अयोध्या / 28 साल से सेवा कर रहे पुजारी बोले- रामलला को जगाकर बताया कोर्ट का फैसला; रात में दिवाली मनी



Ayodhya, priest said, wake up Ramlala told the Supreme Court's decision
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Ayodhya, priest said, wake up Ramlala told the Supreme Court's decision

  • दोपहर एक बजे जैसे ही रामलला के दोबारा उठने के समय भगवान को सवा किलो पेड़े का भोग लगाकर फैसला सुनाया
  • आम दिनों में 12 से 15 हजार श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए आते हैं, फैसले के दिन 900 लोग ही आए

Dainik Bhaskar

Nov 10, 2019, 01:02 PM IST

अयोध्या (अनिरुद्ध शर्मा). शनिवार सुबह जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया, अयोध्या के टेंट मंदिर में विराजे रामलला के विश्राम का समय हो चुका था। मुख्य पुजारी संतोष तिवारी ने कहा कि- ‘दोपहर एक बजे जैसे ही रामलला के दोबारा उठने का समय हुआ तो सवा किलो पेड़े का भोग लगाकर उन्हें जगाया और बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है, उससे पूरी अयोध्या नगरी खुश है। क्योंकि, अब रामलला का टेंट में विराजने का वनवास खत्म होगा।’ इतना कहते हुए संतोष तिवारी भावुक हो गए...। थोड़ी देर चुप रहने के बाद उन्होंने कहा कि- ‘मैं 28 साल से लगातार रामलला की सेवा में हूं। मैं बता नहीं पा रहा हूं कि आज मुझे कैसा अनुभव हो रहा है।’ 

 

अयोध्या में सुरक्षा के असाधारण बंदोबस्त हैं। इसके चलते शनिवार को फैसले के दिन दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी कमी आ गई। आम दिनों में जहां 12 से 15 हजार श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए आते हैं, वहीं फैसले के दिन दोनों पारियों में मिलाकर करीब 900 लोग ही दर्शन करने पहुंच पाए। लेकिन, शाम को शहर की दुकानें खुल गईं। जगह-जगह दीये जलाकर भगवान राम की पूजा की गई। शहर में दिवाली सा माहौल देखने को मिला।

 

अयोध्या से रामेश्वरम तक का नया पर्यटन नक्शा तैयार करा रही है केन्द्र सरकार
जाने-माने इतिहासकार और पुरातत्वशास्त्री अनुसंधानकर्ता डॉ. रामअवतार ने श्रीराम और सीता के जीवन की घटनाओं से जुड़े ऐसे 200 से भी अधिक स्थानों का पता लगाया है, जहां श्रीराम और सीताजी वनवास के दौरान रुके थे। केंद्र सरकार के स्तर पर इन स्मारकों को कॉरिडोर के रूप में विकसित किए जाने की योजना है। अयोध्या से रामेश्वरम तक पर्यटन का नया नक्शा तैयार किया जा रहा है। 
 
राम वनवास से जुड़े इन 17 स्थानों पर कॉरिडोर की तैयारी

  • तमसा नदी: अयोध्या से 20 किमी दूर है तमसा नदी। यहां पर राम ने नाव से नदी पार की।
  •  श्रृंगवेरपुर तीर्थ: प्रयागराज से 20-22 किमी दूर यह स्थल निषादराज का गृह राज्य था। यहीं पर उन्होंने केवट से गंगा पार कराने को कहा था। श्रृंगवेरपुर को वर्तमान में सिंगरौर कहा जाता है।
  •  कुरई: सिंगरौर में गंगा पार कर भगवान श्रीराम कुरई में रुके।
  •  प्रयाग: कुरई से आगे चलकर श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सहित प्रयाग पहुंचे थे।
  •  चित्रकूट: इसके बाद राम चित्रकूट पहुंचे जहां राम को अयोध्या ले जाने के लिए भरत आए थे।
  •  सतना: यहां अत्रि ऋषि का आश्रम था।
  •  दंडकारण्य: चित्रकूट से निकलकर भगवान श्रीराम दंडकारण्य पहुंचे। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों को मिलाकर दंडकारण्य था।
  •  पंचवटी नासिक : दण्डकारण्य में मुनियों के आश्रमों में रहने के बाद श्रीराम अगस्त्य मुनि के आश्रम गए। यह आश्रम नासिक के पंचवटी क्षे‍त्र में है जो गोदावरी नदी के किनारे बसा है। यहीं पर लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक काटी थी।
  •  सर्वतीर्थ : नासिक क्षेत्र में ही रावण ने सीता का हरण किया और जटायु का भी वध किया था। इसी तीर्थ पर लक्ष्मण रेखा थी।
  •  पर्णशाला: पर्णशाला आंध्रप्रदेश में खम्मम जिले के भद्राचलम में स्थित है। रामालय से लगभग 1 घंटे की दूरी पर स्थित पर्णशाला को पनसाला भी कहते हैं।
  •  तुंगभद्रा : तुंगभद्रा एवं कावेरी नदी क्षेत्रों के अनेक स्थलों पर भगवान श्रीराम, सीताजी की खोज में गए थे।
  •  शबरी का आश्रम: रास्ते में वे पम्पा नदी के पास शबरी आश्रम भी गए, जो केरल में स्थित है।
  •  ऋष्यमूक पर्वत: मलय पर्वत और चंदन वनों को पार करते हुए वे ऋष्यमूक पर्वत की ओर बढ़े। यहां उन्होंने हनुमान और सुग्रीव से भेंट की व बाली का वध किया।
  •  कोडीकरई: यहां राम की सेना ने पड़ाव डाला और रामेश्वरम की ओर कूच किया।
  •  रामेश्वरम: श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने के पहले यहां भगवान शिव की पूजा की थी। रामेश्वरम का शिवलिंग श्रीराम द्वारा स्थापित शिवलिंग है।
  •  धनुषकोडी : श्रीराम रामेश्वरम के आगे धनुषकोडी पहुंचे। यहीं से उन्होंने रामसेतु बनाया।
  •  नुवारा एलिया पर्वत: श्रीलंका में नुआरा एलिया पहाड़ियों के आसपास स्थित रावण फॉल, रावण गुफाएं, अशोक वाटिका, खंडहर हो चुके विभीषण के महल आदि की पुरातात्विक जांच से इनके रामायण काल के होने की पुष्टि होती है।
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