आज चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में अयोध्या विवाद पर सुनवाई

4 वर्ष पहले
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  • मामले में एक पक्षकार ने मंगलवार को याचिका दायर कर जल्द सुनवाई की मांग की थी
  • याचिकाकर्ता का दावा था कि पहले दौर की मध्यस्थता में कोई खास प्रगति नहीं हुई

नई दिल्ली. अयोध्या जमीन विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता पैनल के प्रमुख जस्टिस कलीफुल्ला से 18 जुलाई तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। अयोध्या विवाद में पक्षकार गोपाल सिंह विशारद ने याचिका में अदालत से जल्द सुनवाई की मांग की थी। इस पर गुरुवार को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोेगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि अगर मध्यस्थता से कोई हल नहीं निकलता है तो हम 25 जुलाई से इस मामले की रोजाना सुनवाई पर विचार करेंगे।

 

याचिकाकर्ता ने मंगलवार को कहा था कि पहले दौर की मध्यस्थता में कोई खास प्रगति नहीं हुई। इसके बाद निर्मोही अखाड़ा ने भी जल्द सुनवाई का समर्थन किया और कहा कि मध्यस्थता प्रकिया सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रही है। इससे पहले अखाड़ा मध्यस्थता के पक्ष में था।

 

बेंच ने कहा- पैनल की रिपोर्ट का इंतजार करेंगे

याचिकाकर्ता के वकील के. पारासरन ने कहा कि मध्यस्थता पैनल से कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिले। अगर कोई समझौता हो भी जाता है तो उसे कोर्ट की मंजूरी जरूरी है। ऐसे में कोर्ट को जल्द सुनवाई की तारीख तय करनी चाहिए। इस दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि यह मध्यस्थता प्रक्रिया की आलोचना करने का वक्त नहीं है। जल्द सुनवाई की मांग वाली याचिका को खारिज कर देना चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने पैनल बनाया है। कोर्ट 15 अगस्त तक इसकी डिटेल रिपोर्ट का इंतजार करेगा।

 

कोर्ट ने मार्च में मध्यस्था पैनल बनाया था

इससे पहले कोर्ट ने 8 मार्च को इस मामले को बातचीत से सुलझाने के लिए मध्यस्थता समिति बनाई थी। समिति में पूर्व जस्टिस एफएम कलिफुल्ला, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर, सीनियर वकील श्रीराम पंचू शामिल हैं। मई में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस.अब्दुल नजीर की बेंच ने मध्यस्थता समिति को इस मामले को सुलझाने के लिए 15 अगस्त तक का समय दिया था। बेंच ने सदस्यों को निर्देशित किया था कि आठ हफ्तों में मामले का हल निकालें। पूरी बातचीत कैमरे के सामने हो।

 

सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दाखिल की गईं

2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दाखिल की गई थीं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था- अयोध्या का 2.77 एकड़ का क्षेत्र तीन हिस्सों में समान बांट दिया जाए। पहला-सुन्नी वक्फ बोर्ड, दूसरा- निर्मोही अखाड़ा और तीसरा- रामलला।