispute Case News Updates

  • सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या जमीन विवाद मामले को लेकर गुरुवार को तीसरे दिन सुनवाई
  • निर्मोही अखाड़े ने बुधवार को कहा था- 2.77 एकड़ भूमि के दस्तावेज डकैती में खो गए

दैनिक भास्कर

Aug 08, 2019, 04:25 PM IST

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या भूमि विवाद मामले में गुरुवार को तीसरे दिन सुनवाई हुई। इस दौरान रामलला विराजमान के वकील ने जन्मस्थली के पक्ष में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने दलीलें पेश कीं। बेंच ने पूछा कि एक देवता के जन्मस्थल को न्यायक पाने का इच्छुक कैसे माना जाए, जो इस केस में पक्षकार भी हो। इस पर वकील ने कहा कि हिंदू धर्म में नदियों और सूर्य की पूजा होती है और उनके उद्गम स्थलों को पहले भी इसी तरह से देखा गया है।

 

बेंच ने कहा कि जहां तक हिंदू देवी-देवताओं का सवाल है, अब तक उन्हें न्यायिक व्यक्ति के तौर पर देखा गया है। जो संपत्तियों के स्वामी और किसी मुकदमे में पक्षकार बनाए जा सकते हैं। इस पर वकील के.पारासरन ने कहा- ''हिंदू धर्म में किसी स्थान को पवित्र मानने और पूजा करने के लिए मूर्तियों की आवश्यकता नहीं है। नदियों और सूर्य की भी पूजा की जाती है और उनके उद्गम स्थलों को न्याय पाने के इच्छुक के तौर पर देखा जाता है।'' वकील ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले का जिक्र किया। जिसमें गंगा नदी को न्यायिक ईकाई मानते हुए केस दायर करने के योग्य माना गया था।

 

जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान होती है: वकील

पारासरन ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने विवादित भूमि को अटैच करते वक्त रामलला विराजमान को पक्षकार नहीं बनाया था। वकील ने जन्मभूमि की महत्ता बताने के लिए संस्कृत का श्लोक 'जननी जन्मभूमि....' का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान होती है। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़ा की ओर से दायर याचिकाएं एक दूसरे जुड़ी हुई हैं। ऐसे में अगर एक को अनुमति दी जाती है तो दूसरी अपने आप केस में शामिल हो जाएगी। 

 

अयोध्या मामले में अब तक क्या हुआ?

  • मध्यस्थता पैनल द्वारा मामले का समाधान नहीं निकलने के बाद कोर्ट 6 अगस्त से सुनवाई कर रहा है। यह नियमित सुनवाई तब तक चलेगी, जब तक कोई नतीजा नहीं निकल जाता।
  • मंगलवार को सुनवाई के पहले दिन निर्मोही अखाड़ा ने पूरी 2.77 एकड़ विवादित जमीन पर अपना दावा किया। कहा था कि पूरी विवादित भूमि पर 1934 से ही मुसलमानों को प्रवेश की मनाही है।
  • बुधवार को बेंच ने पक्षकार निर्मोही अखाड़े से संबंधित 2.77 एकड़ भूमि के दस्तावेज पेश करने को कहा था। इस पर अखाड़े ने कहा था कि 1982 में वहां डकैती हुई, जिसमें सभी दस्तावेज खो गए।

 

मार्च में बनाया था मध्यस्थता पैनल
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 8 मार्च को इस मामले को बातचीत से सुलझाने के लिए मध्यस्थता पैनल बनाया था। इसमें पूर्व जस्टिस एफएम कलीफुल्ला, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर, सीनियर वकील श्रीराम पंचू शामिल थे। हालांकि, पैनल मामले को सुलझाने के लिए किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका। इस पर सुप्रीम कोर्ट 6 अगस्त से नियमित को तैयार हुआ था।

 

हाईकोर्ट ने विवादित जमीन को 3 हिस्सों में बांटने के लिए कहा था
2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दाखिल की गई थीं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अयोध्या का 2.77 एकड़ का क्षेत्र तीन हिस्सों में समान बांट दिया जाए। पहला-सुन्नी वक्फ बोर्ड, दूसरा- निर्मोही अखाड़ा और तीसरा- रामलला विराजमान।

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना