भास्कर 360° / आरोप-विदेशी निवेश की मंजूरी के नाम घूस ली, बचाव-जिन कंपनियों में पैसा गया उनसे चिदंबरम का वास्ता नहीं



Bhaskar 360°: INX Media Controversy and P Chidambaram
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  • आईएनएक्स मीडिया विवाद में वो सब कुछ जो आपको जानना चाहिए
  • क्या कोर्ट में सीबीआई साबित कर सकेगी चिदंबरम पर लगे आरोप?, पढ़िए

Dainik Bhaskar

Aug 25, 2019, 01:39 AM IST

भास्कर नेटवर्क. आईएनएक्स मीडिया केस में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत की अर्जी रद्द किए जाने के बाद पूर्व वित्त व गृह मंत्री पी.चिदंबरम 21 अगस्त से सीबीआई की हिरासत में हैं। उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कांग्रेस ने इसे राजनीति प्रेरित और बदले की कार्रवाई करार दिया है। सीबीआई की विशेष अदालत से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई भी जारी है।

 

असल में पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी ने 2007 में आईएनएक्स मीडिया की नींव ही घोटाले के लिए रखी थी। क्योंकि, कंपनी को सिर्फ 4.62 करोड़ रुपए के ही विदेशी निवेश की मंजूरी मिली और उसने मंगा लिए 305.36 करोड़ रुपए यानी स्वीकृत राशि से तीन सौ करोड़ अधिक।

 

बिना विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी के इतनी बड़ी राशि आने पर वित्त मंत्रालय की फायनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट का माथा ठनका और मामले की जांच शुरू हो गई। लेकिन, इसी बीच इस निवेश के लिए एफआईपीबी की मंजूरी लेने की कोशिशें भी मुखर्जी दंपती ने शुरू कर दी और 1 नवंबर 2008 को उन्हें इसकी अनुमति भी मिल गई। क्योंकि यह अनुमति निवेश आने के बाद हुई थी इसलिए इसकी जांच भी जारी रही और 2010 में फेमा के उल्लंघन के आरोप में मुकदमा भी दर्ज हो गया।


इसके बावजूद करीब सात साल तक यह मामला फाइलों में ही चलता रहा, लेकिन 2017 में एयरसेल-मैक्सिस डील की जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय को कुछ ऐसे कागजात मिले, जिनसे यह पता चला कि आईएनएक्स मीडिया ने चिदंबरम के पुत्र कार्ति चिदंबरम से जुड़ी कंपनी को काफी पैसा ट्रांसफर किया है। यह पैसा उसी अवधि में ट्रांसफर किया गया, जब आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश की मंजूरी दी गई थी।

 

इसके बाद हुई जांच में एक-एक कर नई जानकारियां सामने आने लगीं। हाल ही में इंद्राणी मुखर्जी के अप्रूवर (वादा माफ गवाह) बनने के बाद तो सीबीआई के हाथ मजबूत हो गए। अब सीबीआई ने इस केस में मनी ट्रेल की जांच के लिए भी पांच देशों से संपर्क किया है। सीबीआई के सूत्रों ने बताया कि 5 देशों को लेटर ऑफ रोगेटरी भेजे गए हैं। इनमें ब्रिटेन, स्विट्ज़रलैंड, बरमूडा, मॉरीशस और सिंगापुर शामिल हैं। 
 

 

सूत्रधार कंपनी

एक ऐसी कंपनी, जो 2007 मेें बनी। 2009 में इसके संस्थापक पीटर और इंद्राणी ने खुद को कंपनी के प्रबंधन से अलग कर लिया। अगस्त 2010 में कंपनी ने अपना नाम बदल कर 9एक्स मीडिया कर लिया और इसे जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज को 160 करोड़ रुपए में बेच दिया।

 

