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  • Azam Khan: SP MP Azam Khan\'s Comment On BJP MP Rama Devi, Says Aap Mujhe Itni Acchi Lagti Hain; Lok Sabha News Updates

आजम ने भाजपा सांसद रमा देवी से कहा- जी चाहता है आपकी आंखों में आंखें डाले रहूं; स्पीकर ने कहा- माफी मांगो

3 वर्ष पहले
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  • लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा- यह भाषा असंसदीय, सदन में मर्यादित होकर अपनी बात रखें
  • भाजपा सांसद रमा देवी ने आजम खान के बयान पर आपत्ति जताई, रवि शंकर प्रसाद ने कहा- माफी मांगें

नई दिल्ली. लोकसभा में गुरुवार को चर्चा के दौरान सपा सांसद आजम खान ने भाजपा सांसद रमा देवी को लेकर विवादित बयान दिया। इस दौरान शिवहर (बिहार) से सांसद रमा देवी बतौर पीठासीन अधिकारी स्पीकर की कुर्सी पर बैठी हुई थीं। आजम ने कहा- आप मुझे इतनी अच्छी लगती हैं कि मेरा मन करता है आपकी आंखों में आंखें डाले रहूं। आजम के इस बयान पर रमा देवी ने आपत्ति जताई।

 

इस पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आजम को माफी मांगनी चाहिए। स्पीकर ओम बिड़ला ने आजम से माफी मांगने को कहा। इसके बाद आजम ने रमा देवी को अपनी प्यारी बहन बताया। लेकिन, माफी मांगने की बात पर वह यह कहकर सदन से बाहर चले गए कि मुझे बेइज्जती सहकर यहां बात नहीं रखनी। इस बीच न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि संसद सत्र को 7 अगस्त तक बढ़ा दिया गया है।

 

भाजपा सांसदों के लिए अखिलेश बोले- इनसे ज्यादा बद्तमीज कोई नहीं
सपा सांसद अखिलेश ने आजम के बयान का बचाव करते हुए कहा, ‘‘अगर भाषा असंसदीय लगे तो इसे रिकॉर्ड से निकाल दें। लेकिन मुझे नहीं लगता कि उन्होंने कुछ भी गलत भावना से नहीं कहा।’’ अखिलेश ने भाजपा सांसदों की तरफ इशारा करते हुए कहा, ‘‘इनसे ज्यादा बद्तमीज कोई नहीं हो सकता। अगर यह आजम को बद्तमीज कह रहे हैं तो यह संसद का अपमान कर रहे हैं। आपने मुझे बोलने का मौका दिया। यह उंगली उठाने वाले कौन हैं?’’

 

स्पीकर ने कहा- हमें मर्यादा में रहकर बोलना चाहिए
ओम बिड़ला ने आजम के बाद अखिलेश को भी फटकार लगाई। स्पीकर ने कहा ‘‘आपने जो शब्द (बद्तमीज) इस्तेमाल किया है, वो असंसदीय है। यह शब्द उचित नहीं है। अगर इस तरफ के किसी सांसद या मंत्री ने ऐसा कहा तो भी मैंने उन्हें ऐसा कुछ कहने से रोका। आपके (सांसदों) के लिए यह मांग करना काफी आसान है कि रिकॉर्ड से ये निकाल दो, वो निकाल दो। लेकिन हमें बयान रिकॉर्ड से निकलवाने की जरूरत ही क्यों पड़ रही है। एक बार कोई बात कह दी जाती है तो वो सार्वजनिक हो जाती है, इसलिए हम सबको संसद की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए बोलना चाहिए।’’

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