भास्कर 360° / देश के 107 सबसे बड़े तालाब 76% तक भरे, 3% ज्यादा बारिश; 26 दिन में 2% पानी बरसा



तस्वीर मराठवाड़ा के लातूर जिले की है। यहां अभी तक औसत से 25 फीसदी कम बारिश हुई है। पानी की कमी को देखते हुए प्रशासन ने मूर्तियां विसर्जित नहीं करने का आह्वान किया था। तस्वीर मराठवाड़ा के लातूर जिले की है। यहां अभी तक औसत से 25 फीसदी कम बारिश हुई है। पानी की कमी को देखते हुए प्रशासन ने मूर्तियां विसर्जित नहीं करने का आह्वान किया था।
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तस्वीर मराठवाड़ा के लातूर जिले की है। यहां अभी तक औसत से 25 फीसदी कम बारिश हुई है। पानी की कमी को देखते हुए प्रशासन ने मूर्तियां विसर्जित नहीं करने का आह्वान किया था।तस्वीर मराठवाड़ा के लातूर जिले की है। यहां अभी तक औसत से 25 फीसदी कम बारिश हुई है। पानी की कमी को देखते हुए प्रशासन ने मूर्तियां विसर्जित नहीं करने का आह्वान किया था।

  • कम बारिश के सभी अनुमान गलत साबित हुए, महीने के अंत तक जारी रहेगी बरसात
  • लगातार बारिश से 11 राज्यों ने झेली बाढ़, 1275 मौतें, खरीफ फसल को भी नुकसान

Dainik Bhaskar

Sep 15, 2019, 08:38 AM IST

नई दिल्ली. देश जब गर्मी से झुलस रहा था, उसी दौरान 3 अप्रैल को स्काईमेट वेदर एजेंसी ने एक दावा किया- इस बार मानसून सामान्य से नीचे रहेगा। मानसून की औसत 887 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले 93% बारिश का ही अनुमान है।

 

जाहिर है, जल संकट से जूझ रहे शहरों को गहरी निराशा हुई। एक हफ्ते देरी के बाद जब मानसून ने केरल में दस्तक दी, तो लगने लगा था कि स्काईमेट का अनुमान सच साबित होकर रहेगा। इंद्रदेव को खुश करने के लिए मेंढ़क-मेंढ़कियों तक के विवाह धूमधाम से कराए गए। शुरुआती धीमेपन के बाद जब मानसून बरसना शुरू हुआ तो इसने रुकने का नाम नहीं लिया। नतीजा- 11 राज्यों में बाढ़ आ गई। बारिश अब भी जारी है। कई शहरों में पीने के पानी का जो संकट था, वो साल भर तक के लिए टल गया है। 


देश में 11 सितंबर तक 805.3 मिमी बारिश हो चुकी है। यानी सामान्य तौर पर इस अवधि में होने वाली बारिश से तीन फीसदी ज्यादा पानी बरस चुका है। एक और खास बात-पूरे मानसून सीजन में 26 दिनों (25 जुलाई से 19 अगस्त) की बारिश सबसे भारी रही। मानसून के कोटे का 22% पानी इसी बीच बरसा। इस बारिश से फायदा हुआ है तो नुकसान भी कम नहीं हुआ। खरीफ की फसल को कई राज्यों में नुकसान हुआ है। अलग-अलग राज्यों में अब तक 1275 इंसानी जानें जा चुकी हैं।

 

भारी बारिश के पीछे कई वैज्ञानिक कारण हैं, जिसके चलते 11 राज्य- पंजाब, उत्तराखंड, दिल्ली, हिमाचल, महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, गुजरात, असम, पश्चिम बंगाल और मध्यप्रदेश बाढ़ की चपेट में आ गए। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसा पहली बार है कि मानसून को प्रभावित करने वाले दो मजबूत फैक्टर एक साथ असरदार हो गए। अमूमन ऐसा नही होता। इसी का परिणाम है िक बारिश ने कई जगह रौद्ररूप ले लिया। हालांकि,   इस बारिश का फायदा रबी की फसल में भी देखने को मिल सकता है। 


