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अयोध्या / सुप्रीम कोर्ट ने कहा- 18 अक्टूबर तक दलीलें पूरी करें ताकि जजों को फैसला लिखने के लिए 4 हफ्ते का वक्त मिले



अयोध्या (फाइल)। अयोध्या (फाइल)।
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अयोध्या (फाइल)।अयोध्या (फाइल)।

  • अयोध्या भूमि विवाद मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का 26वां दिन
  • कोर्ट ने कहा- पक्षकार मध्यस्थता के जरिए विवाद सुलझा सकते हैं, सुनवाई जारी रहेगी

Dainik Bhaskar

Sep 18, 2019, 12:41 PM IST

नई दिल्ली. अयोध्या भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला अगले कुछ महीनों में आने की उम्मीद बढ़ गई है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच जजों की बेंच इस पर सुनवाई कर रही है। बुधवार को सीजेआई रंजन गोगोई ने सभी पक्षकारों से अपनी दलीलें पूरी करने के बारे में पूछा। सीजेआई ने कहा कि हम 18 अक्टूबर तक सुनवाई खत्म करना चाहते हैं ताकि जजों को फैसला लिखने में चार हफ्ते का वक्त मिले। इसके लिए सभी को मिलकर सहयोग करना चाहिए। जरूरत पड़ी तो कोर्ट सुनवाई का वक्त एक घंटा बढ़ा सकती है, हम शनिवार को भी सुनवाई के लिए तैयार हैं।

 

इस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से वकील राजीव धवन ने कहा- मुस्लिम पक्षकारों को मौजूदा सप्ताह और अगला पूरा सप्ताह दलीलें खत्म करने में लगेगा। हिंदू पक्षकारों ने कहा कि उस पर विपक्ष की दलीलों पर जवाब देने के लिए हमें दो दिन लगेंगे। धवन ने कहा कि उसके बाद मुझे भी दो दिन लगेंगे। निर्मोही अखाड़ा की ओर से समय नहीं बताया गया। उन्होंने कहा कि कुछ दिन हमें भी चाहिए।

 

पक्षकारों के बीच मध्यस्थता की रिपोर्ट सौंपी जाए: सीजेआई
चीफ जस्टिस ने कहा कि सभी पक्ष अपनी दलीलें 18 अक्टूबर तक पूरी कर लें। हमें मिलजुल कर प्रयास करना चाहिए कि सुनवाई तय वक्त में खत्म हो जाए। सीजेआई ने मामले में पक्षकारों के मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू करने की मांग पर कहा कि अगर दो पक्ष आपस में मध्यस्थता के जरिए विवाद सुलझाने का प्रयास करना चाहते हैं तो वे कर सकते हैं। मगर सुनवाई जारी रहेगी। अगर मध्यस्थता पर कोई बात बनती है तो इसकी रिपोर्ट कोर्ट को दी जाए। इसे लेकर गोपनीयता बनी रहेगी। विवाद को हल करने के लिए अयोध्या वार्ता कमेटी मध्यस्थता करेगी। इसमें हिंदू और मुसलमान दोनों नेताओं को शामिल किया जाएगा। मध्यस्थता प्रक्रिया संभवत: अक्टूबर से शुरू होगी।

 

जन्मस्थान एक न्यायिक व्यक्ति नहीं हो सकता: धवन

मंगलवार को सुनवाई में राजीव धवन ने दलील दी थी कि राम की पवित्रता पर कोई विवाद नहीं है। इस पर भी सवाल नहीं है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में कहीं हुआ था। लेकिन, ऐसी पवित्रता किसी जगह को एक न्यायिक व्यक्ति बदलने के लिए पर्याप्त कब होगी? जन्मस्थान एक न्यायिक व्यक्ति नहीं हो सकता। जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है, लेकिन कृष्ण न्यायिक व्यक्ति नहीं हैं। धवन ने शिया वक्फ बोर्ड के दावे को खारिज किया। उन्होंने कहा- बाबरी मस्जिद वक्फ की संपत्ति है और उस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड का हक है। 1885 के बाद ही बाबरी मस्जिद के बाहर के राम चबूतरे को राम जन्मस्थान के रूप में जाना गया।


कोर्ट के आदेश से मार्च में बनाया था मध्यस्थता पैनल
सुप्रीम कोर्ट ने 8 मार्च को इस मामले को बातचीत से सुलझाने के लिए मध्यस्थता पैनल बनाया था। इसमें पूर्व जस्टिस एफएम कलीफुल्ला, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर, सीनियर वकील श्रीराम पंचू शामिल थे। हालांकि, पैनल मामले को सुलझाने के लिए किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका।

 

हाईकोर्ट ने विवादित जमीन को 3 हिस्सों में बांटने के लिए कहा था
2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दाखिल की गई थीं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अयोध्या का 2.77 एकड़ का क्षेत्र तीन हिस्सों में समान बांट दिया जाए। पहला-सुन्नी वक्फ बोर्ड, दूसरा- निर्मोही अखाड़ा और तीसरा- रामलला विराजमान।

 

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