अहम किरदार

  • पीटर मुखर्जी: ब्रिटेन में पैदा हुए टेलीविजन इंडस्ट्री के एक रिटायर्ड अधिकारी। 1997 से 2007 तक स्टार इंडिया के सीईओ रहे। 2007 में आईएनएक्स मीडिया के चेयरमैन और मुख्य रणनीतिक ऑफिसर बने। 2009 में कंपनी छोड़ दी। नवंबर 2015 में शीना बोरा की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार, जेल में हैं।
  • इंद्राणी मुखर्जी: पूर्व एचआर सलाहकार व मीडिया अधिकारी। पीटर मुखर्जी की पत्नी। 2007 में पीटर के साथ आईएनएक्स मीडिया शुरू किया और उसकी सीईओ बनीं। अगस्त 2015 में बेटी शीना बोरा की हत्या के आरोप में मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया और तब से जेल में हैं।
  • पी. चिदंबरम: कांग्रेस के राज्य सभा सदस्य और पूर्व वित्त व गृहमंत्री। वह यूपीए सरकार में मई 2004 से नवंबर 2008 तक वित्तमंत्री रहे। नवंबर 2008 से जुलाई 2012 तक गृहमंत्री रहे और फिर जुलाई 2012 से मई 2014 तक वित्तमंत्री रहे। वह राजीव गांधी की सरकार में भी उपमंत्री रहे।
  • कार्ति चिदंबरम: पी. चिदंबरम के पुत्र कार्ति शिवगंगा से सांसद हैं। बड़े व्यवसायी हैं। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में गुप्त भागीदारी के आरोपों की जांच चल रही हैं। कार्ति आरोपांे को गलत बताते रहे हैं। फरवरी 2018 में सीबीआई कार्ति को आईएनएक्स मीडिया केस में गिरफ्तार भी कर चुकी है। वह अभी जमानत पर हैं।

 

क्यों की गड़बड़ी
आईएनएक्स को अनुमति मिली सिर्फ 4.62 करोड़ रुपए के विदेशी निवेश की। लेकिन, मॉरिशस की तीन कंपनियों डनअर्न इनवेस्टमेंट, एनएसआर-पीई और न्यू वरनॉन प्रा. लिमिटेड ने आईएनएक्स में 305 करोड़ रुपए का निवेश किया। आईएनएक्स मीडिया ने इसमें से 26 फीसदी राशि को एफआईपीबी की अनुमति के बिना ही आईएनएक्स न्यूज में लगा दिया। इस राशि को एफआईपीबी से मंजूरी दिलाने के लिए ही यह सारी गड़बड़ी करनी पड़ी।

 

कब आया कार्ति का नाम
मुकदमा दर्ज होने के करीब सात साल बाद एयरसेल-मैक्सिस डील में जब प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी कार्ति से जुड़ी कंपनी एडवांटेज स्ट्रेटेजिक कंस्लटिंग प्राइवेट लिमिटेड (एएससीपीएल) की जांच कर रहे थे तो उन्हें वहां आइएनएक्स से जुड़े कुछ कागजात मिले। इनमें संकेत थे कि जिस दौरान आईएनएक्स को एफआईपीबी की अनुमति दी गई थी, उसी अवधि में उसने कार्ति से संबंधित कंपनी को पेमेंट की थी।

 

क्या हैं इस मामले में आरोप
इंद्राणी और उनके पति पीटर मुखर्जी पर आरोप है कि उन्होंने तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिदंबरम के पुत्र कार्ति चिदंबरम के साथ मिलकर एफआईपीबी की अनुमति हासिल करने के लिए आपराधिक साजिश रची। कार्ति चिदंबरम को सीबीआई ने फरवरी, 2018 में गिरफ्तार किया। वह बाद में जमानत पर रिहा हुए। ईडी भी इस मामले में कई बार उनसे पूछताछ कर चुकी है। पी. चिदंबरम से भी ईडी ने दिसंबर 2018 व जनवरी 2019 में पूछताछ की थी।

 

कैसे आया टर्निंग प्वाइंट
जेल में बंद इंद्राणी ने मार्च 2018 में एक बयान में सीबीआई के समक्ष कहा कि आईएनएक्स मीडिया के पक्ष में एफआईपीबी की स्वीकृति दिलाने के लिए उनके और कार्ति के बीच 10 लाख डॉलर (करीब सात करोड़ रुपये) की डील हुई थी। जुलाई, 2019 में इंद्राणी ने कोर्ट में अर्जी लगाकर माफी का आग्रह किया और कहा कि इसके बदले में वह इस मामले का पूरा सच उजागर करने को तैयार है। इस पर कोर्ट ने सहमति दे दी। बस यहीं से इस मामले में नया मोड़ आ गया।

 