मानसून की इस बैलेंस शीट को समझा रहे हैं हमारे एक्सपर्ट: आईएमडी के डीजी मृत्युंजय महापात्र, कृषि विज्ञान केंद्र भोपाल के सेवानिवृत्त डायरेक्टर जीएस कौशल और सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड के चेयरमैन केसी नायक।

 

देश भर में बरसा, पर लातूर में विसर्जन के लिए भी पानी नहीं 
मराठवाड़ा के लातूर जिले से यह तस्वीर आई है। यहां अभी तक औसत से 25 फीसदी बािरश कम हुई है। अधिकांश जलाशय खाली पड़े हैं। पानी की कमी को देखते हुए प्रशासन ने मूर्तियां विसर्जित नही करने का आह्वान किया था। इसके चलते 28 हजार मूर्तियां विसर्जित नही की गई। इन्हें मूर्तिकारों को वापस कर दिया गया है ताकि वे अगले वर्ष इनका दोबारा उपयोग करे सके।

 

देश में कितनी बारिश हुई?

  • 805.3 मिमी बारिश हो चुकी है 1 जून से 11 सितंबर तक।
  • 783 मिमी बारिश सामान्य तौर पर इस अवधि में होती है। यानी इस बार 3% ज्यादा बारिश।

 

एजेंसियों के अनुमान गलत साबित हुए

  • मौसम विभाग : 96%: जून से सितंबर तक कुल औसत बारिश का 96% बारिश ही होगी। सामान्य रेंज (96 से 104% ) से कम बारिश की बात विभाग ने कही थी। जबकि 11 सितंबर तक ही 90 प्रतिशत से अिधक बारिश हो चुकी है। अभी 20 दिन शेष हैं।
  • स्काईमेट : 93%: जून से सितंबर तक देश की कुल औसत बारिश 887 मिमी का 93% (825 मिमी) बारिश होने का अनुमान जताया था यानि सामान्य से 7% कम। 30 सितंबर तक यह आंकड़ा सामान्य रेंज से अधिक पहुंचने की संभावना है।

 

भारी बारिश के दो अहम कारण

  • अलनीनो का असर खत्म: स्काईमेट और मौसम विभाग ने अनुमान जताया था कि इस बार अलनीनो मानसून को प्रभावित करेगा। पर ऐसा नहीं हुआ। जुलाई और अगस्त महीने में ही सामान्य से 3 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी गई है। 
  • भारतीय नीनो हुआ हावी: अलनीनो के उलट देश में इस बार इंडियन ओशियन डाइपोल (आईओडी) हावी रहा। इसे भारतीय नीनो भी कहा जाता है। इसके चलते देश के कई हिस्सोंं में भारी बारिश हुई। आईओडी का असर अभी भी बना हुआ है।

 

फायदा: अधिकांश जलाशय भरे, होगी रबी की बंपर फसल

1). देश के स्टोरेज का 50 प्रतिशत पानी फुल: सेंट्रल वाटर कमीशन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश के 107 प्रमुख जलाशय 29 अगस्त तक 76% से अधिक भर चुके हैं। यह देश के कुल वाटर स्टोरेज 257.812 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) का लगभग 50% है। यहां जलाशय का अर्थ प्राकृतिक रूप से अथवा मानव द्वारा निर्मित जल संचय के स्थान से है जो बांधों से अलग हैं।

2). रबी की फसल में 30% तक वृद्धि होगी: कृषि वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस बारिश के बाद रबी की फसल में 20 से 30 फीसदी की वृद्धि हो सकती है। ग्राउंड वाटर का रीचार्ज होना इसका प्रमुख कारण है। इनमें से 87 जलाशय ऐसे हैं जिनकी फुल रिजर्व लेवल क्षमता 126.63 बीसीएम है, इन जलाशयों का उपयोग कृषि में सिंचाई के लिए किया जाता है।

