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अयोध्या विवाद / फैसले की आहट से ठीक पहले अयोध्या में क्या चल रहा है?



अयोध्या स्थित कार्यशाला में रखे पत्थर। यहां दो माह से काम बंद है। विहिप के मुताबिक 65% निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अयोध्या स्थित कार्यशाला में रखे पत्थर। यहां दो माह से काम बंद है। विहिप के मुताबिक 65% निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
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अयोध्या स्थित कार्यशाला में रखे पत्थर। यहां दो माह से काम बंद है। विहिप के मुताबिक 65% निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।अयोध्या स्थित कार्यशाला में रखे पत्थर। यहां दो माह से काम बंद है। विहिप के मुताबिक 65% निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।

  • 70 साल पुराने विवाद की 17 अक्टूबर तक सुनवाई
  • 17 नवंबर को रिटायर होंगे सीजेआई, इससे पहले निर्णय संभव
  • सुरक्षा: संवेदनशील इलाकों में पुलिस, वहीं मंदिर का माॅडल देखने वाले डेढ़ गुना बढ़े
  • माहौल: दिवाली की धूम, 5 लाख से अधिक दीपों से जगमग होगी अयोध्या

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2019, 12:29 AM IST

अयोध्या (धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया). राम जन्मभूमि, हनुमान गढ़ी, भरत निवास, सीता राजमहल जैसे प्रमुख मंदिरों वाले मोहल्ले रामकोट में भारी सुरक्षा इंतजाम हैं। हर गली के छोर पर बैरिकेट लगे हैं और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है। श्रीसीता राजमहल मंदिर के मुख्य महंत श्याम बिहारी दास अपनी सूनी धर्मशाला और रेस्त्रां दिखाते हुए कहते हैं कि जल्द फैसला आ जाएगा तो यहां रौनक रहेगी। लेकिन अभी तो हमारे श्रद्धालु और यहां आने वाले लोग परेशान हैं। 


अयोध्या के कारसेवक पुरम में रखे गए मंदिर के मॉडल को देखने आने वालों की संख्या में इजाफा हो गया है। यहां रखा राम मंदिर का मॉडल 21 फीट लंबा, 11 फीट चौड़ा और 9 फीट ऊंचा है। विश्व हिंदू परिषद की अयोध्या में इसी मॉडल के आधार पर भव्य राम मंदिर निर्माण की योजना है। विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा कहते हैं कि पहले कारसेवक पुरम में प्रतिदिन औसतन करीब 400 लोग आते थे लेकिन बीते एक माह से यह औसत 600 से भी अधिक हो गया है।

 

पहले कार्यशाला में खंभे-शिलाओं के साथ रखे छोटे मॉडल को देखकर ही लोग चले जाते थे लेकिन अब वे यहां तक भी आते हैं। शर्मा कहते हैं कि जैसे-जैसे सुनवाई पूरी हो रही है, लोगों को लगता है कि फैसला मंदिर के पक्ष में आएगा। ऐसे में वे देखना चाहते हैं कि असली मंदिर कैसा होगा। ऐसे ही आने वालों में शामिल हैं हाथरस जिले के शादाबाद के रहने वाले 71 वर्षीय गजराज सिंह परमार। परमार राम मंदिर के मॉडल को निहारते हैं। उसके किनारों को श्रद्धा से छूते और माथा टेकते हैं। परमार कहते हैं कि मंदिर तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बनेगा, लेकिन तब तक इसी को देख लें क्योंकि अब आ पाएं या न आ पाएं।


अयोध्या में इस समय हर प्रमुख बाजार, मंदिर-मठ और घरों में चर्चा के दो ही विषय हैं। पहला, आने वाली दीपावली को रखे जाने वाले दीपकों की संख्या और तैयारियां। दूसरी सुप्रीम कोर्ट में 17 अक्टूबर तक पूरी होने वाली सुनवाई व फैसले का पूर्वानुमान। मंदिर मामले से जुड़े महंत और हिंदू पक्ष के लोगों को लगता है कि सुप्रीम कोर्ट उनके दिए गए अकाट्य तथ्यों के आधार पर मंदिर के पक्ष में फैसला देगा। वहीं मुस्लिम पक्ष के लोग कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला देगा हमें मंजूर होगा, लेकिन अब फैसला जल्द आ जाए।

 

अयोध्या के वासुदेव घाट में रहने वाले रमेंद्र मोहन मिश्रा कहते हैं कि अब अच्छा लग रहा है कि जल्द ही कोर्ट अंतिम फैसला सुना देगा और अयोध्या का 70 साल पुराना कानूनी विवाद खत्म हो जाएगा। भव्य मंदिर बनेगा तो अयोध्या के हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। कोर्ट में मुख्य पक्षकार श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष की ओर से अकाट्य तथ्य और सुबूत दिए हैं। मंदिर के अतिरिक्त न कोई विकल्प है और न ही कोई रास्ता। केंद्र में मोदी हैं और राज्य में योगी, मंदिर अब नहीं बनेगा तो कब बनेगा। 

