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राम जन्मभूमि विवाद / मुस्लिम पक्षकार ने कहा- राम इमाम-ए-हिंद, पर जन्मभूमि को न्यायिक व्यक्ति में कैसे बदला जा सकता है?



Ayodhya Ram Mandir; Supreme Court 25th Day, 17 Sept Hearing Ram Janmabhoomi Babri Masjid Dispute Case News Updates
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Ayodhya Ram Mandir; Supreme Court 25th Day, 17 Sept Hearing Ram Janmabhoomi Babri Masjid Dispute Case News Updates

  • अयोध्या मामले पर 25वें दिन सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, अदालत ने कहा- सभी पक्ष बताएं, बहस का नतीजा कब निकलेगा?
  • मुस्लिम पक्षकार के वकील राजीव धवन ने पूछा- पवित्रता एक स्थान को न्यायिक वक्त में बदलने के लिए पर्याप्त कब होगी?

Dainik Bhaskar

Sep 17, 2019, 06:15 PM IST

नई दिल्ली. राम जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को 25वें दिन भी सुनवाई जारी रही। इस दौरान मुस्लिम पक्षकार के वकील राजीव धवन ने कोर्ट में अल्लामा इकबाल का शेर पढ़ा। उन्होंने कहा- है राम के वजूद पे हिंदोस्तां को नाज, अहल-ए-नजर समझते हैं उसको इमाम-ए-हिंद। राजीव धवन ने अदालत से पूछा कि पवित्रता कब किसी स्थान को न्यायिक व्यक्ति में बदलने के लिए पर्याप्त होगी। 

 

अयोध्या मसले पर सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली 5 जजों की बेंच 6 अगस्त से रोज सुनवाई कर रही है। चीफ जस्टिस की बेंच ने सभी पक्षकारों से कहा- मामले से जुड़े सभी पक्षकार हमें यह बताएं कि दलीलों का दौर कब खत्म होगा। इसका एक संभावित समय बताएं। आज सुनवाई का 25वां दिन है। 

 

जन्मस्थान एक न्यायिक व्यक्ति नहीं हो सकता- धवन
राजीव धवन ने दलील दी- राम की पवित्रता पर कोई विवाद नहीं है। इस पर भी सवाल नहीं है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में कहीं हुआ था। लेकिन, ऐसी पवित्रता किसी जगह को एक न्यायिक व्यक्ति बदलने के लिए पर्याप्त कब होगी? जन्मस्थान एक न्यायिक व्यक्ति नहीं हो सकता। जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है, लेकिन कृष्ण न्यायिक व्यक्ति नहीं हैं। धवन ने शिया वक्फ बोर्ड के दावे को खारिज किया। उन्होंने कहा- बाबरी मस्जिद वक्फ की संपत्ति है और उस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड का हक है। 1885 के बाद ही बाबरी मस्जिद के बाहर के राम चबूतरे को राम जन्मस्थान के रूप में जाना गया।

 

अयोध्या वार्ता कमेटी करेगी मध्यस्थता
इससे पहले सुनवाई के दौरान फैसला किया गया कि राम जन्मभूमि विवाद को हल करने के लिए अयोध्या वार्ता कमेटी मध्यस्थता करेगी। इसमें हिंदू और मुसलमान दोनों नेताओं को शामिल किया जाएगा। जमात उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना सुहैब कासमी ने रविवार को कहा था- 2016 में अयोध्या वार्ता कमेटी का गठन किया गया। कमेटी एक बार फिर भूमि विवाद को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों के प्रभावशाली लोगों को शामिल कर बातचीत करेगी। मध्यस्थता प्रक्रिया संभवत: अक्टूबर से शुरू होगी।


कोर्ट के आदेश से मार्च में बनाया था मध्यस्थता पैनल
सुप्रीम कोर्ट ने 8 मार्च को इस मामले को बातचीत से सुलझाने के लिए मध्यस्थता पैनल बनाया था। इसमें पूर्व जस्टिस एफएम कलीफुल्ला, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर, सीनियर वकील श्रीराम पंचू शामिल थे। हालांकि, पैनल मामले को सुलझाने के लिए किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका।

 

हाईकोर्ट ने विवादित जमीन को 3 हिस्सों में बांटने के लिए कहा था
2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दाखिल की गई थीं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अयोध्या का 2.77 एकड़ का क्षेत्र तीन हिस्सों में समान बांट दिया जाए। पहला-सुन्नी वक्फ बोर्ड, दूसरा- निर्मोही अखाड़ा और तीसरा- रामलला विराजमान।

 

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