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सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अदालत से आडवाणी-जोशी से जुड़े केस का फैसला 9 महीने में देने को कहा

एक वर्ष पहले
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फाइल फोटो।
  • सुप्रीम कोर्ट ने केस की सुनवाई कर रहे जज एसके यादव का कार्यकाल 9 महीने और बढ़ाने का आदेश दिया
  • केस की सुनवाई कर रहे जज एसके यादव 30 सितंबर को रिटायर हो रहे थे, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से 6 महीने का वक्त मांगा

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि लखनऊ की विशेष अदालत बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में 6 महीने में सुनवाई पूरी करे और अब से 9 महीने के भीतर अपना फैसला सुनाए। साथ ही कोर्ट ने केस की सुनवाई कर रहे जज एसके यादव का कार्यकाल 9 महीने और बढ़ाने का आदेश दिया। दरअसल, इस केस की सुनवाई कर रहे सीबीआई जज एसके यादव 30 सितंबर को रिटायर हो रहे थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से ट्रायल पूरा करने के लिए 6 महीने का वक्त मांगा था।  

 

6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती जैसे 13 नेताओं के नाम शामिल हैं।

 

जज का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है- उप्र सरकार

इससे पहले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि यह बेहद जरूरी है कि सीबीआई जज एसके यादव मामले की सुनवाई पूरी करके फैसला सुनाएं। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से विशेष जज के कार्यकाल को बढ़ाने के तरीकों के बारे में 19 जुलाई तक जानकारी देने को कहा था। इस पर सरकार ने शुक्रवार को कहा कि जज का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है। 


कोर्ट ने 13 नेताओं के खिलाफ मामला चलाने का आदेश दिया था
सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल 2017 को आडवाणी, जोशी, उमा भारती, भाजपा सांसद विनय कटियार समेत 13 नेताओं के खिलाफ केस चलाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने सीबीआई की पिटीशन पर ये फैसला सुनाया था। इस मामले में 3 अन्य आरोपियों की मौत हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल 2017 को मामले की रोजाना सुनवाई कर इसे दो साल के भीतर पूरा करने का आदेश दिया था।


स्पेशल कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी सीबीआई
सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने मई 2001 में आडवाणी, जोशी, उमा, बाल ठाकरे और अन्य को टेक्निकल ग्राउंड का हवाला देते हुए आरोपों से बरी कर दिया था। सीबीआई इसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंची थी, लेकिन उसने भी इस फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी के 13 नेताओं पर साजिश का केस चलाने का आदेश दिया था।

 

मस्जिद ढहाने के मामले में दो एफआईआर हुई थीं दर्ज
दरअसल, दिसंबर, 1992 को दो एफआईआर दर्ज की गई थीं। पहली अज्ञात कारसेवकों के खिलाफ। इन पर मस्जिद को ढहाने का आरोप था। इसकी सुनवाई लखनऊ कोर्ट में हुई थी। वहीं, दूसरी एफआईआर आडवाणी, जोशी और अन्य लोगों के खिलाफ थी। इन सभी पर मस्जिद ढहाने के लिए भड़काऊ स्पीच देने का आरोप था। यह केस राय बरेली के सेशन कोर्ट में चला था।

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