 

वहीं दिगंबर अखाड़े के प्रमुख महंत सुरेश दास कहते हैं कि जिस प्रकार रामजन्मभूमि का फैसला 2010 में आया उसी प्रकार सुप्रीम कोर्ट मंदिर निर्माण के पक्ष में फैसला देगा, यही हमें भरोसा है। 65 एकड़ भूमि में भव्य मंदिर बनेगा। वे पूछते हुए कहते हैं कि भगवान राम का मंदिर अयोध्या में नहीं बनेगा तो क्या पाकिस्तान में बनेगा। वहीं एक भंडारे से होकर लौट रहे मुस्लिम पक्ष के मुख्य पक्षकार 53 वर्षीय इकबाल अंसारी कहते हैं कि हमारी कोई उम्मीद या नाउम्मीदी जैसी बात नहीं है। बस अब कोर्ट फैसला दे दे। कोर्ट जो कहेगा हम मानेंगे। पूरी दुनिया देख रही है। अयोध्या में किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं है।

 

पुलिस सुरक्षा में बात करते इकबाल कहते हैं कि मेरी दो टैक्सी गाड़ी हैं और मैकेनिक की दुकान है जिसे मेरे चार बेटे संभालते हैं। 2010 में भी जब फैसला आया था तब मेरे पिता हाशिम अंसारी ने फैसले को चुनौती नहीं दी थी। वहीं एक अन्य मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब कहते हैं कि यह मिल्कियत का मामला है और हमें लगता है कि कोर्ट हमारे पक्ष में फैसला देगा। सामाजिक कार्यकर्ता बबलू खान ने हाल ही में सैकड़ों मुस्लिमों को साथ लेकर कार्यशाला में रखे पत्थरों को साफ किया। बबलू कहते हैं कि अयोध्या में सिर्फ मंदिर ही बनना चाहिए। देश भले ही राम मंदिर के फैसले को लेकर बातें कर रहा हो, लेकिन अयोध्या में कोई चिंता नहीं है। लोग सामान्य जिंदगी जी रहे हैं। 

 

वाहनों के लिए पीले कार्ड जारी
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अंतिम चरण में होने और फैसले की संभावित तिथि पास आने के मद्देनजर सुरक्षा कड़ी की जा रही है। विवादित परिसर के साथ ही शहर की प्रमुख गलियों में सुरक्षा और बैरियर डाले जवान आसानी से देखे जा सकते हैं। संवेदनशील स्थानों पर वाहनों के लिए भी पीले कार्ड जारी हो रहे हैं। जिला प्रशासन के मुताबिक जल्द ही राज्य पुलिस व केंद्रीय बलों के जवानों की बड़ी संख्या में और तैनाती की जाएगी। यह 10 हजार से अधिक हो सकती है। अयोध्या के कलेक्टर अनुज कुमार झा ने बताया कि हम संख्या तो नहीं बता सकते लेकिन सुरक्षा हाल ही में बढ़ी है और इसे बढ़ाया जाएगा। हम सुप्रीम कोर्ट के हर फैसले को लागू करवाएंगे।

 

दीपोत्सव पर 5 देशों की मंडलियां आएंगी
लगातार तीसरे वर्ष योगी सरकार अयोध्या में भव्य दीपोत्सव की तैयारी कर रही है। पहली बार 6 करोड़ रु. का बजट दिया है। अयोध्या की दीपावली को इस वर्ष प्रांतीय मेला में शामिल किया है। अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय ने बताया कि पूरी रामनगरी में 24, 25 व 26 अक्टूबर को हर घर में दीये जलेंगे। आयोजन गुप्तार घाट से लेकर भरत जी की तपस्थली नंदीग्राम तक होगा। यहां 5.25 लाख से ज्यादा दीप प्रज्ज्वलित होंगे। अयोध्या के 13 प्रमुख मंदिरों पर 5001 दीये जलाए जाएंगे। घाट पर ही 3.25 लाख दीप प्रज्ज्वलित होंगे, जो एक नया विश्व रिकॉर्ड हाेगा। पिछले वर्ष 3.11 लाख दीपों का गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। मॉरिशस, थाईलैंड, इंडोनेशिया, सूरीनाम और नेपाल की रामलीला मंडलियां आएंगी। देश के विभिन्न कोनों से करीब 32 सांस्कृतिक दलों का कार्यक्रम होगा। श्रीलंका से भी विभिन्न कलाओं के कलाकार आएंगे।

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