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महाराष्ट्र में भाजपा के 1.48 करोड़ रजिस्टर्ड सदस्य, लेकिन वोट 1.41 करोड़ ही मिल पाए

10 महीने पहले
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तस्वीर दिल्ली भाजपा मुख्यालय की है। यहां पर मंच पर दो राज्यों के नतीजों को लेकर पीएम मोदी, जेपी नड्‌डा से चर्चा करते नजर आए।
  • महाराष्ट्र में एनडीए का वोट शेयर और सीटें दोनों पिछले आम चुनाव और विधानसभा चुनाव से कम हुईं
  • हरियाणा में पिछले विधानसभा चुनाव से 7 सीटें घटीं, पर वोट शेयर 3.1% बढ़ा
  • महाराष्ट्र में भाजपा की जीत का स्ट्राइक रेट 64% और शिवसेना का महज 45% रहा
  • भाजपा ने पिछली बार जीतीं 48 सीटें इस बार गंवा दीं, शिवसेना ने 27 सीटें खोईं
  • हरियाणा में भाजपा ने 2014 में जीतीं 22 सीटें इस बार गंवाईं, इनमें से 14 कांग्रेस के पास गईं

मुंबई/चंडीगढ़. महाराष्ट्र और हरियाणा में 5 महीने में राजनीतिक परिदृश्य बदल गया है। महाराष्ट्र में एनडीए का वोट शेयर और सीट पिछले विधानसभा चुनाव और आम चुनाव से घटा है। हरियाणा में भाजपा का आम चुनाव से वोट शेयर कम हुआ है, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव से बढ़ा है। खास बात, महाराष्ट्र में भाजपा के 1.48 करोड़ रजिस्टर्ड  सदस्य हैं, पर वोट 1.41 करोड़ ही मिल पाए। 2019 आम चुनाव में भाजपा को राज्य में 1.49 करोड़ वोट मिले थे। हरियाणा में भाजपा के 38 लाख सदस्य हैं और वोट 45.69 लाख मिले हैं। 
 

महाराष्ट्र: 2014 विधानसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना का गठबंधन टूट गया था। इस बार दोनों साथ लड़ीं। भाजपा 164 सीटों पर लड़ी और 105 सीटें जीती, जीत का स्ट्राइक रेट 64% रहा। शिवसेना 124 सीटों पर लड़ी और 56 सीटें जीतीं। शिवसेना का जीत का स्ट्राइक रेट 45% रहा। वहीं, पश्चिमी महाराष्ट्र को शरद पवार का गढ़ माना जाता है, यहीं के बारामती में उनका जन्म हुआ था। पश्चिमी महाराष्ट्र की 58 में से 16 सीटें ऐसी थीं, जिन्हें एनसीपी 1999 से जीतती आ रही थी, हालांकि इस बार उनमें से 4 सीटें खो दीं। 2019 आम चुनाव में भी एनसीपी ने इसी क्षेत्र की सभी 4 सीटें जीती थीं। एनसीपी को इस चुनाव में 15 सीटों का फायदा हुआ है। भाजपा ने पिछली बार जीती अपनी 48 सीटें (40%) इस बार गंवाई हैं। वहीं शिवसेना ने 27 सीटें (43%) खोईं। इनमें कुछ जीती हुई सीटें वे भी हैं, जो दोनों दलों ने गठबंधन के चलते एक-दूसरे को दी थीं। इनके मुकाबले कांग्रेस ने 23 सीटें (55%) और राकांपा ने 18 सीटें (44%) सीटें खोईं। 
 

हरियाणा: राज्य में भाजपा 2014 में जीती 47 सीटों में से 25 ही बचा पाई, जबकि 22 गंवा दी। भाजपा ने इस बार जो 22 सीटें गंवाई हैं, उनमें से 14 सीटें कांग्रेस, 6 सीटें जेजेपी और 2 सीटें निर्दलीय के खाते में गईं। हालांकि, भाजपा 15 नई सीटें जीतने में कामयाब रही।

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