- छत्तीसगढ़ के व्यक्ति ने युवती के परिजनों को शादी के लिए राजी करने के लिए हिंदू धर्म अपनाया
- अदालत में लड़की के परिजनों ने कहा- धर्म परिवर्तन केवल दिखावे के लिए किया गया
Dainik Bhaskar
Sep 12, 2019, 12:01 PM ISTनई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने एक अंतर-धार्मिक विवाह मामले में सुनवाई के दौरान बुधवार को मुस्लिम व्यक्ति से महान प्रेमी नहीं बल्कि वफादार पति बनने की सलाह दी। छत्तीसगढ़ के धमतरी में 33 साल के युवक इब्राहिम सिद्दीकी ने 23 साल की हिंदू युवती से धर्म बदलकर 2018 में शादी की थी। अब इब्राहिम फिर से मुस्लिम धर्म कबूल कर लिया है।
लड़की के पिता की ओर पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि ऐसे व्यक्ति पर एक पिता कैसे भरोसा कर सकता है जो एक हिंदू युवती से शादी करने के लिए अपना धर्म तक बदल सकता है और फिर अपने धर्म में लौट जाता है। लड़की के पति की तरफ से पेश वकील गोपाल शंकरनारायण ने इन दलीलों पर आपत्ति प्रकट की और कहा कि लड़की को सिर्फ अपने पिता के अतिरिक्त किसी से भी सुरक्षा की जरूरत नहीं है।
हमें लड़की के भविष्य की चिंता- कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच ने कहा, “हमें सिर्फ लड़की के भविष्य की चिंता है। हम अंतर-धार्मिक या अंतर-जातीय विवाह के खिलाफ नहीं हैं। क्या होगा अगर वह व्यक्ति युवती को छोड़ देगा? कई बार गलत इरादों से की गई शादी में महिला को छोड़ दिया जाता है।” कोर्ट ने कहा कि व्यक्ति को एक विश्वसनीय पति बनना चाहिए। रोहतगी ने कहा- लड़की एक रैकेट में फंस चुकी है। सर्वोच्च न्यायालय ने वकील से इस संबंध में हलफनामा दायर करने को कहा।
कोर्ट ने राज्य सरकार से मामले में जवाब देने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्ति से पूछा कि क्या उसने आर्य समाज मंदिर में शादी के बाद अपना नाम बदला है? नाम बदलने के लिए क्या उचित कानूनी कदम उठाए हैं? महिला के पिता के वकील ने कहा- महिला को सुरक्षा की जरूरत नहीं है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से भी जवाब तलब किया है।
