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पश्चिम बंगाल में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बम फेंका, वाहन जलाए; केरल में नोबेल विजेता की हाउसबोट रोकी

2 वर्ष पहले
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पश्चिम बंगाल में प्रदर्शनकारियों ने कई जगह रेल रोकने की कोशिश की। - Dainik Bhaskar
पश्चिम बंगाल में प्रदर्शनकारियों ने कई जगह रेल रोकने की कोशिश की।
  • केरल, असम, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में हड़ताल के चलते बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हुईं
  • दिल्ली समेत उत्तर भारत में हड़ताल का आंशिक असर, यातायात पर भी असर नहीं

नई दिल्ली. केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में वाम समर्थित 10 ट्रेड यूनियनों की हड़ताल का मिला-जुला असर देखने को मिला। पश्चिम बंगाल के मालदा में पुलिस और हड़ताल समर्थक प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। गाड़ियों में आग लगाने के बाद पुलिस पर बम फेंके गए। केरल के अलापुझा में हड़ताल कर रहे लोगों ने नोबेल पुरस्कार विजेता माइकल लेविट और उनकी पत्नी को लेकर जा रही हाउसबोट को रोक दिया। हालांकि बाद में उन्हें जाने दिया गया। देश के कई राज्यों में ट्रेड यूनियनों ने रैली और सभाएं कीं।


श्रमिक संगठनों की तरफ बुधवार की हड़ताल में 25 करोड़ लोगों के शामिल होने का दावा किया गया था। हड़ताल को भारतीय व्यापार संघ, ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर, हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), स्व-रोजगार महिला संघ, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन शामिल हैं। इसके अलावा (एलपीएफ), यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (यूटीयूसी), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एआईसीसीटीयू), इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (आईएनटीयूसी) और ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर ने समर्थन दिया।

केरल: नोबेल विजेता और उनकी पत्नी 2 घंटे तक फंसे रहे
केरल में प्रदर्शनकारियों ने राज्य अतिथि की हैसियत से पहुंचे नोबेल पुरस्कार विजेता माइकल लेविट और उनकी पत्नी को लेकर जा रही हाउसबोट को रोक दिया। करीब 2 घंटे के बाद उनकी नाव को आगे जाने दिया गया। लेविट को 2013 में रसायन शास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिला था। इस घटना के बाद राज्य के पर्यटन मंत्री कडकमपल्ली सुरेंद्रन ने कहा, “हम बोट का रास्ता रोकने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।” तिरुवनंतपुरम में भी ट्रेड यूनियनों ने रैली निकाली।

पश्चिम बंगाल: कई जगह प्रदर्शन, हिंसा और झड़प
पश्चिम बंगाल के मालदा में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। हालात संभालने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। सुजापुर में सड़क बंद कर रहे हड़ताल समर्थकों ने पुलिस पर पथराव किया। कलियाचक में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बम फेंका और एक वाहन को आग लगा दी। राज्य में रोडवेज की दो बसों को भी जला दिया गया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वाम दलों को इसका जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, “सीपीआईएम की कोई विचारधारा नहीं है। रेलवे ट्रेक पर बम रखना 'गुंडागर्दी' है और आंदोलन के नाम पर यात्रियों को पीटना या पथराव करना 'दादागीरी' है। यह आंदोलन नहीं है, मैं इसकी निंदा करती हूं।”

मुंबई: शिवसेना ने भारत बंद को समर्थन दिया। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ने लिखा, भाजपा सरकार के पहले कार्यकाल ने उद्योग और कर्मचारी वर्ग को खासा नुकसान पहुंचाया है। इसका कारण सरकार के नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसले रहे हैं। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के कर्मचारियों ने विनिवेश के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया।

दिल्ली: राहुल गांधी का ट्वीट-  मोदी-शाह सरकार की जन-विरोधी नीतियों ने विनाशकारी बेरोजगारी को बढ़ावा देकर हमारे सार्वजनिक उपक्रमों को कमजोर किया है। आज 25 करोड़ कर्मचारी हड़ताल पर हैं। मैं उन सभी को सलाम करता हूं।

पटना: राजेंद्र नगर टर्मिनल पर ट्रेन रोकने पहुंचे आईसा सदस्यों की रेलवे पुलिस से झड़प हुई। पुलिस ने जब इन्हें प्लेटफॉर्म पर जाने से रोका, तो बंद समर्थकों ने जवानों के हथियार छीनने की कोशिश की।

उत्तर प्रदेश: पब्लिक सेक्टर बैंकों, बीएसएनएल, डाक और एलआईसी समेत कई दफ्तरों में कामकाज पर असर पड़ा। अखिल भारतीय राज्य सरकार कर्मचारी महासंघ और महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ ने भी हड़ताल का समर्थन किया।

पंजाब: जालंधर में वाम संगठनों ने इंडस्ट्रियल एरिया फोकल प्वाइंट एक्सटेंशन की रोड ब्लॉक की। भारतीय जीवन बीमा निगम कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। अमृतसर में कुछ रेलें रोकी गईं।

हरियाणा: अलग-अलग डिपो में हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। सरकारी बसों के संचालन पर भी असर पड़ा। 

तमिलनाडु: चेन्नई में माउंट रोड पर कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया।


हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, ओड़िशा, तेलंगाना, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और आंध्रप्रदेश में भी मजदूर संगठनों ने धरना-प्रदर्शन और सभाएं करके विरोध जताया। कई शहरों में यातायात, बिजली और बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ा। पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा और लेफ्ट शासित केरल में बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ा। हालांकि दिल्ली समेत उत्तर भारत में हड़ताल का ज्यादा असर नहीं देखा गया।