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फैक्ट चेक / अयोध्या जमीन विवाद में 1045 पन्नों का फैसला लिखने वाले ऑथर का नाम नहीं लिखा गया, वकील बोले, नाम लिखा जाना अनिवार्य नहीं



Ayodhya Ram Mandir Verdict; No Fake News On Author Of Ayodhya Ram Mandir-Babri Masjid Verdict 1045 Pages Judgment
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Ayodhya Ram Mandir Verdict; No Fake News On Author Of Ayodhya Ram Mandir-Babri Masjid Verdict 1045 Pages Judgment

  • सुप्रीम कोर्ट के वकील और संवैधानिक मामलों के जानकार विराग गुप्ता ने कहा, हर मामले में लिखा जाता है फैसला लिखने वाले जज का नाम

Dainik Bhaskar

Nov 09, 2019, 07:12 PM IST

फैक्ट चेक डेस्क. शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद में 1045 पन्नों का फैसला सुनाया, लेकिन उस न्यायाधीश का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया जिन्होंने इस फैसले को लिखा है। आमतौर पर फैसला लिखने वाले जज का नाम भी जजमेंट कॉपी में लिखा जाता है, लेकिन अयोध्या मामले में ऐसा नहीं किया गया। हमने इस फैक्ट की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के वकील और संवैधानिक मामलों के जानकार विराग गुप्ता से बात की और जाना कि नाम न लिखने की वजह क्या हो सकती है और कानून क्या कहता है। 

 

संवैधानिक पीठ नहीं, बड़ी पीठ ने की सुनवाई

  • विराग गुप्ता कहते हैं कि तमाम जगह लिखा रहा है कि पांच जजों की संवैधानिक पीठ द्वारा फैसला सुनाया गया, जबकि यह फैसला पांच जजों की बड़ी पीठ द्वारा सुनाया गया है न कि संवैधानिक पीठ द्वारा। वे कहते हैं कि संवैधानिक पीठ का गठन एक बेंच द्वारा ही किया जा सकता है। चीफ जस्टिस बड़ी बेंच का गठन कर सकते हैं, जो अयोध्या जमीन विवाद के मामले में किया गया। 
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला पलट दिया।

 

ऑथर का नाम क्यों नहीं लिखा गया ?

  • गुप्ता कहते हैं कि, अयोध्या मामला न्यायिक दृष्टि से कई मामलों में अनोखा है. पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के सामने मांग हुई थी, कि इस मामले की सुनवाई पांच या ज्यादा जजों की बेंच द्वारा होनी चाहिए। लेकिन उन्होंने न्यायिक आदेश पारित करके कहा कि इस मामले की सुनवाई 3 जजों की बेंच द्वारा ही की जाएगी। 
  • उसके बाद वर्तमान चीफ जस्टिस गोगोई ने प्रशासनिक आदेश से अचानक ही इस मामले की सुनवाई के लिए 5 जजों की बेंच का गठन किया जो एक बड़ी बात थी. इस मामले की सुनवाई के दौरान 5 जजों की बेंच को सुप्रीम कोर्ट की कॉज लिस्ट में संविधान पीठ कहा गया लेकिन इस फैसले में कहा गया है कि यह यह 5 जजों की बेंच थी, न कि संविधान पीठ. सर्वसम्मति से दिए गए फैसले परंपरा के अनुसार बेंच में शामिल किसी एक जज द्वारा लिखे जाते हैं, लेकिन इस फैसले में किसी भी जज का नाम होना आश्चर्यजनक है। 
  • फैसले में कहा गया है कि पांच जजों में से एक जज के अनुसार मुख्य गुंबद के नीचे ही राम जन्म का स्थान था, लेकिन उन जज का नाम फैसले में नहीं दिया गया। परंपरा के अनुसार फैसला लिखने वाले जज का नाम दिया जाता है, पर ऐसा नियम या कानूनी बंधन नहीं है. यह एक संवेदनशील मामला है और जजों की सुरक्षा के लिहाज से भी फैसला लिखने वाले जज का नाम नहीं दिए जाने की संभावना है।
आंकड़ों में अयोध्या मामला।

 

फैसले की कॉपी देखने के लिए यहां क्लिक करें

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