3). छह सूखे राज्यों को सबसे ज्यादा फायदा: मई 2019 तक असामान्य रूप से सूखे वाली कैटेगिरी में पहुंच चुके आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों को भारी राहत मिली है। 2018 में असामान्य रूप से सूखे के 0.68 प्रतिशत की तुलना में इस बार 5.66 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई थी। इससे पानी को लेकर हाहाकार मच गया था।

 

नुकसान: 11 राज्योंं में बाढ़, 1275 मौतें

  • 1). खरीफ की फसल को सीधा नुकसान: अत्यधिक बारिश से खरीफ की फसल को सीधा नुकसान पहुंचता है। मूंग, मोठ, लोबिया जैसी दलहनी फसलों में मोजेक रोग लग जाता है। बाजरा में अरगट, मूंगफली में टिक्का नामक रोग लग जाते है। बाढ़ की वजह से महाराष्ट्र, ओड़िशा और आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों में धान की खेती बुरी तरह प्रभावित हुई है।
  • 2). 1275 मौतें, 90 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित: गृहमंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 11 राज्यों मेंं आई बाढ़ से लगभग 90 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए। इसमें 1275 लोगोंं की जान चली गई। 66514 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए। 94434 मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए। 713892 हेक्टेयर खेतिहार जमीन पूरी तरह खराब हो गई। यहां खड़ी फसलें तबाह हो गईं।

 

सबसे अहम
देश में कुल 26 दिन हुई बारिश ने हाहाकार मचाया है। 25 जुलाई से लेकर 19 अगस्त के बीच कुल औसत बारिश का 22 प्रतिशत पानी बरसा, जिसके चलते कई राज्यों में बाढ़ की स्थिति बन गई। 25 जुलाई को देश की कुल औसत बारिश सामान्य से 20 प्रतिशत कम थी जबकि 19 अगस्त को आंकड़ा सामान्य बारिश से 2 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया।


जहां बारिश की सबसे ज्यादा जरूरत थी, वहां क्या रहा?
मराठवाड़ा: तीन साल से सूखे से जूझ रहा है। अभी भी18 फीसदी कम बारिश

तीन साल से सूखे और कमजोर बारिश से जूझ रहे मराठवाड़ा में इस बार भी कम बारिश हुई है। 1 जून से 13 सितंबर तक यहां पर 476.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है जबकि सामान्य बारिश 579.8 मिमी है।


चेन्नई: एक टैंकर का 6000 रुपए तक लोगों ने चुकाया, यहां 18% ज्यादा बारिश
मई-जून 2019 में पानी की भीषण कमी से जूझने वाले चेन्नई को राहत मिली है। गर्मियों में लोगों को एक टैंकर पानी के लिए 6000 रुपए तक चुकाने पड़े थे। यहां 13 सितंबर तक सामान्य से 18 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है।


बेंगलुरू: अपार्टमेंट निर्माण पर रोक की थी तैयारी, अभी भी 21% कम बारिश
बेंगलुरू शहर भी इस बार भीषण जल संकट से जूझा। मजबूरी में राज्य सरकार को यहां पांच साल तक अपार्टमेंट निर्माण पर रोक के लिए प्रस्ताव लाना पड़ा। हालांकि विरोध होेने पर इसे निरस्त कर दिया गया। अभी भी यहां 13 सितंबर तक सामान्य से 21 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।


11% की कगार पर पहुंचने वाले जोन हुए पानी से तर
मई 2019 के अंत तक सूखे की भयंकर चपेट में पहुंच चुके देश के पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्र भी पानी से तर हो चुके हैं। दोनों क्षेत्रों के सात राज्योंं मेंं कुल स्टोरेज वाटर लेवल मई माह के अंत मेंं 11 प्रतिशत पर पहुंच गया था। पश्चिमी क्षेत्र के गुजरात और महाराष्ट्र तथा दक्षिण के आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु शामिल हें।

 

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