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अयोध्या / याचिकाकर्ता ने कहा- मुझे विवादित स्थल पर उपासना का हक, इसे छीना नहीं जा सकता



अयोध्या। अयोध्या।
Ayodhya Ram Mandir; Ayodhya Supreme Court Hearing, Day 10th: Ram Janmabhoomi Babri Masjid Case News Updates
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अयोध्या।अयोध्या।
Ayodhya Ram Mandir; Ayodhya Supreme Court Hearing, Day 10th: Ram Janmabhoomi Babri Masjid Case News Updates

  • सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या भूमि विवाद मामले में गुरुवार को 10वें दिन सुनवाई
  • रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा था- लोगों की आस्था ही विवादित स्थल को जन्मभूमि साबित करने के लिए काफी

Dainik Bhaskar

Aug 22, 2019, 01:51 PM IST

नई दिल्ली. अयोध्या भूमि विवाद मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच ने 10वें दिन सुनवाई की। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने याचिकाकर्ता गोपाल सिंह विशारद की ओर से वकील रंजीत कुमार ने दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि वे उपासक हैं और उन्हें विवादित स्थल पर उपासना का अधिकार है और इसे छीना नहीं जा सकता। कुमार ने रामलला और हिंदू पक्ष के वकीलों की दलीलों का समर्थन किया। विशारद ने विवादित भूमि पर पूजा के लिए 1950 में याचिका लगाई थी।

 

रंजीत कुमार ने कहा कि मस्जिद गिरने के बाद मुस्लिमों ने अयोध्या में नमाज पढ़ना बंद कर दिया, लेकिन हिंदुओं ने जन्मस्थान पर पूजा जारी रखी। बुधवार को रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा था कि लोगों की आस्था ही यह साबित करने के लिए काफी है कि विवादित जगह राम जन्मभूमि है, फिर भले ही वहां मंदिर रहा हो या नहीं।

 

अयोध्या मामले में अब तक क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट ने विवाद को बातचीत से सुलझाने के लिए मार्च में मध्यस्थता पैनल बनाया था। इससे हल नहीं निकलने पर कोर्ट में हर दिन सुनवाई शुरू हुई। यह तब तक चलेगी, जब तक कोई नतीजा नहीं निकल जाता।

पहली सुनवाई: 6 अगस्त को सुनवाई के पहले दिन निर्मोही अखाड़ा ने पूरी 2.77 एकड़ विवादित जमीन पर अपना दावा किया। उन्होंने कहा था कि पूरी विवादित भूमि पर 1934 से ही मुसलमानों को प्रवेश की मनाही है।

दूसरी सुनवाई: 7 अगस्त को बेंच ने पक्षकार निर्मोही अखाड़े से संबंधित 2.77 एकड़ भूमि के दस्तावेज पेश करने को कहा था। इस पर अखाड़े ने कहा था कि 1982 में वहां डकैती हुई, जिसमें सभी दस्तावेज खो गए।

तीसरी सुनवाई: 8 अगस्त को बेंच ने पूछा कि एक देवता के जन्मस्थल को न्याय पाने का इच्छुक कैसे माना जाए, जो इस केस में पक्षकार भी हो। इस पर वकील ने कहा था कि हिंदू धर्म में किसी स्थान को पवित्र मानने और पूजा करने के लिए मूर्तियों की आवश्यकता नहीं है। नदियों और सूर्य की भी पूजा की जाती है। उनके उद्गम स्थलों को इसी तरह से देखा जाता है।

चौथी सुनवाई: 9 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने रामलला के वकील से पूछा था- क्या भगवान राम का कोई वंशज अयोध्या या दुनिया में है? इस पर वकील ने कहा था- हमें जानकारी नहीं है। बाद में जयपुर राजघराने की दीयाकुमारी ने खुद को श्रीराम के बड़े बेटे कुश के वंशज होने का दावा किया था। मुस्लिम पक्ष ने हफ्ते में पांच दिन सुनवाई पर आपत्ति जताई थी।

5वीं सुनवाई: 13 अगस्त को हिंदू पक्ष के वकील सीएस वैद्यनाथन ने मंदिर के अस्तित्व को लेकर दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा था- इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले में विवादित जगह पर मंदिर होने का जिक्र है। हाईकोर्ट के जस्टिस एसयू खान ने कहा था कि यह मस्जिद मंदिर के टूटे-फूटे हिस्से पर बनाई गई है।

6वीं सुनवाई: 14 अगस्त को रामलला विराजमान के वकील ने कहा कि हिंदुओं का विश्वास है कि अयोध्या भगवान राम का जन्मस्थान है और कोर्ट को इसके तर्कसंगत होने की जांच के लिए इससे आगे नहीं जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि मुगल शासक अकबर और जहांगीर के काल में भारत आने वाले विदेशी यात्री विलियम फिंच और विलियम हॉकिन्स ने अपने यात्रा-वृतांत में राम जन्मभूमि और अयोध्या के बारे में लिखा है।

7वीं सुनवाई: 16 अगस्त को रामलला के वकील एस. वैद्यनाथन ने कहा था कि खुदाई के दौरान स्तंभों में श्रीकृष्ण, शिव तांडव और श्रीराम के बाल रूप की तस्वीर दिखती है। रिपोर्ट में स्तंभों पर भगवान शंकर के चित्रों की बात भी कही गई थी। उन्होंने कहा था कि देवी-देवताओं के चित्र मस्जिद नहीं बल्कि मंदिर में मिले थे। इस स्थल का हिंदुओं के लिए धार्मिक रूप से महत्व है।

8वीं सुनवाई: 20 अगस्त को रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने दलील पेश करते हुए कहा कि विवादित जमीन पर मस्जिद बनाने के लिए मंदिर ढहाया गया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की खुदाई में जो चीजें सामने आई हैं, उसके मुताबिक वहां मंदिर था। जहां मस्जिद बनाई गई थी, उसके नीचे एक विशाल निर्माण था।

9वीं सुनवाई: रामलला के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा- हिंदुओं ने हमेशा ही उस स्थान पर पूजा करने की अपनी इच्छा जाहिर की है। यह जगह एक देवता राम की जन्मभूमि है। अब इसका तो सवाल ही नहीं उठता है कि कोई वहां मस्जिद बना दे और जमीन पर दावा करे। कोई भी मस्जिद के आधार पर इस संपत्ति पर अपने कब्जे का दावा नहीं कर सकता।

 

हाईकोर्ट ने विवादित जमीन को 3 हिस्सों में बांटने के लिए कहा था
2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दाखिल की गई थीं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अयोध्या का 2.77 एकड़ का क्षेत्र तीन हिस्सों में समान बांट दिया जाए। पहला-सुन्नी वक्फ बोर्ड, दूसरा- निर्मोही अखाड़ा और तीसरा- रामलला विराजमान।

 

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