चिदंबरम का पक्ष

  • जिन कंपनियों मेें पैसा जाने की बात कही जा रही है, उनमें न तो चिदंबरम और न ही कार्ति कभी शेयर हाेल्डर या डायरेक्टर रहे। साथ ही किसी भी मामले मंे सरकारी पैसा शामिल नहीं रहा।
  • जिन कंपनियों पर सवाल उठा है, उन्हें प्रोफेशनल चला रहे हैं और धन के सभी आदान-प्रदान सामान्य है। ये लेन-देन पूरी तरह से अकाउंटेड, ऑडिटेड हैं। 
  • चिदंबरम की संपत्ति और देनदारी सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध हैं, क्योंकि वे सांसद हैं। इनके अलावा उनके पास कोई संपत्ति नहीं है। 
  • सीबीआई ने 2012 और 2017 की एफआईआर के अलावा इस मामले में आज तक न तो काेई चार्जशीट जारी की है और न ही इसका कोई संज्ञान लिया गया है। इसके अलावा भ्रष्टाचार के कथित मामले में न तो पी. चिदंबरम को और न ही उस समय के किसी एफआईपीबी के अधिकारी को आरोपी बनाया गया है।

 

सीबीआई के सबूत

  • आईएनएक्स के एमडी व सीएफओ ने 4 नवंबर और 16 नवंबर, 2016 को दिए बयान में स्वीकार किया था कि उनकी कंपनी की कार्ति चिदंबरम की कंपनी चेस मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड से डील हुई थी। 
  • सीबीआई के मुताबिक आईएनएक्स मीडिया ने एएससीपीएल और अन्य कंपनियों को जेनेवा, अमेरिका और सिंगापुर स्थित बैंकों के जरिए भुगतान किया। 
  • सीबीआई का यह भी दावा है कि एएससीपीएल और अन्य कंपनियों ने दिखावे के लिए मीडिया कंटेंट उपलब्ध कराने और मार्केट रिसर्च के नाम पर कंसलटेंसी के झूठे बिल देकर पैसे हासिल किए। 
  • ईडी ने सीबीआई को बताया कि एएससीपीएल के परिसर से बरामद दस्तावजों में खुलासा हुआ है कि आईएनएक्स ने एएससीपीएल को 15 जुलाई, 2008 को भुगतान किया और 1 नवंबर, 2008 को आईएनएक्स न्यूज को वित्त मंत्रालय से मंजूरी मिल गई।

 

जमानत मिलेगी, पर मु्श्किलें कम नहीं होंगी

चिदंबरम के पक्ष में सबसे बड़ी बात यह है कि एफआईआर में उनका नाम नहीं है और बहुत पुराना मामला होने की वजह से एजेंसियों को सबूत जुटाना मुश्किल होगा। एफआईआर में उनके बेटे का नाम है और उनकी पोती के हक़ में भ्रष्टाचार की रकम पंहुची, यह उनके खिलाफ है। मंत्री के नाते चिदंबरम के भ्रष्ट आचरण और आपराधिकता सिद्ध करने के लिए ठोस सबूत के तौर पर सीबीआई को एफआईपीबी के अन्य सदस्यों के भी बयान लेने होंगे। इंद्राणी की गवाही महत्वपूर्ण होने के बावजूद सवालों के घेरे में रहेगी, क्योंकि वे जेल में बंद हत्या की अभियुक्त हैं। चिदंबरम को अदालत से जमानत भले ही मिल जाए पर आने वाले समय में उनकी मुश्किलें कम होने वाली नहीं हैं ।  विराग गुप्ता, वकील

 

कब-कब क्या हुआ

  • 2010: आईडी ने आईएनएक्स के खिलाफ फेमा उल्लंघन का मामला दर्ज किया।
  • 2017: 15 मई: सीबीआई ने एफआईपीबी की अनुमति में गड़बड़ी का मामला दर्ज किया।
  • 16 जून: गृह मंत्रालय ने कार्ति के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया।
  • 10 अगस्त: मद्रास हाईकोर्ट ने इस लुकआउट सर्कुलर पर स्टे दिया।
  • 14 अगस्त: सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया।
  • 16 फरवरी: कार्ति के सीए एस.भास्कररमन को गिरफ्तार किया गया। 
  • 28 फरवरी: सीबीआई ने कार्ति को चेन्नई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया। 
  • 23 मार्च: कार्ति को जमानत मिली।
  • 11 अक्टूबर: ईडी ने कार्ति की 54 करोड़ की संपत्तियों को जब्त किया।
  • 2019: 11 जुलाई: इंद्राणी मुखर्जी इस मामले में वादा माफ गवाह बन गई।
  • 20 अगस्त: दिल्ली हाईकोर्ट ने पी. चिदंबरम की जमानत अर्जी खारिज की।
  • 21 अगस्त: सीबीआई ने चिदंबरम को गिरफ्तार किया।
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