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  • Babri Masjid Case: Special Judge Seeks 6 More Months From SC To Conclude Trial

विशेष जज ने ट्रायल पूरा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से 6 महीने का वक्त मांगा

2 वर्ष पहले
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  • सितंबर 2019 को रिटायर हो रहें हैं विशेष जज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हम चाहते हैं कि पूरी सुनवाई करने वाले जज ही सुनाएं फैसला
  • सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2017 को आडवाणी, जोशी, उमा समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला चलाने का आदेश दिया

नई दिल्ली. बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में रोजाना सुनवाई कर रहे विशेष जज ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से ट्रायल पूरा करने के लिए 6 महीने का वक्त मांगा है। 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती जैसे 13 नेताओं के नाम शामिल हैं।

 

मामले की सुनवाई कर रहे विशेष जज ने 25 मई को सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखा था कि वे 30 सितंबर 2019 को सेवानिवृत्त हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि मुकदमे को निपटाने के लिए कम से कम 6 महीने का और समय चाहिए।    

 

कोर्ट ने उप्र सरकार से जज के कार्यकाल को बढ़ाने का तरीका पूछा

जस्टिस आरएफ नरिमन की अध्यक्षता वाली बेंच ने सोमवार को कहा कि हम चाहते हैं कि इस मामले में फैसला वहीं जज सुनाएं, जिन्होंने इसकी सुनवाई की है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से विशेष जज के कार्यकाल को बढ़ाने के तरीकों के बारे में 19 जुलाई तक जानकारी देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी। 

 

कोर्ट ने 13 नेताओं के खिलाफ मामला चलाने का आदेश दिया था

सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल 2017 को आडवाणी, जोशी, उमा भारती, भाजपा सांसद विनय कटियार समेत 13 नेताओं के खिलाफ केस चलाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने सीबीआई की पिटीशन पर ये फैसला सुनाया था। इस मामले में 3 अन्य आरोपियों की मौत हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल 2017 को मामले की रोजाना सुनवाई कर इसे दो साल के भीतर पूरा करने का आदेश दिया था।

 

स्पेशल कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी सीबीआई
सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने मई 2001 में आडवाणी, जोशी, उमा, बाल ठाकरे और अन्य को टेक्निकल ग्राउंड का हवाला देते हुए आरोपों से बरी कर दिया था। सीबीआई इसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंची थी, लेकिन उसने भी इस फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी के 13 नेताओं पर साजिश का केस चलाने का आदेश दिया था।

 

मस्जिद ढहाने के मामले में दो एफआईआर हुई थीं दर्ज
दरअसल, दिसंबर, 1992 को दो एफआईआर दर्ज की गई थीं। पहली अज्ञात कारसेवकों के खिलाफ। इन पर मस्जिद को ढहाने का आरोप था। इसकी सुनवाई लखनऊ कोर्ट में हुई थी। वहीं, दूसरी एफआईआर आडवाणी, जोशी और अन्य लोगों के खिलाफ थी। इन सभी पर मस्जिद ढहाने के लिए भड़काऊ स्पीच देने का आरोप था। यह केस राय बरेली के सेशन कोर्ट में चला था।

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