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उप्र / अखिलेश-माया की पहली संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आज, अजीत सिंह बोले- सीटें अभी तय नहीं

Dainik Bhaskar

Jan 12, 2019, 12:05 AM IST


Bahujan Samaj Party Chief Mayawati and Samajwadi Party Chief Akhilesh Yadav to address a joint press briefing in Lucknow
Bahujan Samaj Party Chief Mayawati and Samajwadi Party Chief Akhilesh Yadav to address a joint press briefing in Lucknow
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Bahujan Samaj Party Chief Mayawati and Samajwadi Party Chief Akhilesh Yadav to address a joint press briefing in Lucknow
Bahujan Samaj Party Chief Mayawati and Samajwadi Party Chief Akhilesh Yadav to address a joint press briefing in Lucknow

  • उत्तरप्रदेश में लोकसभा की 80 सीटें, सपा और बसपा 37-37 सीटों पर चुनाव लड़ सकती हैं
  • पिछले शुक्रवार को अखिलेश और मायावती ने दिल्ली में मुलाकात की थी

लखनऊ. लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन का ऐलान शनिवार को हो सकता है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती पहली संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। समाजवादी पार्टी ने ट्विटर हैंडल से इस प्रेस काॅन्फ्रेंस की जानकारी दी।

 

इस बीच महागठबंधन के एक और सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा, "हम अलायंस का हिस्सा हैं, लेकिन सीटों के बंटवारे पर बातचीत नहीं हुई है। कांग्रेस गठबंधन के साथ रहेगी या नहीं इस पर फैसला अखिलेशजी और मायावतीजी करेंगी।"

 

प्रेस रिलीज दोनों पार्टियों की तरफ से जारी

मीडिया को भेजे गए आमंत्रण पत्र में सपा के राष्ट्रीय सचिव राजेंद्र चौधरी और बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के दस्तखत हैं।

तीन सीटें मिल सकती हैं रालोद को 
ऐसा कहा जा रहा है कि राज्य की लोकसभा की 80 सीटों में से सपा और बसपा 37-37 सीटों पर चुनाव लड़ सकती हैं। तीन सीटें रालोद को मिलेंगी। 2 सीटें कांग्रेस को दी जा सकती हैं। एक सीट अन्य सहयोगी के लिए रखी है। सीटों के बंटवारे में पेंच रालोद की वजह से फंस गया है। पार्टी प्रमुख अजीत सिंह चार सीटें चाहते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले शुक्रवार को अखिलेश और मायावती के बीच दिल्ली में बैठक हुई थी। इसमें यह बात भी निकलकर आई थी कि दोनों कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ने के पक्ष में नहीं है।

 

2018 में भाजपा को सपा-बसपा से हुआ नुकसान
गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बसपा ने सपा उम्मीदवार को वोट देने की अपील की थी। वहीं, कैराना लोकसभा उपचुनाव में रालोद उम्मीदवार को सपा-बसपा और कांग्रेस ने समर्थन दिया। तीनों जगहों पर भाजपा को हार मिली।

 

उत्तरप्रदेश: 2014 के लोकसभा चुनाव की स्थिति

कुल सीटें: 80 

 

पार्टी सीटें वोट शेयर
भाजपा+ 73 42.6%
सपा 05 22.3%
बसपा 00 19.8%
कांग्रेस 02 7.5%

 

पहले भी साथ आए थे बसपा-सपा
मुलायम सिंह यादव ने 1992 में समाजवादी पार्टी का गठन किया। 1993 में हुए विधानसभा चुनाव में सपा-बसपा का गठबंधन हुआ। उस समय बसपा की कमान कांशीराम के पास थी। सपा 256 और बसपा 164 विधानभा सीटों पर चुनाव लड़ी। सपा को 109 और बसपा को 67 सीटें मिलीं। लेकिन 1995 में सपा-बसपा के रिश्ते खराब हो गए। इसी समय 2 जून 1995 को गेस्ट हाउस कांड के बाद गठबंधन टूट गया। 

 

क्या है गेस्ट हाउस कांड?
कहा जाता है कि 1993 में मुलायम सिंह के मुख्यमंत्री बनने के बाद बसपा और भाजपा के बीच नजदीकियां बढ़ने लगी थीं। सपा को इसका अंदेशा हो गया था कि बसपा कभी भी सरकार से समर्थन वापस ले सकती है। 2 जून 1995 को मायावती अपने विधायकों के साथ स्टेट गेस्ट हाउस में बैठक कर रही थीं। इसकी जानकारी जब सपा के लोगों को हुई तो उसके कई समर्थक वहां पहुंच गए। सपा समर्थकों ने वहां जमकर हंगामा किया। बसपा विधायकों से मारपीट तक की गई। मायावती ने इस पूरे ड्रामे को अपनी हत्या की साजिश बताया और मुलायम सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया। मुलायम सरकार के अल्पमत में आते ही भाजपा ने बसपा को समर्थन देने का पत्र राज्यपाल को सौंप दिया। अगले ही दिन मायावती राज्य की पहली दलित मुख्यमंत्री बन गईं।

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